
Ratlam: कहते हैं मौसमी फल खाने से रोग कोसों दूर रहते हैं परंतु जैसे-जैसे समय बढ़ता जा रहा है वैसे वैसे मौसम में भी कई परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं, जिससे जो फल जिस मौसम में आता था। वह अब देखने भी नहीं मिल रहा है, इन्हीं में शामिल है देसी अमरूद।
अमरूद भारत का सबसे प्रसिद्ध फल है, पहले भारत के 10 घरों में से 8 घरों में अमरूद के वृक्ष देखे जाते थे परंतु जैसे-जैसे समय बढ़ रहा है वैसे-वैसे देसी अमरुद अब देखने नहीं मिल रहा है। इन अमरूदों की जगह हाइब्रिड अमरूद ने ले ली है।
आजकल देश और विदेश में हाइब्रिड फलों (Hybrid Fruits) का चलन है, इसीलिए कई किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ फल और सब्जियों की खेती भी कर अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं। आज के इस लेख में हम बात करेंगे। मध्य प्रदेश राज्य एक गांव जहां पर कई प्रकार के फलों के साथ थाई अमरूद की खेती कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना व्यापार कर रहे हैं।
5 साल से ऊगा रहे हैं थाई अमरूद
मध्य प्रदेश राज्य के अंतर्गत आने वाला जिला रतलाम के टिटरी गांव के किसान पिछले 5 वर्षों से अंतर्राष्ट्रीय बिजनेस कर रहे है। इस गांव के 80 प्रतिशत किसान आधुनिक खेती के चलते अंगूर स्ट्रॉबेरी सेब टमाटर और थाई अमरुद (Thai Guava) ऊगा कर विदेशों में इनकी सप्लाई कर रहे हैं।
पिछले 5 वर्षों में उन्होंने अपने इस काम में बहुत बढ़िया तरीके से हाथ जमा लिए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह काम उन्हें मजबूत बना रहा है, साथ ही उनका यह गांव अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अपना नाम बना रहा है।

अमरुद (Guava) को अलग-अलग स्थानों में अलग-अलग नाम से जाना जाता है, जैसे मालवा और पेरू में इसे जामफल के नाम से जाना जाता है और मध्य प्रदेश के कई शहरों में इसे अमरूद ही कहा जाता है इस फल में तीन वेराइटी मिलती है। पिंक ताइवान, रेड डायमंड और सफेदा आदि। सभी स्वाद और गुण से भरपूर है।
तीनों अमरुद के फायदे
जैसा कि हम जानते हैं कि थाई अमरूद की तीन वेराइटी होती हैं, जिसमें सफेद अमरूद काफी ज्यादा मात्रा में बिकता है, क्योंकि सफेदा अमरूद शुगर फ्री होता है। जिस वजह से यह 15 दिनों तक आराम से स्टोर किया जा सकता है। यह 15 दिनों तक ना खराब होता है और ना ही इसका स्वाद परिवर्तित होता है।
इनके अलावा पिंक ताइवान और रेड डायमंड अमरूद के अंदर का भाग लाल होता हैं, जो स्वाद में बहुत ज्यादा मीठे होते हैं। यह अमरूद मात्र 5 से 6 दिन तक स्टोर किए जा सकते हैं। इसके बाद इनके खराब होने की और स्वाद परिवर्तित होने की पूरी संभावना होती है।
करीब 4000 बीघा खेत में केवल थाई अमरूद के पेड़
जानकारी से पता चला है कि टीटरी गांव के किसानों द्वारा करीब 4000 बीघा खेत में थाई अमरूद के वृक्ष लगाए हैं। किसान इन थाई अनुरोध से प्रति बीघा जमीन में करीब 300000 RS कमाता है।
किसानों ने आधुनिक खेती के चलते खुद को संपन्न बना लिया है। इन किसानों की सफलता से प्रेरित होकर मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) राज्य के अन्य जिले जैसे धार और झाबुआ में भी अब आधुनिक खेती के चलते थाई अमरूद की फसल लगाई जा रही हैं।
3 टन से ज्यादा थाई अमरूद विदेशों में निर्यात किए जाते हैं
रतलाम (Ratlam) के टिटरी गांव के किसान खेती में कई तरह के प्रयोग करते हैं। किसानों का मानना है कि अच्छी क्वालिटी के प्रोडक्ट ऊगाकर इस गांव का नाम देश विदेश में मशहूर किया जा सकता है। इसीलिए उन्होंने इन प्रयोगों से थाई अमरूद को चुना।
जब किसान भाइयों का इंटरव्यू लिया गया, तो उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले फ्रूट एक्सपोर्टर की एक टीम टीटरी गांव में आई थी। वह सैंपल के तौर पर थाई अमरूद के कुछ फल अपने साथ ले गई।
जांच के बाद किसानों द्वारा उपजाया गया थाई अमरुद उनके मापदंडों में खरा उतरा। जिसके बाद से किसानों को देश विदेश से इस फल को निर्यात करने के ऑर्डर मिलने लगे। वर्तमान समय में इस गांव से 3 टन से भी ज्यादा फल अमेरिका और नेपाल जैसे देशों में एक्सपोर्ट किए जाते हैं।



