
Patna: हर स्थान में पाये जाने वाले खाद्य कि कुछ ना कुछ अनोखी पहचान होती है। यह खाद्य ऐसे होते है। जोकि उस विशेष स्थान पर ही पाये जाते है। इन विशेष अनोखे खाद्य पदार्थ को अब जीआई टैग भी दिया जाता है। जीआई टैग से पता लगता है कि स्थान विशेष के खाद्य कि क्या पहचान है। भारत में बहुत से ऐसे लोग है जिन्हें पान खाना पसंद होता है।
इसका क्रेज भी लोगो के बीच काफी ज्यादा है। हम जानते है कि पान के स्वाद अलग अलग होते है। जब भी भारत के किसी घर में धार्मिक आयोजन होता है पान रखा जाता है। भारत के ऐसे बहुत से राज्य है जहां पर पान के बेल को खेत में उगाया जाता है। इसकी बढ़ती लोकप्रियता के चलते अब सरकार भी इसकी खेती में लोगो को प्रोत्साहन दे रही है।
मगही पान जो वाराणसी कि है शान
मगही पान (Magahi Paan) के विषय में आपने तो अवश्य ही सुना होगा। इस बनारसी मगही पान के दीवाने पूरे दुनिया में बहुत से लोग है। इस पान के लिये दूर-दूर से लोग शहर वाराणसी (Banaras) आते है। इस पान कि खेती बिहार (Bihar) राज्य के मगध क्षेत्र में ज्यादा होती है।

इसकी लोकप्रियता के कारण ही सरकार की ओर से जीआई टैग इस मगही पान को मिला है। इसे ही ध्यान में रखकर बिहार सरकार अब चाय तथा प्याज कि खेती के समान मगही पान कि खेती में भी बिहार के किसानो को 50 प्रतिशत कि सब्सिडी (Subsidy) देंगी।
पान कि खेती के लिये सरकार देगी इतनी सब्सिडी
300 वर्ग मीटर के क्षेत्र में जब मगही पान कि खेती (Betel Farming) कि जाती है, तो लगभग 70 हजार 500 रूपये का खर्चा आता है। जब सरकार इस पर सब्सिडी देगी। तो किसानों को इस रकम की 32250 रूपये कि लागत वापस हो जायेगी। जिससे किसानों को इस खेती को करने को काफी प्रोत्साहन मिलेगा।

अभी कि बात करें तो यह योजना बिहार के गया, नवादा, शेखपुरा तथा नालंदा में चलाई जा रही है। इस योजना का लाभ अगर आप भी लेना चाहते है, तो इसके लिये आप आवेदन दे सकते है।
इस वेबसाइट पर जाकर कर सकते है आवेदन
इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिये उद्यानिकी फसल योजना के अंतर्गत आने वाले उद्यान निदेशालय में जाकर उसकी ऑफिशियल वेबसाईट पर आवेदन दे सकते है। वह ऑफिशियल वेबसाईट http://horticulture.bihar.gov.in है। अगर आपको कोई ओर भी जानकारी इससे संबंधित प्राप्त करनी हो तो अपने जिले के आस पास पाये जाने वाले उद्यान विभाग कार्यालय पर जाकर जानकारी ले सकते है।
पान कि खेती से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी
अगर आप भी चाहते है कि मगही पान कि खेती करें, तो आइये इससे संबंधित कुछ विशेष बातों को जानते है। जब भी पान कि खेती (Paan Cultivation) की जाती है तो इसके लिये छायादार तथा ठंड वाले क्षेत्र कि आवश्यकता पड़ती है। इसकी खेती के लिये सिर्फ 20 डिग्री सेंटीग्रेड के तापमान कि आवश्यकता होती है।
अगर इसकी खेती करनी हो तो बांस का एक छायादार संरचना आप तैयार कर सकते है। ताकि तापमान को संतुलित किया जा सके। इसकी खेती जून से जुलाई के माह में शुरू कि जाती है तथा कुछ प्रदेश ऐसे भी है, जहा पर इसकी खेती अगस्त से सितंबर के माह में होती है। बहुत से राज्य ऐसे भी है, जोकि फरवरी तथा मार्च के महीने में इसकी खेती करते है।
इस तरह मिट्टी का बेड तैयार करके कर सकते है पान कि खेती
पान के जो पौधे होते है उन्हें रोपने के लिये मिट्टी का बेड तेयार करना होता है। फिर इसमें सबसे पहले जुताई करते है। जुताई करके बेडनुमा संरचना तैयार कर लेते है। उसके बाद इस पर सिंचाई करते है तथा पान कि रोपाई करते है। पान कि खेती करते समय जो पोधे रोपे जाते है। उनके कतारों के बीच का डिस्टेंस 25 से लेकर 30 सेंटीमीटर तक का होता है तथा प्रत्येक पोधे के बीच कि बात करे तो यह दूरी 15 सेंटीमीटर की होती है।



