30 रु पगार पर मां ने बेटे को झुग्गी में पाला, बेटे ने पढ़कर नौकरी पाई और फिर बड़ा बिज़नेस मैन बना

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Sharath Babu Food Catering King
E. Sharath Babu started food catering business named Food Catering King and get success. now earning in crores rupees. Photo Credits: Twitter(@@FoodkingSarath)

Chennai: हमेशा देखा गया है, कि झुग्‍गी में रहने वाले बच्‍चे ही एक दिन ऐसा काम कर जाते है, जिससे पूरे जग में उनकी पहचान बन जाती है। सफलता कभी भी हमारी आर्थिक स्थिति को देखकर नहीं आती है। भले ही बचपन गरीबी में बीते लेकिन बुढ़ापा हमारा अमीरी में बीतेगा। यह हमारी मेहनत से डिसाइड होता है। सक्‍सेस का मुलमंत्र सिर्फ कठोर परिश्रम है। आज की हमारी कहानी एक करोड़पति की है।

हालांकि यह व्‍यक्‍ति पहले करोड़पति नहीं था। इसका बचपन झुग्गियों मे गरीबी में आर्थिक तंगी में बीता। इस व्‍यक्‍ति की मॉं ने इसे 30 रूपये की तन्‍ख्‍वाह पर इन्‍हें पाला और शिक्षा दिलाने के लिए कठोर परिश्रम किया। आज वही झ़ग्‍गी में रहने वाला व्‍यक्‍ति फूड केटरिंग का बिजनेस (Food Catering Business) करके करोडपति हो गया है। आखिर किस तरह बदली उस व्‍यक्‍ति कि किसमत आइये जानते है।

सरथ बाबू जिसने अपनी किस्‍मत खुद बनाई

आज की हमारी स्‍टोरी सरथ बाबू की है। सरथ बाबू वह व्‍यक्‍ति जिसका बचपन झुग्‍गी (Jhuggi) में रहते हुए कटा। लेकिन आज वह अपनी मेहनत से करोड़पतियों कि लिस्‍ट में जगह बना चुका है। अपनी मेहनत से सरथ ने यह साबित कर दिया कि मेहनत ही किस्‍मत बदलती है।

परिश्रम वह शब्‍द है, जिससे व्‍यक्‍ति फर्श से अर्श तक का सफर कर सकता है। यही परिश्रम सरथ बाबू ने किया। उन्‍होने अपनी सफलता के लिए अपनी शिक्षा को हथियार बनाया। अपनी गरीबी से युद्ध किया ओर सफलता को अपने कदमों पर झुका लिया।

30 रूपये की नौकरी से मॉं ने की परवरिश

सरथ बाबू के परिवार की बात की जाये तो उनकी 2 बड़ी बहने और 2 छोटे भाई है। सरथ का परिवार काफी बड़ा था। उनके परिवार में मॉं अकेली थी। पूरे परिवार की जिम्‍मेदारी सिर्फ उनके कंधों पर थी। कठिन परिस्‍थिति का सामना सरथ की मॉं ने बखूबी किया। बच्‍चो का लालन पालन उन्‍होने अपनी मेहनत से किया।

सरथ की मॉं मिड डे मील में खाना बनाने का काम करती थी। इस काम से 30 रूपये प्रतिमाह उन्‍हे तनख्‍वाह के रूप में मिला करती थी। इन 30 रूपये से ही सरथ की मॉं ने अपने 5 बच्‍चों को लापन पालन किया। भले ही वह भूखे सो जाये, लेकिन अपनी बच्‍चों को उन्‍होंने कभी भूखा नहीं सोने दिया।

मॉं के परिश्रम ने बेटे को बनाया करोड़पति

भले ही सरथ की मॉ कम पैसे कमा पाती थी। लेकिन बच्‍चों मे वह कभी कमी नहीं रखती थी। जैसे तैसे वह घर का खर्चा चलाती थी। हालांकिे बड़ी मुश्‍किल से परिवार का पेट भर पाता था। ऐसा घर जहॉं खाने का भी भरोसा ना हो वहा सरथ की मॉ ने अपने बच्‍चों को शिक्षा दिलवाई।

मॉं ने हिम्‍म्‍त नही छोड़ी बच्‍चों का भविष्‍य उज्‍ज्‍वल हो सके। इसलिए सरथ की मॉं ने तीन जगह काम किया। दिन रात मेहनत करके अपने बच्‍चों को उच्‍च शिक्षा दिलवाई। सरथ के मन में अपनी मॉं के त्‍याग, समर्पण की छाप बहुत गहरी पड़ी है। वह अपनी माता को भगवान का दर्जा देते है।

बचपन से मॉं को सहयोग किया सहयोग

सरथ को बचपन से ही पढ़ाई में गहरी रूचि थी। घर की गरीब कंडीशन ने उनसे भले ही किताबे छीनने की कोशिश की हो। लेकिन उनके हुनर ने ऐसा नहीं होने दिया। सरथ ने दसवी तक पढ़ाई अपनी मॉं के सहयोग से पास की।

बारहवी की फीस अधिक होने की वजह से मॉं को फीस जमा करने में काफी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में सरथ ने बुक बाइंडिंग का काम प्रारंभ किया और अपनी मॉं का सहयोग कर बारहवी की फीस जमा की। सरथ ने बचपन से ही काम किया है। वह अपनी माता कि हर संभव मदद करने का प्रयास किया करते थे।

लाखों कि नौकरी ठुकरा कर शुरू किया बिजनेस

सरथ ने अपनी उच्‍च शिक्षा बिट्स पिलानी से कंपलीट की है। हायर एजूकेशन हासिल करने के बाद सरथ को कई कंपनियों द्वारा लाखों के पैकेज वाली नौकरी ऑफर की गई। लेकिन सरथ बचपन से ही कुछ बड़ा करने की सोचते थे। वह नौकरी नहीं करना चाहते थे। वह चाहते थे कि वह कोई बिजनेस करे।

इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए सरथ ने फूड सप्‍लाई का बिजनेस शुरू किया। अपने बिजनेस को सरथ ने फूड केटरिंग किंग सर्विसेज (Food Catering King) के नाम से रजिस्‍टर करवाया। प्रारंभ में सरथ अपने बिजनेस में केवल चाय, स्‍नैक्‍स और कॉफी ही सप्‍लाई करते थे।

धीरे धीरे उनकी पहचान बढ़ने लगी। बड़ी बड़ी कंपनियॉं उनके साथ काम करना‍ चाहती थी, इसलिए वह सरथ को बहुत से ऑफर भी दिया करते थे। जिससे उनके कारोबार ने रफ्तार पकडी, उनकी मेहनत सफल हुई।

भारत में आज सरथ की कंपनी बहुत सी जगह फूड केटरिंग का कार्य करती है। देश में बहुत सी जगह सरथ की कंपनी के रेस्‍टॉरेंट है। जिससे सरथ को प्रतिवर्ष करोड़ो की कमाई (Income In Crores) होती है। सरथ कहते है कि आज वह जो है वह मॉं की प्रेरणा, उनके परिश्रम और उनके बलिदान की वजह से है।

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