
Barmer: बचपन से हमारे देश मे पेरेंट्स बच्चों को दो ही सपनों के साथ बड़ा करते हैं कि एक दिन बड़े हो के वो या तो डॉक्टर बने या इंजीनियर परंतु हक़ीक़त में कुछ ही लोग इसमें सफल हो पाते हैं जिसकी कई वजह हैं जैसे छोटे क्षेत्रों में सही मार्गदर्शन न मिलना, पैसों की कमी के कारण सही कोचिंग न कर पाना।
यदि सब मिल भी जाये तो भी कई बच्चे क्वालीफाई नही कर पाते, क्योंकि उनमें वो जुनून या लगन नही होती, आज हम ऐसे ही एक मेघावी छात्र के बात करने वाले हैं, जिसने पिता के पंचर दुकान में मदद करते हुऐ बिना किसी से कोचिंग लिये NEET क्वालीफाई कर सबको हैरान कर दिया।
पिता जी चलाते हैं साइकल पंचर बनाने की दुकान
जानकारी के अनुसार राजस्थान के एक जिला बाड़मेर में सिवान नामक गाँव मे गांधी चौक पे एक साइकल पंचर (Cycle Punchar) बनाने की छोटी सी एक गुमटी है जैसे हमारे भी आस पास पाई जाती हैं और इस गुमटी को चलाते हैं, पनाराम जी, अगर रोज की आमदनी की बात करें तो पनाराम बताते हैं कि 300 रुपये रोज कमाई हो जाती है।
किसी दिन काम अच्छा मिला, तो 500 रुपये तक भी कमा लेते हैं, इतनी छोटी आमदनी के बावजूद पनाराम की सोच काफी दूर की है जिसके चलते उसने अपने बेटे जीतेन्द्र को प्रेरणा दी कि यदि सही से मेहनत करोगे, तो डॉक्टर बन सकते हो बस इस एक लाइन ने जीतेन्द्र को हिम्मत दी और दुकान में काम करते हुए पढ़ाई जारी रखी और NEET क्वालीफाई कर के असंभव को संभव कर डाला।
मां भी परिवार की आर्थिक स्तिथि को संभालने करती हैं ये काम
किसी भी परिवार के तरक्की और संपन्नता में हमेशा से घर की महिलाओं का भी रोल अहम माना गया है, और देखा गया है कि मुसीबत के समय में एक माँ किसी भी हद तक जा के अपने बच्चों को सपोर्ट कर सकती है।
ऐसा ही हुआ जब जीतेन्द्र की मां ने देखा उसका बेटा मेहनत कर के डॉक्टर बन सकता है, तो 5 लोगो के अपने परिवार को आर्थिक सपोर्ट करने के लिये कशीदाकारी का काम शुरू किया जिससे जीतेन्द्र (Jitendra Kumar) को अपनी पिता की दुकान से छुट्टी मिल सके पढ़ाई हेतु।
जीतेन्द्र के लिये संघर्षपूर्ण रहा NEET पार करने का ये सफर
दोस्तों आपको बताना चाहेंगे कि यदि डॉक्टर बन ना है तो दो ही रास्ते हैं या तो किसी महंगे प्राइवेट कॉलेज से पढ़ाई की जाये या फिर NEET अर्थात National Eligibility Entrance Test को क्वालीफाई कर सरकारी कॉलेज से डॉक्टरी की पढ़ाई की जाये।
जीतेन्द्र के पास पैसे का सोर्स नही था, इसलिये उसने दृढ़ निश्चय बनाया की सरकारी सीट ही क्वालीफाई करूँगा परन्तु चैलेंजेज बहुत थे, क्योंकि जीतेन्द्र न तो महंगी कोचिंग कर सकता था न ही शहर से बाहर कही जा सकता था।
इसकिये इंटरनेट को गुरु बनाया और दिन रात एक कर दी पढ़ाई में शुरू में काफी समस्या आयी समझने में पर लगन ऐसी थी कि धीरे धीरे उसे सब क्लियर होने लगा आपको बता दें कि जीतेन्द्र ने आल इंडिया में 32861वी रैंक प्राप्त की, वही SC कोटे में 638वी रैंक हासिल कर एक मिसाल कायम कर दी।
You-tube, इंटरनेट और फ्री ऑनलाईन क्लासेस पिछड़े क्षेत्रो के लिये एक वरदान
दोस्तों आज हम आये दिन देखते हैं कि किसी बहुत गरीब या पिछड़े क्षेत्रों से भी बच्चे बड़े बड़े एग्जाम पास कर रहे है जैसे हाल ही में एक कुली ने SSC का एग्जाम पास कर लिया।
वही रिक्शा चलाने वाले कि बेटी ने CA का एग्जाम पास किया आज ऐसे ढेरो Examples हैं। कभी अपने सोचा कि ऐसा कैसे अचानक ये हो रहा, तो इसके पीछे है की वजह है संचार क्रांति देश मे 4g आने के बाद से इंटरनेट पे हर तरह कि पढाई का लेटेस्ट मटेरियल लाइव क्लासेस मुफ्त में उपलब्ध है।
जिसका सबसे बड़ा सोर्स You Tube है, इसीका फायदा आज गांव का बच्चा बच्चा उठा रहा। तो टेक्नोलॉजी के जहां नुकसान होते है, वही बहुत सारे पॉजिटिव फायदे भी। तो अपने बच्चों को इंटरनेट का सही इस्तेमाल सिखायें उन्हें प्रेरित करेँ कुछ अच्छा सीखने के लिये।



