बिजनेस LIC एजेंट रहे, बिजनेस भी डूबा, फिर अपनी मेहनत से 7700 करोड़ के मालिक बने, ट्रेक्टर टाइटन की कहानी

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Lakshman das mittal sonalika
Success story of Lakshman Das Mittal founder of Sonalika tractor. Lakshman Das Mittal is the owner and chairman of Sonalika Group.

Moga, Punjab: बिजनेस करने कि कोई उम्र नहीं होती। संघर्ष से कुछ भी हासिल किया जा स‍कता है। अगर काबिलियत हो तो व्‍यक्‍ति सब कुछ हासिल कर सकता है। व्‍यक्‍ति अपने बिजनेस आइडिया (Business Idea) और कड़ी मेहनत से उस मुकाम को हासिल कर लेता है, जिसकी वह चाह रखता है।

व्‍यक्ति चाहे तो क्‍या हासिल नहीं कर सकता। अपनी चाह को पूरी करने के लिए बस एक बिजनेस आइडिया और डेडीकेशन कि आवश्यकता होती है। हमारे सामने ऐसे बहुत से उदाहरण है, जिन्‍होंने अपनी कड़ी मेहनत से कामयाबी आपने नाम की।

आज ऐसे ही उदाहरणों में से हम एक कहानी आपके सामने लेकर आए है। जिन्‍होंने केवल 5000 रूपये से एक बिजनेस शुरू किया और आज वह 29 हजार करोड़ की कंपनी के मालिक बन चुके है। हम बात कर रहे है, सोनालिका ट्रैक्‍टर्स ग्रुप (Sonalika Group Tractor) के चेयरमैन लक्ष्‍मण दास मित्‍तल (Lakshman Das Mittal) की।

जिन्‍होने एक LIC बीमा एजेंट के रूप में भी काम किया है और आज अपने अथक प्रयासों से वह मुकाम हासिल कर चुके है। जो हर आम आदमी का सपना होता है। लक्ष्‍मण दास मित्‍तल जी को ‘द ट्रेक्‍टर टाइटन’ (The Tractor Titan) के नाम से भी जाना जाता है। अमीरों कि रिच लिस्‍ट में इनका 52 वें पायदान पर स्‍थान है। इन्‍हें कई राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार भी मिल चुके है।

लक्ष्‍मण दास जी का शुरूआती जीवन

लक्ष्मण दास मित्तल का जन्म 5 नवंबर, 1930 को मोंगा (Moga) जिला (पंजाब) के भिंडरकला गांव (Bhinder Kalan village) में हुआ। उनके पिता हुकुम चंद अग्रवाल मंडी में ग्रेन डीलर के पद पर थे। मित्तल के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक थी। उनके पिता पढ़ाई को जड़ से समझते थे, इसलिए बेटे को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करते थे।

लक्ष्मण दास ने इंग्लिश और उर्दू में MA की डिग्री की। इंग्लिश में उनको गोल्ड मैडल से सम्मानित किया गया। उर्दू में भी उनके अच्छे नम्बर आते थे। अब 86 साल की उम्र में भी मित्तल ने पढ़ाई-लिखाई से खुद को दूर नही किया।

आज भी वे उर्दू लिटरेचर पढ़ते हैं और शायरी भी किया करते हैं। मित्तल का बहुमूल्य मंत्र है कि गलती से हार नहीं माननी चाहिए। इसके बजाय अपनी गलतियों से सबक लेकर आगे की ओर बढ़ते रहना चाहिए। चाहे कैसी भी परिस्थिति हो। मुकाबला करना आना चाहिए।

लक्ष्मण दास मित्‍तल जी का शुरूआती जीवन काफी संघर्षो (Struggle) से भरा था। लक्ष्‍मण दास मित्तल जी ने 1955 में अपना करियर एलआईसी में बीमा एजेंट के तौर पर अपना कैरियर प्रारंभ किया था। इसके बाद वह फील्ड ऑफिसर बने। इस दौरान उन्होंने काफी संघर्ष किया। हर परिस्थितियों का डटकर मुकाबला किया।

उन्‍होंने अलग अलग राज्‍यों में नौकरी भी कि और नौकरी के साथ ही 1966 में खुद का कारोबार भी स्टार्ट कर दिया। उन्होंने स्टार्टिंग में कृषि से जुड़ी मशीनें बनाई। 1990 में बतौर डिप्टी जनरल मैनेजर रिटायर हुए। 1995 में उन्होंने फिर टैक्टर बनाने का काम शुरू किया।

