Dehradun: दोस्तों देश और दुनिया में बेटियां अपने हुनर से माता पिता ही नहीं बल्कि देश और अपने राज्य का नाम ऊंचा कर रही हैं। बेटियां हर क्षेत्र में आगे हैं और अपना नाम रोशन कर रहे हैं। शिक्षा का क्षेत्र हो या फिर खेल का मैदान हो हर जगह महिला अपनी पहुंच का प्रदर्शन कर रहे हैं।
पहले के बूढ़े बुजुर्गों से कहते हुए सुना है कि बेटा ही घर का चिराग और मां-बाप के बूढ़ी हड्डियों का सहारा होता है, परंतु इस बात को भी बेटियों ने साबित कर दिया कि बेटे ही नहीं बल्कि बेटियां भी हैं, जो बूढ़े मां बाप का सहारा बन सकती हैं।
कामों में बटवारा था कि यह काम आदमी ही कर सकता है औरत नहीं कर सकती परंतु औरत ने उनका भी मुंह बंद करा दिया, क्योंकि एक नारी शक्ति से बढ़कर कोई शक्ति नहीं होती। नारी हर वह काम कर सकती है जो इस दुनिया में संभव है।
सोशल मीडिया एक बहुत बड़ा प्लेटफार्म जहां रोजाना कुछ ना कुछ विशेष वायरल होते ही रहता है। इसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई सारी बेटियों के हैरतअंगेज कारनामे वायरल होते हैं। आज हम इस लेख के माध्यम से एक ऐसी ही बिटिया के विषय में बात करेंगे जिसने अपनी कमी को ना देखते हुए देश का नाम रोशन किया है।
दिव्यांग एथलीट गरिमा जोशी
दोस्तों हम जानते हैं कि हर किसी के जीवन में ढेरों परेशानियां कुछ लोग उन परेशानियों के साथ जीते हैं, तो कुछ उन परेशानियों को एक किनारे रख कर जीते हैं। ईश्वर ने किसी भी व्यक्ति को परफेक्ट नहीं बनाया कुछ दिमाग से तो कुछ शारीरिक कमजोरी के चलते इंपरफेक्ट होते हैं।

आज हम उत्तराखंड (Uttarakhand) राज्य की एक ऐसी बेटी की बात करें जिसने अपने दिव्यांगता (Handicap) के चलते देश में अपने नाम का डंका बजाया है। जी हां दोस्तों गरिमा जोशी वही गरिमा जोशी (Garima Joshi) है। जिन्होंने व्हीलचेयर पर बैठकर एक नहीं बल्कि 2-2 गोल्ड मेडल (Gold Medal) अपने हक में किए। गरिमा जोशी ने अपनी कमजोरी को ही अपना हथियार बनाया और आज भी देश दुनिया में नाम कमा रही है।
गरिमा हुई थी हादसे का शिकार
उत्तराखंड राज्य के अंतर्गत आने वाला अल्मोड़ा के द्वाराहाट क्षेत्र के छतगुल्ला गांव की रहने वाली गरिमा जोशी के साथ 31 मई वर्ष 2018 में एक दुखद घटना घटी जिसकी वजह से वह व्हील चेयर (Wheelchair) पर आ गई। कहा जा रहा है कि उन्होंने एक एक्सीडेंट में अपने चलने की शक्ति को दी थी।
जिसके बाद से वे व्हीलचेयर का सहारा लेकर अपना जीवन चला रही हैं, परंतु गरिमा जोशी ने कभी इन परिस्थितियों को खुद की सफलता पर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने अपने हौसले के साथ मेहनत की और सफलता का यह मुकाम हासिल किया।
जैवलिन थ्रो और डिस्कस थ्रो प्रतियोगिता में लिया भाग
दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद गरिमा जोशी ने कुछ ऐसा कर दिखाया, जिसकी कल्पना करना हर किसी के बस की बात नहीं है। आपको बता दें गरिमा जोशी ने राज्य में आयोजित दिव्यांग वर्ग प्रतियोगिता एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दो गोल्ड मेडल अपने नाम किए।

दोस्तो उत्तराखण्ड युवा कल्याण, प्रारद एवं खेल उत्तराखण्ड नियम आयोजन के द्वारा राज्य स्तरीय खेल महाकुम्भ 2023 आयोजित किया गया था। गरिमा जोशी ने हिस्सा लिया। फरवरी माह की 21 और 22 तारीख वर्ष 2023 को डे क्लास के पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गरिमा जोशी के 2 स्वर्ण पदक की विजेता रही हैं।
कई प्रतियोगिता का बनी है हिस्सा
गरिमा जोशी ने कभी इस हादसे को कभी अपनी कमजोरी नहीं समझी बल्कि इस हादसे ने उन्हें और भी ज्यादा मजबूत बना दिया था। अपने हौसले की बदौलत उन्होंने यह सफलता हासिल की और अपने परिवार के साथ साथ उत्तराखंड का नाम रोशन किया।
आपको बता दें गरिमा जोशी ने इसी प्रकार की कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और ढेर सारे पदक जीते। पिछले वर्ष में इटली में आयोजित विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स प्रतियोगिता का हिस्सा बनी और उन्होंने रजत पदक के साथ साथ कांस्य पदक भी जीता। पूरा उत्तराखंड गरिमा जोशी की सफलता के लिए खुशियां मना रहा है और उनके उज्जवल भविष्य की कामना कर रहा है।




