बैंक कर्मी पिता ने अपने 4 बच्चों को पढ़ाया, चारों भाई-बहन UPSC परीक्षा पास कर IAS-IPS बने

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IAS-IPS officers
4 Siblings From UP's Lalganj Crack Civil Services Exam. Bank worker father's 4 children cleared UPSC and became IAS-IPS officers.

Lalganj: यूपीएससी परीक्षा का नाम इतना बड़ा है, कि हर स्‍टूडेंट का सपना इस परीक्षा को पास करके ऊँचा मुकाम हासिल करने का होता है। परन्‍तु कठिनाई का स्‍तर इसका इतना अधिक है, कि हर किसी का इस परीक्षा को पास करने का सपना पूरा नहीं हो पाता।

किसी परिवार में अगर एक आईपीएस, आईएएस या फिर आईएफएस (IAS-IPS-IFS) होता है। तो पूरे परिवार के लिए यह गर्व की बात होती है। सिर्फ परिवार के लिए ही नहीं इस परिवार से जुड़ा हर शख्‍स उस स्‍टूडेंट पर गर्व करता है जो इस परीक्षा को पास करता है।

परन्‍तु ऐसा हो कि एक ही परिवार के 4 सदस्‍य इस परीक्षा को पास कर ले, तो उस परिवार को क्‍या महसूस होगा। शायद इसकी कल्‍पना करना भी हमारे लिए कठिन है। परन्‍तु आज हम जो सक्‍सेस स्‍टोरी आपके पास लेकर आये है। उसमें कुछ ऐसा ही हुआ है। उत्‍तरप्रदेश (Uttar Pradesh) राज्‍य के जिले लालगंज (Lalganj) में रहने वाले एक परिवार के चारों भाई बहन यूपीएससी परीक्षा को पास करके आईएएस तथा आईपीएस (IAS-IPS Officer) के पद पर है।

एक परिवार के 4 सदस्‍य ने पास की यूपीएससी परीक्षा

हम जिस परिवार की बात कर रहे है। उस परिवार के मुखिया पूर्व बैंक मैनेजर थे। इस परिवार में 4 भाई बहन है। जिसमें से दो बहन व दो भाई है। पूर्व बैंक मैनेजर श्री अनिल प्रकाश मिश्रा (Anil Prakash Mishra) की सभी संतानों ने यूपीएससी परीक्षा (UPSC Exam) पास करके कमाल कर दिया है।

UPSC HQ
Union Public Service Commission

अपने बच्‍चों की इस कामयाबी पर अनिल जी अपने भाव व्‍यक्त करते हुए कहते है, कि अपने बच्‍चों की शिक्षा के लिए उन्‍होंने कभी भी किसी प्रकार की कमी नहीं रखी। उनकी शिक्षा पर उनका विशेष ध्‍यान रहता था।

वह कहते है में हमेशा से ही यही चाहता था, कि मेरे बच्‍चें अच्‍छे से पढ़े लिखे और ऊँचे पद की नौकरी करें। परन्‍तु सभी बच्‍चे यह कर दिखायेंगे यह उन्‍होंने कभी नहीं सोचा था। वह कहते है कि मैनें हमेशा ही बच्‍चों को शिक्षा को सबसे पहला स्‍थान देना सिखाया है।

कोई है आईएएस तो कोई आईपीएस अधिकारी

परिवार के चार भाई बहन में योगेश मिश्रा (Yogesh Mishra) सबसे बड़े है। जोकि आईएएस अधिकारी के पद पर कार्यरत है। उनकी शिक्षा की बात की जाये तो उन्‍होंने जिले लालगंज से ही अपनी प्रारंभिक परीक्षा कंपलीट की है। उसके बाद उन्‍होंने मोतीलाल नेहरू इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी में एडमिशन लिया। यहॉं से उन्‍होंने इंजीनियरिंग करके अपना ग्रेजुएशन कंपलीट किया।

अपनी पढ़ाई कंपलीट करने के बाद में योगेश मिश्रा जी ने नोएडा में जॉब भी की है। जॉब करते हुए ही उन्‍होंने यूपीएससी की तैयारी की। मेहनत करते करते 2013 में वह सफल हुए। परीक्षा पास करके वह आईएएस अधिकारी बन गये।

छोटी बहन ने भी किया भाई को फॉलो

योगेश से प्रभावित होकर उनकी छोटी बहन क्षमा ने भी यूपीएससी को अपने करियर के रूप में चुना। उसकी तैयारी में उन्‍होंने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। इस परीक्षा में प्रारंभ में वह सफल ना हो सकी।

तीन बार उन्‍हें असफलता का सामना करना पड़ा। परन्‍तु हिम्‍मत ना हारते हुए उन्‍होंने अपनी तैयारी जारी रखी। अंत में उनकी भी मेहनत रंग लाई और चौथे प्रयास में वह इस परीक्षा को पास करने में सफल हो गई। क्षमा को परीक्षा पास करने के बाद आईपीएस का पद मिला।

बहन माधुरी भी है आईएएस अधिकारी

क्षमा के बाद उनकी छोटी बहन जिनका नाम माधुरी मिश्रा (Madhuri Mishra) है। उन्‍होंने भी अपना रूख यूपीएससी की तरफ कर लिया। उन्‍होंने लालगंज से ही एक कॉलेज में एडमिशन लेकर अपना ग्रेजुएशन कंपलीट कर लिया। इसके बाद प्रयागराज से उन्‍होंने मास्‍टर्स कंपलीट किया।

अपनी पढ़ाई के दौरान वह भी यूपीएससी की तैयारी करती रही। उनकी मेहनत भी अपने भाई बहन की तरह रंग लाई ओर वह 2014 में इस परीक्षा को पास करने में कामयाब हो गई। परीक्षा को क्रेक करने के बाद उन्‍हें आईएएस का पद मिला। आज वह झारखंड राज्‍य में आईएएस अधिकारी है।

2015 में छोटे भाई ने पाई थी 44 वी रैंक

योगेश से छोटे भाई ने भी अपने सभी भाई बहनों की तरह यूपीएससी को चुना। अपने भाई बहनों से उन्‍हें सही मार्गदर्शन मिला। सही र्मादर्शन की वजह से वह 2015 में सिविल सर्विसेज एक्‍जाम को पास करने में सफल हो पाये। इस परीक्षा को वह सिर्फ पास नही किये, बल्‍कि अपने सभी भाई बहनों से उन्‍होंने इस परीक्षा में अच्‍छी रैंक भी हासिल की।

2015 में वह इस परीक्षा को पास करके 44वे पायदान पर रहें। आज वह भी बिहार कैडर में आईएएस अधिकारी के पद पर है। इन चारों भाई बहन की कामयाबी से पिता बहुत ही गर्वित महसूस करते है। वह कहते है कि यह सफलता उनके सिर ऊँचा रखने की वजह है। वह कहते है अपने बच्‍चों की कामयाबी से में बहुत ही खुश हूँ। उनकी वजह से ही मेरी शान है।

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