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Kanpur: आज के युग मे युवाओं के लिए रोजगार मिलना सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। ऐसे में युवा खुद के बिजनेस यानी स्वरोजगार की ओर ज्यादा आर्कषित हो रहे हैं। अगर आप 12वीं और ग्रेजुएशन कर चुके हैं और अपना खुद का बिजनेस शुरू कर अच्छा मुनाफा कमाना चाहते है, तो ये स्टोरी आपके लिए प्रेरणा से कम नही है।
अपना खुद का व्यवसाय शुरू करना एक बड़ा निवेश होता है। जिसे सफल बनाने के लिए समय, धीरज और प्रयास की आवश्यकता होती है। एक बिज़नेस के मालिक होने के बहुत फायदे है। आप खुद के बॉस बन जाओगे, अपने बिज़नस को अपनी मर्जी के अनुसार हैंडल कर सकोगे।
दूसरा व्यवसाय शुरू बहुत मुश्किल भरा
आज हम आपको एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बता रहे हैं। जो एक बड़े व्यापारी का बेटा था। क्योंकि व्यापारी के बेटे के लिए बहुत ही मुश्किल होता है, अपने पारिवारिक व्यवसाय को छोड़कर दूसरा व्यवसाय शुरू करना।
एक बिजनेसमैन का लड़का हमेशा सोचता है कि वह एक लग्जरी नौकरी करेगा या अपने पारिवारिक व्यवसाय को ही आगे बढयेगा। परंतु इनकी सोच बिल्कुल अलग थी, क्योंकि उन्होंने इस बारे में कभी सोचा ही नहीं था। उनके सपने कुछ और ही थे। वो खुद के बिजनेस की ओर अधिक आकर्षित थे।
उत्तर प्रदेश राज्य के बहराइच जिले में नानपारा के रहने वाले दिनेश अग्रवाल (Dinesh Agarwal) ने कंप्यूटर साइंस में हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट कानपुर से बीटेक किया। इसके बाद उन्होंने कई बड़ी कंपनियों में काम किया।
सीएमसी लिमिटेड में अपना कैरियर शुरुआत करने के साथ-साथ एक प्रोजेक्ट सेंट्रलाइज्ड रेलवे रिजर्वेशन सिस्टम पर भी काम किया। इसके बाद वह सी डॉट (सेंटर फॉर डेवलपमेंट आफ टेलीमैटिक्स) से जुड़ गए। इस प्रकार उन्होंने 5 साल तक इन कंपनियों में कार्य करने के बाद उन्होंने अमेरिका की तरफ रुख किया और उन्होंने एचसीएल टेक्नोलॉजी में काम करना शुरू कर दिया।
वे अपने काम में पूर्ण रूप से सतुष्ट नहीं थे
इन सब बड़ी कंपनियों में काम करते हुऐ लग्जरी लाइफ जीने के बाद भी दिनेश को अंदर से थोड़ी कमी महसूस हो रही थी। उनके दिमाग में बस एक ही बात हमेशा से आ रही थी कि मैं इस प्रकार एक ही काम पूरे जीवन नहीं कर सकता हूं। वे इस प्रकार की जिंदगी नहीं जीना चाहते थे।
वह एक मौके की तलाश कर रहे थे। जिससे वह अपना व्यवसाय (Business) शुरू कर सके। वो अपने सपनो को उड़ान देना चाहते थे। इसी कारण 1996 में यह भारत लौट आए और उन्होंने सॉफ्टवेयर सेवा में कुछ शुरू करने का फैसला लिया। क्योंकि वह कंप्यूटर विशेषज्ञ थे और उन्हें सॉफ्टवेयर की अच्छी समझ थी और साथ ही वह इंटरनेट का उपयोग भी करते थे।
एक वेबसाइट बनकर काम शुरू किया
उन्होंने एक वेब पेज बनाने के बारे में सोचा जिस पर छोटे व मध्यम उद्यमों के भी सभी उत्पादों को प्रदर्शित किया जा सके और बेचकर मुनाफा भी कमाया जा सके। उन्होंने एक वेबसाइट (Website) बनाई। जिसे इंडियन मार्ट (Indiamart) नाम दिया और यही उनके बिजनेस का नाम था। हर किसी के लिए एक नये व्यवसाय को शुरू करना आसान नहीं होता है।
इस व्यवसाय में काम करने के लिए कंप्यूटर बहुत महत्व था और उस समय कंप्यूटर बहुत महंगे थे। इसी कारण दिनेश ने अपनी बचत से 40000 रुपए अपने व्यवसाय में निवेश किए। दिनेश के लिए सबसे महत्वपूर्ण काम था की वह ग्राहकों को कंप्यूटर खरीदने के लिए कैसे प्रेरित करे। इसलिए उन्हें कई प्रकार के प्रचार किए और इसके साथ ही इंटरनेट भी बहुत जरूरी था, क्योंकि उस समय इंटरनेट के प्रति लोग जागरुक नहीं थे।
