कभी खाने को तरसे, आज करोड़ों की कार Rolls Royce में घूमते है, 400 से अधिक कारों का मालिक नाई

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Ramesh Babu Barber
The Inspiring story of Ramesh Babu, a barber who owns a Rolls Royce Cars. Struggle Story of Ramesh Babu Barber whose awesome business skills made him rich.

File Photo Credits: Twitter Post

Bengaluru: रमेश बाबू का बचपन किसी ने ठीक ही कहा है की किस्मत पदलते देर नहीं लगती। ये कहानी है ‘Barber’ (नाई) से ‘Billionaire Barber’ तक का सफ़र तय करने वाले बैंगलोर (Bangalore) के रमेश बाबू (Ramesh Babu) की। गरीबी में उनका बचपन बीता था। फिर उन्होंने खुद ऐसा बना दिया की गरीबी कोंसो दूर चली गई। जो सपने उन्होंने बचपन मे देखें, उन्हें आज सही साबित भी कर दिया।

आज वे लोगों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गए हैं। रमेश बाबू (Ramesh Babu) का जन्म कर्नाटक (Karnataka) राज्य के बैंगलोर (Bangalore) शहर में एक गरीब परिवार में हुआ था। पिता नाई (Barber) थे। ब्रिगेड रोड में उनका छोटा सा सैलून (Salon) था। लोगों के बाल काटकर जो आमदनी होती, उससे परिवार की गुजर-बसर होती थी।

परिवार को पैसों की तंगी थी

उनके परिवार को पहले से ही पैसों की तंगी थी और आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवार पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा, जब रमेश बाबू के पिता का देहांत हो गया। उस समय रमेश बाबू की उम्र केवल 7 साल थी। पिता के जाने के बाद घर चलाने की ज़िम्मेदारी रमेश बाबू की माँ के कंधों पर आ गई। वे लोगों के घरों में बर्तन मांजने, साफ़-सफाई और खाना बनाने का काम करने लगी।

एक वक्त का खाना भी सही से नहीं मिल पाता

पिता के सैलून का काम रमेश के चाचा को सौंप दिया गया। सैलून व्यवसाय से होने वाली कमाई में से 5 रुपये रमेश के चाचा उनकी माँ को दिया करते थे। वह बहुत की तंगी का वक़्त था। उनके परिवार को एक वक़्त का खाना भी बड़ी मुश्किल से नसीब हो पाता था।

मिडिल स्कूल में आने के बाद रमेश बाबू माँ का हाथ बंटाने के मकसद से छोटे-मोटे काम करने लगे। सुबह उठकर वे अखबार बांटते, घरों में दूध की सप्लाई करते थे। इसके अलावा भी जो काम मिलता था, उसे कर लिया करते। इन सब से कुछ पैसे प्राप्त हो जाते थे।

इस सबके बावजूद किसी तरह उन्होंने 10वीं की पढ़ाई पूरी की। जब वे 11वीं कक्षा में थे, तब एक दिन उनकी माँ का किसी बात पर उनके चाचा से झगड़ा हो गया और उनके चाचा के उन्हें रोज़ के 5 रुपये देने से मना कर दिया। ऐसे में अब खाने के भी लाले बढ़ गए थे और भारी बोझ आ गया था।

इस स्थिति से निपटने के लिए रमेश बाबू खुद सैलून का व्यवसाय संभालने खड़े हो गए, लेकिन उनकी माँ चाहती थी कि रमेश पढ़-लिख कर अच्छा आदमी बने। उन्होंने रमेश बाबू को मनाने की कोशिश की, पर रमेश अपना निर्णय ले चुके थे।

वे नहीं माने और पढ़ाई के साथ-साथ सैलून का काम भी देखने लगे। परिवार की बचत से उन्होंने सैलून ठीक-ठाक करवाया और दो वर्कर काम पर भी रखे। सैलून को “Inner Space” नाम दिया और अपना सारा ध्यान इसी काम में फोकस कर दिया।

फिर एक के बाद एक कुछ दिक्कतें आई। सबसे बड़ी समस्या ये थी कि उन्हें बाल काटना नहीं आता था, लेकिन वे सीखना चाहते थे। उन्होंने बाल काटने का कोर्स किया और स्वयं बाल काटने लगे। तब से वे “Barber” कहे जाने लगे। वे रात के 12 बजे तक सैलून में काम किया करते थे। उनकी मेहनत और अच्छे व्यवहार से सैलून का काम आगे बढ़ा दिया। लेकिन वे 12वीं के बाद पढ़ाई नहीं कर पाए।

इसके बाद उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स में डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश लिया, लेकिन वो भी उन्हें छोड़ना पड़ गया। यह दौर था 1993 का। रमेश बाबू का सैलून इतना चल रहा था कि परिवार की गुजर-बसर अच्छी तरह से होने लगी थी और उन्होंने कुछ बचत भी कर ली थी। एक दिन रमेश बाबू ने अपने एक रिश्तेदार की कार देखी और उनके मन में भी कार ख़रीदने की तमन्ना उमड़ पड़ी।

