
Banaskantha: गाँव कृषि प्रधान देश है, जिसको एक बार अपनी गांव की मिट्टी से प्यार हो जाता है, फिर उसको आलीशान जिंदगी भी रास नही आती। उसको अपने गांव की मिट्टी की खुशबू ही भाती है। आज एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बता रहे हैं, जो अपनी अच्छी खासी नौकरी छोड़ने के बाद आलू की खेती करने लगे।
पार्थीभाई जेठाभाई चौधरी (Parthibhai Jethabhai Chaudhary) पुलिस डिपार्टमेंट में ऑफिसर की नौकरी कर रहे थे, लेकिन उनको कुछ अधूरा से लग रहा था, वहाँ मन नही लग रहा था। कुछ समय बाद उन्हें अनुभव हुआ कि उनका मन पुलिस की नौकरी (Police Job) से उनको खुशी नही मिल रही जिसके वो हकदार है। जिसके बाद पुलिस की नौकरी छोड़ (Quits Police Job) कर अपने गांव खेती करने के लिए आ गए।
खेती का सपना किया पूरा
पार्थीभाई (Parthibhai Jethabhai Chaudhary) एक पुलिस बैकग्राउंड से आते हैं। ऐसे में उन्हें खेती (Farming) के बारे में कोई इन्फॉर्मेशन नहीं थी। लेकिन उन्होंने हिम्मत नही हारी अपने मजबूत होसलो के साथ आगे बढ़ते चले गये। वह समझते थे कि जीवन में हर काम पहली बार होता है। खेती करने से पहले उन्होंने आधुनिक खेती के तौर-तरीकों को जानने समझने का प्रयास किया।
गुजरात का बनासकांठा जिला खेती के लिये प्रसिद्ध
पूरी तैयारियों के साथ उन्होंने खेती करना स्टार्ट कर दिया। गुजरात का बनासकांठा जिला खेती के लिए प्रसिद्ध है। आज पार्थीभाई खेती से करोड़ों रुपये कमा (Earn From Farming) रहे हैं और बनासकांठा के किसानों को भी खेती से लाभ कमाने का प्रशिक्षण दे रहे हैं।
‘पोटैटोमैन’ के नाम से हुए मशहूर
पार्थीभाई खेती के बारे में नहीं जानते थे, उनको खेती के तौर तरीके भी नही पता थे, लेकिन उनका सपना था, खेती करने का बस जुनून से आगे बढ़ते चले गये। अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने खेती कर वो नाम कमा लिया जिसके बारे में उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की था।
पार्थीभाई ने आलू (Potato) का इतना अधिक उत्पादन किया कि वह आज ‘पोटैटोमैन’ के नाम से मशहूर हो गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आज से 18 साल पहले उन्होंने अपनी पुलिस की नौकरी छोड़ी थी और कनाडा की एक मल्टीनेशनल कंपनी के साथ उन्हें एग्रीकल्चर प्रोसेस प्रशिक्षण करने का अबसर मिला था।
लोगो को दिया रोजगार
वहीं आज उनकी कंपनी अच्छी गुणवत्ता वाले आलू का उत्पादन (Potato farming) करती है। जिसे बड़ी-बड़ी कंपनियों उइसे आलू खरीदती है। वो बडी मात्रा में आलू सप्लाई करते है। इससे कंपनी को काफी फायदा होता है। सूत्रों से मिली खबरों के मुताबिक अभी उनके साथ 16 से अधिक लोग काम करते हैं और उनका सालाना टर्नओवर लगभग 3.5 करोड़ का है।
पानी की समस्या का निवारण किया
आलू उत्पादन की शुरुआत करना आसान काम नही था पार्थीभाई के लिए, क्योंकि फसल के लिए आवश्यक पानी का प्रबंध करना उनके लिए तब मुसीबत खड़ी कर रहा था, लेकिन इसके समाधान के रूप में पार्थीभाई ने ड्रिप इरिगेशन टेक्निक का सहारा लिया। इस तकनीक के माध्यम से फसल में बूंद-बूंद करके पानी डाला जाता है, जिससे कम से कम पानी की खपत के साथ ही फसल को आवश्यक मात्रा में पानी आसानी से उपलब्ध हो जाता है।
Potato is following the onion price movement of last year, with a 40% surge in prices in the past one month to about Rs 35 per kg owing to a shortage in supply while the demand has increased for the staple. #potato #india #agriculture #farming #NewDelhi #agribusiness pic.twitter.com/gxuzfB81PT
— Business of Agriculture Magazine (@BusinessofAgri1) July 29, 2020
आज पार्थीभाई अपनी 87 एकड़ जमीन पर आलू की खेती करने में सफल सावित हुये। वे प्रति हेक्टेयर लगभग 1200 किलो आलू का उत्पादन कर रहे हैं। इन आलू की क्वालिटी आमतौर पर चिप्स उत्पादन के लिए सही मानी जाती है। पार्थीभाई शुरुआत में मेकैन कंपनी को आलू सप्लाई किया करते थे, अब वे देशी कंपनी बालाजी वेफ़र्स को चिप्स सप्लाई कर रहे हैं।
विश्व रिकॉर्ड बनाने से सफल
इतने बड़े स्तर पर आलू उत्पादन करने और करोड़ों का कारोबार करने वाले पार्थीभाई अपने परिवार के लिए भी समय निकाल लेते हैं। अपने परिवार के साथ भी समय व्यतीत करते है। आमतौर पर आलू की बुआई अक्टूबर महीने की शुरुआत में हो जाती है और दिसंबर तक फसल तैयार हो जाती है। इसके बाद पार्थीभाई अपने आलुओं को कोल्ड स्टोरेज में स्टोर करके रख देते हैं, जहां से फिर जैसी जैसी मांग बढ़ती जाती है वैसे आलू की सप्लाई की जाती है।