प्रसार प्रसार में माहिर लोगो को काम पर रखा
जब उन्होंने इंडियन मार्ट की शुरुआत की तो उन्होंने मार्ट को बढ़ावा देने के लिए कई तरह के प्रचार और प्रसार किए। ऐसे स्टाफ मेंबर को भी रखा, जो प्रचार प्रसार में माहिर थे। दिल्ली प्रगति मैदान में लगने वाले मेले में भी एक प्रदर्शनी आयोजित की, जिसमें स्टाफ ने इंडियन मार्ट छपा हुआ टी शर्ट पहने हुए थे।

इस प्रकार उन्हें पहले ग्राहक के रूप में फास्ट फूड चैन Nirulus मिला। उस समय छोटी-छोटी फाइलों को अपलोड करने में बहुत समय लग रहा था। इसी कारण उन्होने फैसला लिया के 32000 Ru की वार्षिक लागत पर अपनी वेबसाइट में प्रतिवर्ष विकास और प्रबंधन किए जाएंगे।
इस तरह इंडियामार्ट को मुनाफा होना शुरू हुआ
जब पहली बार इंडियन मार्ट की वेबसाइट पर एक ग्राहक का प्रोफाइल पोस्ट किया गया। तो दुनिया भर से अलग-अलग प्रश्न आना शुरू हो गए और इससे कई कंपनियों को वेबसाइट पर अपनी उपस्थिति का एहसास हुआ और साथ में इंडियामार्ट को भी धीरे धीरे मुनाफा होने लगा।
जिससे साल के अंत तक कंपनी का कारोबार 600000 Ru तक पहुंच गया और उस समय कंपनी में मात्र 9 कर्मचारी थे। जब कारोबार बढ़ना शुरू हो गया, तो जगह की भी जरूरत पड़ने लगी। इस वजह से उन्होंने 1996 से 1999 तक चार कार्यालय बदले और कई नए कर्मचारियों की भर्ती भी की। उस समय एक कर्मचारी को भर्ती करने में लगभग 50000 Ru का खर्च आता था। क्योंकि उसे कंप्यूटर और उसके उपकरण खरीदने पड़ते थे।
Dinesh Agarwal, Founder & CEO, Indiamart joins us as an eminent jury member for the 4th edition of IMPACT digital power 100 awards.#Impactdigitalpower100 pic.twitter.com/OyAO3M3W8t
— e4m(Events) (@e4mevents) November 2, 2021
इस प्रकार इंडियन मार्ट धीरे धीरे बढ़ता गया और सन 1998 में इंडियन मार्ट का दूसरा कार्यालय मुंबई में स्थापित किया गया। उस समय तक इंडियन मार्ट के 1000 ग्राहक हो चुके थे। उनका कारोबार भी बढ़ रहा था और कर्मचारियों की भूमिका भी बढ़ रही थी।
जब संयुक्त राज्य अमेरिका पर 2001 को ह-मला हुआ, तो कारोबार में 40 प्रतिशत तक गिरावट आई। परंतु इसके बाद धीरे धीरे फिर से बढ़ना शुरू हो गया और आज इंडियन मार्ट के देशभर में 20 शहरों में 50 कार्यालय और लगभग 2500 कर्मचारी हैं।
उनके हेड ऑफिस में 800 कर्मचारी है
वर्तमान समय में नोएडा में इसके प्रधान कार्यालय में 800 कर्मचारी हैं। 2007 में इंडियन मार्ट नोएडा में नए कार्यालय का 7 करोड़ रुपए लागत से लगभग 2 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया। अब कंपनी हर वर्ष 30 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है।
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— @EntrepreneurInd (@EntrepreneurIND) July 15, 2019
आंकड़ों के अनुसार सन 2013-14 में लगभग 300 करोड़ का इंडियामार्ट टर्नओवर (IndiaMart turnover) हो गया था। वर्तमान समय में इंडियामार्ट की लगभग 24000 करोड़ की संपत्ति है। इस प्रकार दिनेश अग्रवाल की अलग सोच और समझने की प्रक्रिया के साथ कड़ी मेहनत रंग लाई। और उन्होंने एक नया मुकाम हासिल कर सभी के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बने।




