
Rajkot: आजकल का युवा व्यापार के प्रति ज्यादा रुझान दिखा रहा है। इसका कारण यह है कि युवा आत्मनिर्भर बनने की राह में। आजकल युवा व्यापार के लिए अपने कौशल को बढ़ाता है और व्यापार की तरफ बढ़ता चला जाता है। लोगों का मानना है कि सरकारी नौकरी से वे अपने परिवार अच्छी तरह से चला सकते हैं और साथ ही साथ एक अच्छे पद में होने के कारण समाज में एक प्रतिष्ठित पद पा सकते हैं।
आपको बता दें नौकरी से केबल प्रतिष्ठित पद ही प्राप्त हो सकता है, लेकिन एक अच्छा जीवन जीने के लिए जो धन की आवश्यकता होती है, वह व्यापार से ही पूरी होगी। महामारी के दौर में लोगों ने सीखा है कि आत्मनिर्भर होने से कोई भी परिस्थिति से लड़ना आसान होता है। जिस वक्त देश बंद था उस वक्त लाखों लोगों कर पास खाने के लिए भी कुछ नही था। जो कहते थे वे प्रतिष्ठित जॉब करते है उनका भी रोजगार बंद हो गया।
प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा आत्मनिर्भर भारत की पहल ने कई लोगो को जिंदगी बदल दी है। देश का हर युवा आत्मनिर्भर भारत की पहल में लग गया है। आज हम एक ऐसे युवक की बात करेंगे, जिसने ग्रेजुएशन के बाद मधुमक्खी पालन शुरू किया और साल भर में 700000 रुपये का मुनाफा कमाया उस युवा के बारे में।
गुजरात के नीलेश गोहिल की कहानी
बताया जा रहा है कि नीलेश गोहिल (Nilesh Gohil) गुजरात राज्य के राजकोट (Rajkot) के निवासी है। उन्होंने एग्रोनॉमी से अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। पढ़ाई के दौरान ही उन्हें अपने फिर से जुड़े रहकर काम करने की चाहत थी, जिसे उन्होंने पूरा किया है।
निलेश गोहिल चाहते थे कि वह अपने फील्ड से जुड़े रहे और इसी से अच्छा खासा धन भी कमा सकें, इसलिए उन्होंने मधुमक्खी पालन (Bee keeping Business) को चुना। हम जानते हैं कि शुद्ध शहद मिलना आज के समय में बहुत ही कठिन है। और शहद का इस्तेमाल हर छोटी-मोटी चीजों में किया जाता है।
आयुर्वेदिक दवाइयों का सेवन भी शहद के माध्यम से ही किया जाता है और सौंदर्य प्रसाधन बनाने में भी शहद का इस्तेमाल किया जाता है इसीलिए शहद का खपत काफी ज्यादा है। निलेश गोहिल ने 50 पेटियों से इटालियन मधुमक्खी पालन शुरू किया था, आज वे 200 से अधिक बेटियों से मधुमक्खी पालन कर रहे हैं।
डिमांड में है इटालियन मधुमक्खी का शहद
निलेश गोहिल बताते हैं कि उनके द्वारा निर्मित इटालियन मधुमक्खी का शहद इस समय बाजारों में काफी ज्यादा डिमांड में है। उनका व्यापार 1 साल में ही दौड़ पड़ा। उन्होंने साल भर में ही 50 पेटी से 200 पेटी तक का सफर तय कर लिया था। 1 वर्ष के भीतर ही 700000 RS का मुनाफा कमाया था।

निलेश बताते हैं कि उन्होंने इस काम को शुरू करने से पहले लगभग 6 माह की ट्रेनिंग ली थी जिसके बाद उन्होंने मधुमक्खी पालन शुरू किया था। उनका कहना है कि मधुमक्खी पालन का काम भी बहुत रिस्की होता है, इसमें भी नुकसान होने के काफी ज्यादा चांसेस होते हैं, इसलिए लोगों को प्रशिक्षण लेने के बाद ही इस काम को करना चाहिए। वर्ष 2019 में उन्होंने मधुमक्खी पालन शुरू किया और सोशल मीडिया को अपना हथियार बनाया।
इटालियन मधुमक्खी है शहद का एक उम्दा स्रोत
निलेश गोहिल बताते हैं कि उन्होंने इटालियन मधुमक्खी को इसलिए चुना क्योंकि इटालियन मधुमक्खी शहद (Bee Honey) का बहुत अच्छा उत्पादन करती हैं। नीलेश वर्तमान में 1800 किलोग्राम शहद का उत्पादन हर वर्ष करते हैं और बाजार में होलसेल सप्लाई भी करते हैं।

लोगों को जब पता चला कि वह शुद्ध शहद बेच रहे हैं, तो लोगों की डिमांड बढ़ती चली जा रही है। हर महीने 150 किलोग्राम शहद उत्पादित करते हैं जिसमें 6 वेराइटी शामिल है अजमो, वरियाली, बोर, क्रिस्टल, मल्टी और रायडो आदि। निलेश कोशिश कर रहे हैं कि अब वे देशी मधुमक्खी का पालन कर सके जिससे देसी शहद प्राप्त हो सके। उनका कहना है कि मधुमक्खी पालन के लिए लगातार मूवमेंट करते रहना जरूरी है वरना नुकसान भी हो सकता है।
जाने शहद निर्माण की प्रक्रिया
निलेश बताते हैं कि मधुमक्खियां फूलों का रस चूस कर शहद का निर्माण करती है। इसीलिए उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान जहां ढेरों फूल पाए जाते हैं वहां का रुख करना पड़ता है। वे अपने मधुमक्खी पालन के लिए जामनगर, कच्छ, सुरेंद्रनगर, मोरबी और जूनागढ़ को चुनते हैं, जहां अच्छी वैरायटी के फूल होते हैं जिससे शहद भी काफी स्वादिष्ट प्राप्त होता है।
निलेश गोहिल ने शहद बनने की प्रक्रिया को बताते हुए कहा कि मधुमक्खियां रस चूस कर मोम की बनी पेटियों में जाकर मल त्याग करती हैं इसी मल से 8 दिन की प्रक्रिया होती है और कच्चा शहद का निर्माण होता है।
निलेश बताते हैं कि शहद में शुरुआत में काफी ज्यादा पानी होता है। मधुमक्खियां पंखों की सहायता से उस पानी को सोती है और 12 से 15 दिन में पका हुआ शहद प्राप्त होता जिसे सीधे तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। 20 से 25 दिन में शहद बन कर तैयार हो जाता है।



