गोबर के उपले बनाने वाली लड़की ने खड़ा किया 700 करोड़ का साम्राज्य, जाने कैसे: Success Story

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Kalpana Saroj Business
Meet Kalpana Saroj, Dalit entrepreneur who broke corporate hegemony. Success business story of Kalpana who lived in Maharashtra's Akola.

File Photo Credits: Twitter

Delhi: किसी ने सच ही कहा है कि मेहनत और संघर्ष (Struggle) के आगे गरीबी को भी हार मानना पड़ता है। मेहनत किसी की मोहताज नही होती। सफलता (Success) तो हमेशा आपकी मेहनत और संघर्ष पर निर्भर रहती। सफलता किसी किसी को एक बार मे ही मिल जाती है।

कभी कभी किसी को बहुत मुश्किल से मिलती है। लेकिन कभी अपने लक्ष्य से पीछे नही हटना। जो करने का सोचा है, उसे पूरा करके ही दम लेना। जैसे एक ताले कभी एक बार मे ही खोल लिया जाता है, तो कभी 99वी चाबी लगाने पर भी नही खुलता, उसके खुलने की चाबी 100वी होती है, लेकिन हम 99वी बार मे ही हार मान लेते है और अपने लक्ष्य से पीछे हट जाते है।

यही हमारी असफलता का कारण है। यही हमारी किस्मत के साथ है। सच्ची लगन और मेहनत के आगे सफलता को झुकना ही पड़ता है। आज की स्टोरी (Story) को पढ़कर अवश्य ही आपको किसी सफल बिजनेस मेन (Businessman) की याद आ जाए, लेकिन आज की स्टोरी आपके लिए प्रेरणास्त्रोत से कम नही होगी।

आज की स्टोरी हम एक ऐसी महिला को समर्पित करने जा रहे हैं, जिसने कठिन परिस्थितियों के आगे घुटने ना टेककर, हर परिस्थिति का डटकर मुकाबला करते हुऐ पूरे देश में अपना और अपने परिवार का नाम रोशन करदिया।

आज की स्टोरी एक ऐसी महिला की है, जिसने सामाजिक रूढ़िवादी सोच का सामना कर खुद को मजबूत बनाया और जिसके पास कभी 60 पैसे तक नहीं थे, पाई पाई को मोहताज थी, वह आज करोडो की कंपनी की मालकिन बन चुकी हैं।

कमानी ट्यूबस की मालकिन कल्पना सरोज

(Kalpna Saroj) महाराष्ट्र (Maharashtra) के अकोला (Akola) जिले की निवासी हैं। कल्पना का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ। कल्पना की वित्तीय स्थिति अच्छी नहीं थी। कल्पना के परिवार में पिता ही एकमात्र कमाने वाले थे। कल्पना के पिता हवलदार की नौकरी करते थे, जिसके लिए उन्हें केवल 300 रुपये मिलते थे।

इन पैसो से कल्पना के पूरे घर का खर्च चलता था। लेकिन कल्पना इन सभी परिस्थितियों से बाहर निकलना चाहती थी, जिसके लिए उन्होंने खूब परिश्रम किया और आज वह 2000 करोड़ की कंपनी की मालकिन हैं, कल्पना केवल एक नहीं बल्कि छ्ह कंपनियों की मालकिन हैं।

ससुराल वाले नहीं देते थे खाना

कल्पना ने बचपन से ही बहुत दुख देखे थे लड़कियों को समाज में बोझ समझा जाता था, इसलिए इस भार को कम करने के लिए उनकी शादी 12 वर्ष की उम्र में कर दिया गयी थी। शादी के बाद कल्पना के हालत बद से बद्तर हो गए। कल्पना के ससुराल वाले उन्हें खाने के लिए खाना भी नहीं देते थे। साथ ही मे उनके साथ जानवरों जैसा सलूक करते थे।

कल्पना ने बताया कि एक बार जब उनके पिता ससुराल आए, तब उन्होंने ये सब देखा और वह कल्पना को वापस उनके घर ले गए। इतना दुख झेलने के बाद कल्पना ने आत्म-हत्या करने की कोशिश कि, लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था।

मुंबई आई और बदल गया जीने का तरीका

16 वर्ष कि आयु में कल्पना अपने चाचा के पास मुंबई (Mumbai) आ गईं और सिलाई की नौकरी करनी प्रारंभ कर दी, लेकिन वह इस कार्य को भी अच्छे से नहीं कर पाई। समय के साथ उन्होंने वापस मशीन पर अपना हाथ बैठाया और सोलह घंटे काम करने लगी।

उसके बाद कल्पना (Kalpana) के पास एक शख्स आया जो अपना प्लॉट 2.5 लाख में बेच रहा था। उसने ने कल्पना से कहा आप मुझे अभी एक लाख रुपये दे दो बाकी बाद में दे देना, कल्पना के भाग्य ने उनका साथ दिया और रातों-रात वह प्लॉट 50 लाख का हो गया।

कमानी ट्यूबस के लिए कल्पना बनी मसीहा

1985 में एक विवाद की वजह से कमानी ट्यूबस कंपनी बंद हो गई जिसके पश्चात कमानी के कर्मचारी कल्पना के पास गए, लेकिन जब कल्पना को मालूम हुआ कि कंपनी 116 करोड़ के कर्ज में डूबी हुई है, तो उन्होंने कंपनी को खरीदने से मना कर दिया, परंतु जब कल्पना को यह बात मालूम हुई कि कंपनी के कर्मचारी भूखे मर रहे हैं, तो उन्होंने अपने भाग्य आज़माने का निर्णय लिया और परिणाम आज आपके समक्ष है।

एक समय जिस महिला के पास गाँव के राह पर एक जगह से दूसरी जगह जाने तक के पैसे नहीं थे। आज उनकी कंपनी के नाम पर मुंबई जैसे बड़े शहर के दो मार्गो के नाम हैं, राजाभाई कमानी और कुर्ला कमानी। आज यह कंपनी 500 करोड़ की कंपनी बन गई है। इस बेह्तरीन कार्य के लिए कल्पना को 2013 में पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था।

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