उनकी कंपनी द्वारा बनाए गए सोनालिका ट्रैक्टर्स (Sonalika Tractors) पर आज किसानों को भरोसा है। उनकी कंपनी द्वारा बनाए गए ट्रैक्टर्स पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों द्वारा पसंद किए जाते हैं। आज उनकी कंपनी देश की तीसरी सबसे बड़ी ट्रैक्टर निर्माता कंपनी है। लक्ष्मण प्रसाद जी को उद्योग रत्‍न अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है।

सोनालिका ट्रेक्‍टर्स कि शुरूआत

सोनालिका ग्रुप कि शुरूआत 1969 में हुई थी। और 1995 सोनालिका ग्रुप ने ट्रेक्‍टर बनाने का कार्य चालू किया था। सोनालिका ग्रुप भारत के साथ-साथ दुनिया के 120 देशों में भी ट्रैक्टरों का निर्यात करते हैं। इसका प्‍लांट पंजाब होशियारपुर में है।

सोनालिका ट्रेक्‍टर को इकॉनॉमिक टाईम्‍स द्वारा आइकॉनिक ब्रांड अवॉर्ड मिल चुका है। सोनालिका कंपनी साल भर में 3 लाख से अधिक ट्रैक्टर का निर्माण करती है। ट्रैक्टरों के अलावा कंपनी बुवाई की मशीन और गेहूं के थ्रेसर भी बनाती है। आज यह कंपनी 29 हजार करोड़ की हो चुकी है।

सोनालिका ट्रेक्‍टर्स कि विशेषताएं

भारत में सोनालिका ट्रैक्टर सबसे अधिक पसंद किया जाने वाला ट्रैक्टर ब्रांड है। सोनालिका कंपनी अपने ट्रैक्टर की बेहतरीन मॉडल के लिए जानी जाती है। सोनालिका ट्रैक्टर ने कृषि क्षेत्र के अलावा अन्य कार्य में भी अपनी एक अलग ही पहचान बनाई है। देश-विदेश में लाखों लोग सोनालिका ट्रैक्टर का इस्तेमाल कर रहे हैं।

सोनालिका ट्रैक्टर अपने शक्तिशाली इंजन, बड़े डीजल टैंक, भारी सामान को उठाने की क्षमता आदि के लिए जानी जाती है। यह कंपनी किसानों की सेवा के लिए सदैव तत्पर रही है। अभी हाल में सोनालिका ने बैट्ररी से चलने वाले ट्रैक्टर को लॉन्च किया है। सबसे खास बात है, कि सोनालिका ट्रैक्टर की कीमत सबसे कम होती है।

लक्ष्‍मण दास जी का परिवार

लक्ष्‍मण दास मित्‍तल जी के परिवार में उनके तीन बेटे हैं, सबसे बड़े अमृत सागर कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट है, जबकि तीसरे बेटे दीपक मित्तल कंपनी के MD है। दूसरे बेटे न्यूयॉर्क में डॉक्टर के पद पर हैं।

इसके अलावा लक्ष्मणदास मित्तल के पोते सुशांत और रमन मार्केटिंग, प्रोडक्ट डिजाइन, इंवेस्टर रिलेशन और इंटरनेशनल बिजनेस की जिम्मेदारी अच्छे से निभाते हैं। जबकि उनके एक और पोते राहुल है। जो कि परिवार का रियल एस्टेट बिजनेस की देख-रेख करते हैं।

लक्ष्मणदास मित्तल की बेटी उषा सांगवान एलआईसी की MD के पद पर रह चुकी हैं। उषा सांगवान एलआईसी की पहली महिला MD भी थी। इसी कंपनी में पहले लक्ष्मणदास मित्तल एजेंट हुआ करते थे।

सोनालिका ट्रैक्‍टर्स भारत के उच्‍च्‍तम ट्रैक्‍टरों में से एक है। सोनालिका में नवीनतम तकनीक के ट्रैक्‍टरों की भरमार है। सोनालिका के ट्रेक्‍टर्स 20 HP से लेकर 90 HP तक में आते है। सोनालिका के ट्रेक्‍टरों की शुरुआती कीमत तीन लाख बीस हाजार से स्टार्ट होती है और आगे इनकी कीमत 16 से 17 लाख तक जाती है।

लक्ष्मणदास मित्तल की आईटीएल का उत्तर भारतीय राज्यों में मजबूत कारोबार है। 50 हार्सपावर से ज्यादा की मशीनों में लक्ष्मणदास मित्तल की कंपनी का दबदबा रहा है। लगभग 90 साल की उम्र में भी लक्ष्मणदास मित्तल कंपनी का कामकाज बखूबी देखते हैं। इसके अलावा लक्ष्मणदास मित्तल अपना पारिवारिक बिजनेस सोनालिका इंप्लीमेंट्स को भी पूरी जिम्मेदारी के साथ देखते हैं।

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