बिहार की इस सास-बहु की जोड़ी ने ऐसे खाने में लाया स्वाद की हर महीने लाखों रुपये की कमाई होने लगी

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Saas Bahu Chhaunk
Bihari Food Restaurant 'Chhaunk' Started In Delhi By Saas-Bahu. The Chhaunk Brings Bihari Food like Litti Chokha and Champaran meat In Delhi.

Delhi: अगर बिहार के खाने पीने की बात की जाये तो सबसे पहले लिट्टी चोखा, सत्तू के पराठे (Sattu Paratha), सत्तु की कचौड़ी और सत्तू के शर्बत का नाम आता है। बस इसी बिहारी खाने (Bihari Food) में थोड़ा अलग स्वाद और प्यार का मसाला डालकर एक सास-बहु की जोड़ी आज प्रति महीने लाखों रुपए कमा रही है।

बिहार के अलावा आस पास के शहरो और राज्यों से तब लोग बिहारी चम्पारण के इस स्वाद को पसंद करते है और मंगवाते भी हैं। सास-बहू के क्लाउड किचन (Saas Bahu Cloud Kitchen) से मंगवाया गया भोजन लोगो को बहुत भा रहा है।

हमारे एक सहयोगी पत्रकार को जब पता चला की यह सास बहु लाज़वाब खाना मुहैया करवा रही हैं, तो उन्होंने भी तरय किया। उन्होंने बताया की ‘द छौंक’ (The Chhaunk) की क्वॉलिटी और स्वाद बहुत शानदार है। यह एकदम घर में बने खाने को तरह ही लगता है। बिहार के निवासी सौरभ सुमन जो दिल्ली में रहकर जॉब करते है, ने बताया की जब वे हॉस्टल में रहते थे, तब उनके मित्र इतना लाज़वाब मटन (Champaran Meat) और लिट्टी चौंका (Litti Chokha) बनाया करते थे।

सास और बहु की जोड़ी का अनोखा फ़ूड स्टार्टअप ‘द छौंक’ हिट

लोकल पत्रकार बताते हैं की जब सास और बहु की जोड़ी ने अपने इस स्टार्टअप (Food Startup) ‘द छौंक’ (The Chhaunk) को शुरू किया था, तब उनका मन कुछ अच्छा करने और सम्मान हासिल करना था, जो आज उन्हें अपने ग्राहकों से मिल रहा है। उनका खाना खाने वाले ग्राहक उनके फैन हो जाते हैं और बहुत तारीफ करते हैं। इसे इन्हे अपनापन और प्रेरणा मिलती है।

हिरण्यमयी शिवानी (Hiranyamayi Shivani) और उनकी बहु मंजरी सिंह (Manjari Singh) पटना, बिहार की निवासी हैं। साल 2011 में वे अपनी पूरी फॅमिली सहित दिल्ली आकर रहने लगी थी। इन दोनों को बिहारी खाना बहुत पसंद है और इसे बनाने और परोसने में ये माहिर हैं। हिरण्यमयी हर वर्ष बिहार जाकर एक बार अपने रिश्तेदारों से जरूर मिलती थीं, परंतु महामारी और लॉक डाउन के चलते दिल्ली में ही रहना पड़ा था।

लोगो को खाने की मुश्किल को देखकर आईडिया आया

उन्होंने हमारे एक सहयोगी पत्रकार को बताया की वे उस आपदा कल में कहीं भी आ-जा नहीं सकते थे, इसी कारण से वह बहुत उलझन में थी। कुछ दिन बाद उन्हें अहसास हुआ की ऐसे कितने लोग होंगे, जो अपने घर नहीं जा पाए होंगे। कई लोग पढ़ाई या नौकाती के चलते घर से दूर रहने को मजबूर हैं और लॉकडाउन में फंसे हुए हैं। वो न तो अपने घरवालों से मिल सकते थे और ना ही घर के बने हुए खाना को खा सकते थे।

आपको बता दें की बिहार से आकर दिल्ली में निवास करने वाले लोगों की बहुत संख्या है। परंतु उन्हें बिहारी खाना दिल्ली में इतनी सरलता से मुहैया नहीं हो पा रहा था, खासकर लॉकडाउन में तो कोई गुंजाइश नहीं थी। ऐसे में 58 साल की हिरण्यमयी शिवानी ने इसके लिए विचार किया और हल खोज लिया।