फिर कुछ अपनी बचत से और कुछ लोन लेकर उन्होंने मारुती ओम्नी (Maruti Omni) कार ख़रीद ली। वह उनके लिए स्टेटस सिंबल थी। लेकिन कुछ ही महीनों में उनकी स्टेटस सिंबल उनके लिए एक बोझ बन गई। कार की किश्त 6800 हर महीने थी, जिसे चुकाने में रमेश बाबू के पसीने छूट गए।

उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें? वे कार बेचने की सोचने लगे। तभी एक दिन नंदिनी अक्का, जिनके घर उनकी माँ काम किया करती थी, ने रमेश से कहा कि तुम अपनी कार रेंट पर क्यों नहीं देते? इस तरह से तुम्हारी अच्छी कमाई भी हो जायेगी और कार का लोन भी चुक जाएगा।

Car Rental Bussiness करने का बनाया मन

रमेश बाबू को नंदनी अक्का की बात जम गई और वे कार रेंट पर देने राज़ी हो गए। नंदनी अक्का ने उन्हें कार रेंटल बिज़नेस की कुछ मूलभूत बातें बताई और इस सिलसिले में कुछ लोगों से मुलाकात करवाई। कार रेंटल बिज़नेस के प्रति गंभीर हो गए। अपनी Car Rental Company का नाम उन्होंने ‘Ramesh Tour & Travels’ रखा। पहली कंपनी, जिसे उन्होंने कार रेंट पर दी, वो थी जानी मानी Intel कंपनी।

उनका कार रेंटल बिज़नेस धीरे-धीरे सही चलने लगा। रमेश बाबू (Ramesh Babu) अपनी कारों की संख्या में बढ़ोत्तरी करने में लग गए। 2004 तक उन्होंने 7 कारें खरीद ली। उन दिनों कार रेंटल बिज़नेस में बहुत अधिक कॉम्पिटिशन था। इस कारण रमेश बाबू का बिज़नेस बहुत अच्छा रिजल्ट नहीं दे पा रहा था।

ये वो दौर था, जब कार रेंटल बिज़नेस में Luxury Cars न के बराबर थी। जो थीं भी, उनकी हालत अच्छी नहीं थी। ऐसे में रमेश बाबू ने ब्रांड न्यू Mercedes खरीदकर Luxury car segment में उतरने का मन बनाया। ये एक जोखिम भरा फैसला था। सबने उन्हें समझाने का बहुत प्रयास किया कि यह निर्णय उनका बिज़नेस ले डूबेगा। लेकिन रमेश बाबू फैसला कर चुके थे।

उन्होंने सोच लिया था कि घाटा हुआ, तो अपनी कार बेचकर वे घाटे की पूर्ति करेंगे। बैंक से लोन लेकर उन्होंने 42 लाख की ब्रांड न्यू Mercedes Benz ख़रीद ली। उनका ये फ़ैसला फ़ायदे का सौदा साबित हुआ। उन दिनों किसी भी ट्रेवल एजेंसी के पास नई luxury cars नहीं थी।

इसके बाद बड़ी-बड़ी कंपनी रमेश बाबू की कंपनी से कार रेंट पर लेने लगी और उसके बाद रमेश बाबू तरक्की की राह में आगे बढ़ते चले गए। उनकी कारों की लिस्ट बढ़ने लगी। 2004 की 7 कारें 2014 तक 200 हो गई थी। रमेश बाबू का सपना Rolls Royce ख़रीदने का था। यह सपना उन्होंने 2011 में पूरा किया। यह कार रखने वाली उनकी पहली और एकमात्र कार रेंटल कंपनी है।

आज उनकी कंपनी के पास लगभग 400 कारें हैं, जिसमें Rolls Royce, Audi, BMW, Mercedes जैसी कई Luxury cars भी शामिल हैं। उनकी कार सर्विस का एक दिन का न्यूनतम किराया 1000 और अधिकतम 50000 है। Luxury cars service प्रारंभ करने के बद से कई बड़ी कंपनियों के अलावा नामचीन फ़िल्मस्टार्स भी उनके क्लाइंट लिस्ट में शामिल हो गए है।

अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या राय, शाहरुख़ खान जैसे सेलेब्रिटी ने उनकी Cars service का इस्तेमाल किया। रमेश टूर एंड ट्रेवल्स का हेड ऑफिस बैंगलोर में है। बैंगलोर के अतिरिक्त चेन्नई और दिल्ली में भी कंपनी की ब्रांच हैं। आज रमेश बाबू (Ramesh Babu Billionaire Barber) की नेट वर्थ 2 बिलियन डॉलर है।

किसने सोचा था कि कभी गरीबी में दिल गुजारने वाला एक मामूली सा नाई Rolls Royce जैसी कार का मालिक बनेगा और इतना बड़ा काम करेगा। आज वे दुनिया के सामने एक मिसाल हैं। रमेश बाबू आज Rolls Royce में घूमते हैं और पैसे उन पर बरसते हैं। किंतु वे आज भी बड़ी ही सादगी से अपना जीवन जीते हैं।

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