Jalore: विज्ञानं के अनुसार पृथ्वी गोल है और पृथ्वी के हर क्षेत्र की जल वायु अलग अलग है। इसी के चलते हर जगह कुछ न कुछ अलग होता है, जैसे कुछ क्षेत्र गर्म होते है और कुछ क्षेत्र ठंडे और हर जगह पर अलग अलग फसल होती है। भारत में ड्राई फ्रूट काफी महंगे होते है, उसका कारण भारत की जलवायु है।
हम जानते है कश्मीर में सेव काफी ज्यादा प्रसिद्ध है, क्योंकि कश्मीर काफी ठंडा इलाका है, सेव एक बर्फीले इलाके का फल है। ऐसे ही काजू, बादाम, अखरोट, आदि बहुत महंगा उत्पाद है। परंतु इनसे भी महंगा और फायदेमंद उत्पाद एक और है, जो सभी ड्राई फ्रूट से भी ज्यादा महंगा है।
आपको सुनने में अजीब जरूर लग रहा होगा परंतु यह सच है। खजूर का फल कुछ जगहों पर इसे खारक छुआरे भी कहा जाता है। यह फल काफी ज्यादा फायदेमंद होता है, इसके लगातर सेवन से शरीर में खून की कमी पूरी होती है और व्यक्ति एक दम तंदुरुस्त रहता है। तो आइए जानते है कि कहा हो रही है इसकी शानदार खेती और किस तरह से। इस पोस्ट के माध्यम से विस्तार पूर्वक जानेंगे।
राजस्थान के जालौर जिले में हो रही खजूर की खेती
खजूर का फल (Date Fruit) जो अखरोट और अंजीर से भी महंगा है। हम कह सकते है कि जितने भी ड्राई फ्रूट्स हैं, उन सब से ज्यादा महंगा है, खजूर का फल। सुनने में थोड़ा अविश्वसनीय जरूर है, परंतु यह सत्य है।
आपको बता दे राजस्थान (Rajasthan) जिले के मारवाड़ क्षेत्र में आने वाला जिला जालौर में सबसे महंगे फल यानि खजूर की खेती (khajoor Ki Kheti) का शुभारम्भ हो चूका है। राजस्थान देश का सबसे खूबसूरत और कलात्मक राज्य है, इस राज्य में रेगिस्थान है, यहाँ दिन के समय धुप और रात के समय मौसम ठंडा होता है, यहाँ पर बहुत कम बारिश होती है।
राजस्थान के जालौर (Jalore) जिले में सिर्फ मानसूनी फसले लगाई जाती थी। परंतु वर्ष 2008 से राजस्थान में नर्मदा नहर का आगमन हुआ है, तब से राज्य में नई लहर उमड़ रही है। अब लोग आधुनिक खेती कर करना चाहते है और शुरुआत उन्होंने खजूर की खेती से की उनके नए विचारो ने उन्हें करोड़पति बनाने में काफी मदद की है।
खजूर की खेती करने वाले किसान भाई केवल कक्षा 10 वीं तक ही शिक्षित है
राजस्थान के सभी किसान भाइयो में से एक किसान भाई है, केहराराम जिन्होंने आधुनिक खेती में खजूर की खेती को चुना। केहराराम जालौर जिले के दाता गाँव के निवासी है और वे केवल कक्षा 10 तक ही पढ़े है। उसके बाद भी आज उन्होंने अपना काम इस बात को साबित करते हुए किया कि किताबी ज्ञान से बड़ा व्यावहारिक ज्ञान है।
केहराराम (Jalore Farmer Kehraram) ने अपने खेत के 4 हेक्टेयर जमीन पर खजूर मेडजूल और बरी की फसल उगाई। यह खजूर सऊदी अरब और अफ्रीका देश में काफी ज्यादा फेमस है। फसल लगाने के करीब ढाई वर्ष बाद उनके पौधों पर फल आने शुरू हुए। उसके बाद उन्होंने करीब 3 वर्षो में करोडो रुपये कमा लिये इस प्रकार उनकी मेहनत सफल हुई।
टीवी में प्रोग्राम देखते हुए खेती करने का विचार आया
केहराराम कहते है कि उन्हें खेती करने का विचार टीवी के एक प्रोग्राम से आया। वर्ष 2012 में टीवी पर खेती किसानी से संबधित एक प्रोग्राम चल रहा था, उसे देख कर उन्होंने निश्चय किया कि वे अब खेती करेगे। इसके बाद वे जानकारी जुटाने लगे।
इसी बीच इन्हें पता लगा की गुजरात राज्य के भुज इलाके में छुआरे की फसल उगाई जा रही है। तो वे गुजरात गए और वहां से खजूर की खेती से सम्बंधित संपूर्ण जानकारी एकत्रित की। जब उन्हें पता लगा की गुजरात मेडजूल प्रजाति के खजूर की खेती (Date Farming) इजराइली टेक्नोलॉजी से की जा रही है, तो उन्होंने भी इसी का अनुसरण करने का फैसला लिया।
वर्ष 2012 में मेडजूल किस्म के पौधे की कीमत करीब 3500 रुपये थी। परंतु सरकार की तरफ से 90 प्रतिशत की सब्सिडी दी जा रही है। गुजरात से आते ही केहराराम ने पौधे को ऑर्डर किए। जिसकी सप्लाई ढाई वर्ष बाद हुई, तब उन्होंने उनका रोपड़ कर फसल लगाई।
जैविक खेती की मदद से उगाया जा रहा यह फल
विदेश की किस्म के खजूर की फसल को जैविक तकनीक से लगाया जाता है। इस फसल में किसी भी प्रकार का रासायनिक खाद या उर्वरक का उपयोग नहीं होता, जिससे यह मानव शरीर में काफी अच्छी तरह असर करता है।
जैविक खाद गोबर खाद और केंचुआ खाद होती है, जो जमीन की उर्वरक शक्ति बढ़ाती है और ज्यादा उत्पादकता में मदद करती है। राजस्थान राज्य के जालौर जिले के साथ अन्य 11 जिलो में भी खजूर की खेती हो रही है। बाड़मेर, चूरू, सिरोही, जोधपुर, नागौर, पाली, बीकानेर, झुंझुनूं, श्रीगंगानगर, जैसलमेर और हनुमानगढ़ आदि जिले भी शामिल है।




