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Jaipur: आज के समय में हर कोई पैसे कमाना चाहता है। लोग पैसे कमाने के लिए अलग अलग व्यवसाय में हाँथ आज़माते हैं। कुछ लोग यूनिक बिज़नेस आईडिया अपनाकर अपने बिजनेस में सफल भी हो रहे हैं। इंसान का दिमाग अगर चले, तो वह किसी भी वेस्ट चीज़ से पैसे कमा ले। आज के समय में इंसान अपनी कमाई के लिए भिन्न भिन्न आईडिया खोजता रहता है।
अगर आप सच में ईमानदारी से कोई व्यवसाय करना चाहते हैं, तो एक सही आईडिया भी आपको सफलता हासिल करवा सकता है। हमने पाने पिछले कई लेखों में ऐसे कई लोगो को कवर किया है, जिन्होंने अपने एक आईडिया की दम पर करोड़ो की कमाई कर दी और बड़ा व्यवसाय खड़ा कर दिया।
आज हम एक ऐसी व्यवसाई की बात कर रहे है, जिन्होंने हाथी के गोबर (Elephent Dung) से छोटे से बिजनेस की शुरुआत की और फिर इनका यह बिजनेस आगे चलकर सफल हुआ और अब करोड़ों रुपए की कमाई करवा रहा है।
हम बात कर रहे हैं, विजेंद्र शेखावत (Vijendra Shekhavat) और महिमा मेहरा (Mahima Mehra) की। यह दोनों राजस्थान (Rajasthan) में स्थित आमेर के किले पर घूमने गए थे। वैसे तो वह एक Trip थी, परन्तु किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था।
उस किले में विजिट के दौरान उन्होंने कुछ ऐसा देखा कि उनको एक ज़बरदस्त बिजनेस आईडिया (Business Idea) आ गया। उन्होंने देखा कि किले के नीचे के हिस्से में हाथियों का गोबर (Dung) डला हुआ था। उसके बाद दोनों ने अपने आईडिया का चर्चा करना चालु कर दिया।
फिर उन्होंने इंटरनेट पर ऑनलाइन रिसर्च शुरू कर दी की हाथी के गोबर (Dung) से प्रोडक्ट या पेपर कैसे बनाया जाता है। ऑनलाइन उन्हें जो भी जानकारी हासिल करनी थी, वह सब लेने के बाद प्लानिंग शुरू कर दी। उन्हें यह भी पता चला कि श्रीलंका, थाईलैंड और मलेशिया में भी हाथी के गोबर (Hanthi ke Gobar) से पेपर बनाया जाता है। पूरी खोज खबर हासिल करके उन्होंने निरन्तर लिया कि वे इसी का बिज़नेस शुरू करेंगे।
फिर दोनों ने बिजनेस आरम्भ करने के लिए लगभग 15 हज़ार रुपए का क़र्ज़ लिया तथा कच्चे माल के लिए हाथी के गोबर का इस्तेमाल करके अपने बिजनेस की शुरुआत की। फिर साल 2007 में उन्होंने अपने ‘हाथी छाप ब्रांड’ (Hanthi Chaap Brand) की लॉन्चिंग पूरे देश में कर दी।
वे अपने इस बिजनेस में हाथी के गोबर से फोटो एल्बम, बैग्स, नोटबुक, गिफ्ट टैग, फ्रेम्स और स्टेशनरी के प्रोडक्ट्स बनाते हैं। यह सभी सामान भारत में 10 रुपये से लेकर 500 रुपये तक बिकता है। बच्चो के लिए भी विशेष प्रोडक्ट्स बनाये जाते है।
दोनों का यह आईडिया चल निकला और बिजनेस ख़ूब सफलता प्राप्त करने लगा। फिर उन्होंने अपने पेपर को विदेशों में भी एक्सपोर्ट करना शुरू कर दिया। अब जर्मनी और यूके में भी उनका हाथी चाप ब्रांड पेपर एक्सपोर्ट होता है। इस काम में आये भी अब करोड़ो की हो रही है।
यह यूनिक पेपर बनाने के लिए सबसे पहले हाथी की लीद अर्थात गोबर को साफ़ करने के लिए एक बड़े वाटर टैंक की जरुरत होती है। फिर जब अच्छे से साफ़ होने के बाद पेपर (Paper) बनाने के लिए आगे बढ़ाया जाता है। हाथी के इस गोबर को धोते समय जो पानी बचता है, उसे भी उर्वरक के रूप पर उपयोग किया जाता है।
Gift these cute upcycled bookmarks by Haathi Chaap to your friends for the festive season! Rs. 40 pic.twitter.com/kASxvsFwmK
— Goli Soda Store (@GoliSodaStore) September 24, 2014
हाथी के गोबर के व्यवसाय और इसके बने प्रोडक्ट्स से एक फायदा यह है की इससे पर्यावरण को भी कोई हानि नहीं होती है। यह काम इको फ्रेंडली (Eco Friendly Business) है। महिमा ने उनके अन्य गाँव वालों के साथ मिलकर एक छोटी-सी टीम भी बनाई और फिर वे उस टीम के साथ मिलकर हाथी के गोबर से पेपर निर्माण का काम किया करती हैं।
Set of 4 coasters. Dimensions 9 X 9 cm. Made with elephant dung paper by Haathi Chaap. Rs. 60, Available at Goli Soda pic.twitter.com/ya5pftuZzD
— Goli Soda Store (@GoliSodaStore) August 20, 2014
इस काम में सबसे बड़ा सवाल यह है की पेपर बनाने के लिए अन्य किसी जानवर या जीव के स्थान पर हाथी के गोबर का ही इस्तेमाल क्यों किया जाता है, तो इसका जवाब है की हाथी का पाचन तंत्र ज्यादातर खराब रहता है, इस वज़ह से उसकी पाचन प्रक्रिया ठीक प्रकार से नहीं हो पाती है। जिसके चलते उसके गोबर में रेशे काफ़ी ज़्यादा मात्रा में होते हैं। इसी कारण इस गोबर से पेपर भी ज़्यादा मात्रा में बनता है।