पारंपरिक बिहारी भोजन लोगों तक पहुंचाने का फैसला किया

उन्होंने बताया की घर पर पारंपरिक बिहारी भोजन बनाने और लोगों तक उसे पहुंचाने का फैसला किया। इससे उनके कस्टमर को कुछ वक्त के लिए ही सही, घर जैसा बिहारी भोजन मिल सका। उन्होंने अपनी बहु मंजरी से अपने इस बिज़नेस मॉडल के बारे में बात और वह तुरंत तैयार हो गई।

सास हिरण्यमयी (Mother In Law Hiranyamayi Shivani) ने आगे बताया की बिहार का खाना पूरी दुनिया में सबसे अलग है और देश के लोगों के दिल में एक अलग ऐठन बनाया हुआ है। 2021 में हिरण्यमयी ने अपने घर के ‘क्लाउड किचन’ (Cloud Kitchen Business) के ज़रिये ‘द छौंक’ नाम से बिहार के स्ट्रीट फूड की शुरुआत की। खाना बनाने के लिए वह अपनी मां की रेसिपी और पीढ़ियों से चले आ रहे मसालों का उपयोग करती है। उनका बनाया खाना एकदम देसी बिहारी खाना (Food Of Bihar) होता है।

लिट्टी चौखा के अलावा अन्न डिश की भेजती है

वे आम तौर पर बिहारी खाना ही परोसती है, जैसे लिट्टी चोखा, दाल-भात, तरकारी, रोटी और अचार। 35 वर्ष की मंजरी ने बताया की लोगों को खिचड़ी खाना भी बहुत पसंद है। दाल-चावल मर हम कुछ मसलों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उसका स्वाद एकदम हटके हो जाता है। विकेंड में अक्सर दोपहर के भोजन में अन्न डिश भी सम्मिलित कर लेते हैं। अब काम बढ़ने के साथ साथ उनके मेन्यू में पारंपरिक स्वाद के अलावा सभी डिश शामिल की गई हैं।

मंजरी (Daughter in Law Manjari Singh) का कहना है की, सबका बेस्ट और फेवरेट लिट्टी चोखा है, जो उनके किचन की शान है। लिट्टी, सत्तू (भुने हुए बेसन) से बनाया जाता है। चोखा, आलु, बैंगन तथा टमाटर को मैश कर, पारंपरिक बिहारी मसालों के साथ पकाकर बनया जाता है। इसके अलावा झालमूड़ी, चूरा मटर, बाजका, चूरा बादाम, खीर के साथ दाल पूड़ी, सत्तु की कचौड़ी और पुलाव भी बनाया जाता है।

उनका सत्तू का शर्बत भी काफी डिमांड में रहता है। यह भूख बढ़ाने के काम आता है। उनके खाने की प्राइस की बार करें, तो 110 रुपये से लेकर 445 रुपये के बीच के रेट से खाने की डिश है। उन्हें अनुसार शुरू में उन्हें एक दिन में 40 ऑर्डर मिलते थे। परंतु अब ऑर्डर बढ़कर 450 हो गए हैं। वे अपने इस बिज़नेस से 4 लाख रुपये माह की कमाई कर रहीं हैं।

Money and investment presentation photo

उनके इस बिजनेस में एक अन्न चीज़ अच्छी पैकेजिंग है। उसकेलिए वे किसी भी प्रकार के प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल नहीं करती हैं। वे पर्यावरण को लेकर बहुत जागरूख है और इसलिए प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करती है। वे कस्टमर को कांच के एयरटाइट कंटेनर में खाना देते हैं, उसके बाद उसे री-यूज़ किया जा सकता है।

ऐसे भोजन लोगो तक पहुँचता है

अपना बनाया भोजन और डिश लोगो तक पहुंचाने ले लिए वे जोमैटो, स्विगी और अन्य फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर पहले से रजिस्टर कर चुकी है। अब काम चलने से वे इसे बढ़ने की प्लानिंग कर रही है और दोनों दिल्ली, एनसीआर, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु तथा जयपुर में आउटलेट्स खोलने पर कार्य कर रही हैं। जल्द ही कई शहरो में आपको इनका बिहारी स्वाद चखने को मिलेगा।

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