
Gopalganj: प्रकृति की हर एक चीज़ हमारे लिए उपहार स्वरूप है। हर एक उत्पाद उपयोगी है। जो कुछ न कुछ के काम आता है। भगवान ने हर एक चीज़ कुछ इस तरह से बनाई है कि वह एक दूसरे से जुड़े हुए है। इंसान जो भी करता है। अपने पेट को पालने के लिए कुछ न कुछ करता है।
कृषि व्यापार सबसे अच्छा और सबसे मुनाफे का व्यापार माना जाता है, क्योंकि यह भी भगवान की देन है। फसलों पर मौसम का प्रभाव पड़ता है। जिसके कारण कोई भी कृषि अकेले पर आश्रित नहीं रहता और हर किसी के अपने विचार होते है। इसी के बीच हम बात करते है, ऐसे किसान की जो घास की खेती (Grass Farming) से आज 2000000 साल के कमा रहे है, तो जानते है की कैसे आया विचार आया घास की खेती का और क्या फायदे है।
साधारण परिचय
बिहार (Bihar) राज्य के गोपालगंज (Gopalganj) जिले केसदर प्रखंड के कररिया गांव के निवासी मेघराज प्रसाद (Medhraj Prasad) घास की कृषि (Ghans Ki Kheti) करके अपना नाम बना लिया। मेघराज किसानी से पूरा परिवार मुश्किल से चल पाते थे। इस कारण मेघराज नन मैट्रिक तक पढ़े है।
तब से ही उन्होंने ठान लिया था कि एक दिन ऐसी चीज़ का उत्पाद करेंगे। जिसे कम लागत में अधिक मुनाफा हो सके और आगे आत्मनिर्भर बना जा सके। इस लिए घास की फसल से की शुरुआत और आज 20 लाख रुपए साल का कमाते है घास की फसल से।
किसान भाइयो के लिए प्रेरणा
जो लोग उनके इस काम पर हस्ते थे। आज वही उनकी तारीफे करते नहीं थकते। 20 एकड़ में खस की फसल लगाते है और उन किसान भाइयो के लिए प्रेरणा बने हैं, जिनकी फसलें बाढ़ और बारिश में ख़राब हो जाती हैं। ऐसे किसान भाइयो के लिए घास की खेती भगवान के किसी वरदान से कम नहीं है।
आत्मनिर्भर बनने की चाह ने बनाया सफल
मेघराज उन सफल किसानों में से एक है, जो लोगों के तानों को किनार कर अपने सपने को पूरा करने में लग गए। दो भाइयों और एक बहन में बड़े है। मेघराज के पिता जी किसान थे। मेघराज के एक मित्र जो अरूणाचल में रखते है।
इंटरनेट से ऑनलाइन जानकारी एकत्रित की
उनसे औषधीय पौधे के बारे में जानकारी इखट्टा की और नेट से जानकारी एकत्रित कर कम दाम में अच्छा काम करने के लिए घास की खेती के बारे में जानकारी जुटाई। इसके बाद लखनऊ के समीप रिसर्च सेंटर से खस के 20 हजार रुपय में 10 हजार बीज खरीदे और अपने खेतों में लगा दिये।
शुरुआत में उन्होंने एक बगीचे में खेती की, जिससे उन्हे एक लाख की कमाई हुई। आगे उन्होंने 20 बीघे में खेती की और अच्छा मुनाफा कमाया। जिससे उनके हौसलो में पंख लग गये और वो आगे बढ़ते चले गये।
दूसरों के ताने से हार नही मानी
आज का युग ऐसा है कि कोई कुछ नया करता नही है और अगर कोई नया काम स्टार्ट करता है, तो उसको पागल कहते है। लोगो को ज्यादा ज्ञान नहीं है। की खस के क्या फायदे है और किस चीज़ के लिए उपयोग होती है। इस लिए लोग मेघराज को पागल कहते थे।
मेघराज ने बताया कि उन्होंने जब खस की खेती (Khas Ki Kheti) की शुरुआत की तो परिवार के साथ साथ आसपास और सगे-संबंधियों ने कई प्रकार की बाते बनाई। कई लोगों ने तो पागल भी बोला। कहते थे की घास की खेती से क्या कर पाएगा।
अगर धान और गेहूं की खेती करता तो कुछ अनाज पैदा होता और अच्छा मुनाफा होता। परंतु उन्होंने सोच लिया था कि कुछ नया ही करना है, इसी राह पर चलते चलते वो आगे बढ़ते चले गये। आज ऐसा महौल है कि लोग उनकी तारीफ करते हुये रुकते नही है।
प्रतिलीटर तेल की कीमत 17000 रुपये, बिना पानी खाद के मुनाफा
खस के पौधे (Vetiver Plants)) की जड़ में सुगंधित तेल होता है, जो बहुत उपयोगी है। स्पेशल इत्र निर्माण में खस की जड़ से निकले तेल का उपयोग होता है, सुगंधित चीजें में जैसे साबुन निर्माण में उपयोग होता है। इस फसल पर मौसम का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता। यह विषम परिस्थितियों में भी फलती-फूलती है। इस पौधे को नुकसान नहीं होता है।
मोतिहारी के पिपराकोठी में पेराई कर में खस का तेल (Vetiver Oil) निकालते है, जिसकी कीमत 17 हजार प्रति लीटर तक होती है। पर्यावरण के अनुकूल खस का पौधा मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाने मव मददगार है। खस (Vetiveria zizanioides) का एक पौधा एक साल में 80 ग्राम कार्बन को अवशोषित करता है। जो प्रदूषण कम करने में मददगर साबित होता है।
मेघराज ने बताया अन्य फसलों के साथ भी खस की खेती की जा सकती है। एक एकड़ में लगी खस से साल का एक लाख की कमाया जा सकता है। खस 10-15 दिन तक पानी में डूबे रहने के बाद भी गलता नहीं है। इसलिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के किसानों के लिए यह सबसे अच्छा फसल है।
कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। अलग से कोई रासायनिक की आवश्यकता नहीं है। खस की खेती उन क्षेत्रों में भी हो सकती है, जहां पानी की कमी है और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र हो। इसीलिए पूरे देश में एरोमा मिशन के अंतर्गत खस उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है।



