पुणे में सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने नई तकनीक से केसर की फसल ऊगा दी, लाखों में कमाई हो रही है

0
6141
Kesar Ki Kheti
Maharashtra Software Engineer Sailesh Modak started Kesar farming and earning good. He started saffron cultivation in mobile containers.

Photo Credits: ANI on Twitter

Pune: भारत एक कृषि प्रधान देश है यहां हर तरह की फसलों का उत्पादन होता है, क्योंकि भारत में तीन तरह के मौसम पड़ते हैं। सर्दी गर्मी एवं बरसात इसलिए हर मौसम की अपनी फसलें भी होती है एवं कुछ राज्य अपनी भौगोलिक दृष्टि के हिसाब से अलग-अलग तरह की खेती भी करते हैं। हर किसान का उद्देश्य फसल से अच्छी से अच्छी तरह की कीमत निकालना होता है।

आज हम बात करने वाले हैं केसर की खेती की क्या आपको पता है, केसर (Saffron) दुनिया में बिकने वाली सबसे महंगी फसल होती है। आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि 1 किलो केसर की कीमत 3 से 3.5 लाख तक हो सकती है। इसका प्रयोग खाने पीने की चीजों से लेकर के साबुन क्रीम और कॉस्मेटिक्स पर भी बहुतायत रूप से होता है। दिन प्रतिदिन केसर की मांग बढ़ती जा रही है।

केसर जम्मू के एक खास जलवायु वाले क्षेत्र में ही पैदा हो पाती है, परंतु महाराष्ट्र (Maharashtra) के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर (Software Engineer) ने ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया कि जम्मू (Jammu) में उगने वाली केसर की फसल अब महाराष्ट्र की धरती पर भी हो रही है। आज हम इसी पर एक डिटेल जानकारी आपसे शेयर करने वाले हैं।

केसर से पहले आजमाया स्ट्रौबरी की खेती

आपको बताना चाहेंगे शैलेश मोदक (Sailesh Modak) प्रोफेशनली एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और उनका रुझान खेती की तरफ रहा है। जब उन्होंने केसर के बारे में जानकारी ली, तो उन्हे ज्ञात हुआ कि केसर मसालों के मामले में सबसे महंगी बिकने वाली फसल है। परंतु केसर को पैदा करने के लिए कुछ खास जलवायु की जरूरत होती है, जो कि जम्मू कश्मीर जैसी घाटियों में ही पाई जाती है।

उन्होंने इसकी डिटेल में अध्ययन करने के बाद एक खास तकनीक को आजमाया, जिसे हाइड्रोपोनिक के नाम से जानते हैं। इस तकनीक के जरिए सबसे पहले शैलेश ने स्ट्रॉबेरी की खेती की वह भी महाराष्ट्र के पुणे (Pune) शहर में जिसका जलवायु कश्मीर (Kashmir) से बिल्कुल भिन्न है।

इसमें सफल होने के बाद उन्होंने केसर की खेती में हाथ आजमाने की प्लानिंग की और आज सफलतापूर्वक वह इसकी खेती कर रहे हैं। शैलेश बताते हैं कि अब तक वह 5,00,000 Rs कमा चुके हैं केसर की खेती से।

केसर की खेती के लिए कैसी जलवायु आवश्यक है

केसर की खेती के लिए सबसे उपयुक्त जलवायु कश्मीर की मानी जाती है। अभी दुनिया में सबसे ज्यादा केसर का उत्पादन जम्मू के किश्तवार क्षेत्र में होता है। केसर मई या जून के आसपास लगाई जाती है।

अक्टूबर नवंबर के महीने में यह तैयार भी हो जाती है। केसर की फसल को लगभग 4 महीने लगते हैं तैयार होने में। अभी बाजार में केसर की कीमतों की बात करें तो आज लगभग 3,50,000 RS किलो के भाव से बिक रहा है।

आइए जानते हैं इस टेक्नोलॉजी को जिससे महाराष्ट्र की धरती पर उगी केसर

हाइड्रोपोनिक फार्मिंग तकनीक खेती के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी क्रांति लेकर आया है। वास्तव में इस तकनीक में खेती के लिए किसी खास वातावरण जलवायु की आवश्यकता नहीं होती और ना ही किसी खास प्रकार की मिट्टी की जरूरत होती है।

इसे आप किसी छोटे से कंटेनर जैसी जगह पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं, इसमें खेती पानी को बेस बना के कुछ कंकड़ वा रेत के जरिए की जाती है। लागत के तौर पर यह बहुत ही सस्ती होती है और सबसे बड़ी बात इससे होने वाला उत्पादन भी जबरदस्त होता है।

शैलेश मोदक ने उठाया इसी तकनीक का फायदा

शैलेश मोदक बताते हैं कि उन्होंने अपने जॉब के साथ 365Dfarming नाम से एक स्टार्टअप खोला है। और इसी के लिए उन्होंने केसर की खेती (Kesar Ki Kheti) करने का निश्चय किया। आगे बताते हुए उन्होंने कहा कि केसर को मैं सिर्फ एक कंटेनर के अंदर उगाता हूं। जो सिर्फ 160 स्क्वायर फीट एरिया है, परंतु आधा एकड़ खेत के बराबर की फसल मैं इस कंटेनर से उगा लेता हूं।

इसकी लागत में करीब 10 लाख रुपए का खर्च आया था, लेकिन धीरे-धीरे 5 लाख रुपए से भी अधिक कमाई कर चुके हैं। उनके अनुसार हाइड्रोपोनिक तकनीक (Hydroponics Technique) भारत में खेती का भविष्य हो सकता है। वह सलाह देते हैं कि हर एक किसान को आज इस तकनीक का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए ताकि लागत तो कम हो ही बल्कि उपज बढ़े जिससे अच्छी आमदनी होगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here