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Darbhanga: आज के समय में कोई भी केवल नौकरी के सहारे अपना पूरा जीवन नहीं सवार सकता है। कुछ लोग तोह अपनी अच्छी खासी नौकरी छोड़कर कुछ ना कुछ खुदका व्यवसाय शुरू कर रहे हैं। पूरे देश में ऐसे कई उदाहरण है। अक्सर लोग कोई ऐसा बिजनेस करना चाहते हैं, जिसमें पूरे जीवन में कभी घाटा ना हो और कम लागत में बड़ा मुनाफा हो सके।
हम आपको एक ऐसी बिजनेस डिटेल दे रहे है, जिसकी मार्किट में हमेषा डिमांड बनी रहती है। एक ऐसी चीज़ है, जिसे, ठण्ड, गर्मी बारिश हर मौसम में खाया जाता है। इसे बच्चों से लेकर बूढ़े तक सभी लोग एक हेल्थी सेहत के लिए खाते हैं।
हर कोई मखाने खाता है। डॉक्टर भी मखाने खाने की साले देते हैं। मखाना की खेती आपको बहुत फायदा दे सकती है। आपको जानकारी हो की मखाना की खेती देश में सबसे अधिक बिहार के कुछ जिलों में होती है। बिहार की सरकार (Bihar Govt) ने किसानों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से मखाना विकास योजना (Makhana Vikas Yojana) की शरुआत की है। इस योजना के तहत किसानों को 72,750 रुपये की सब्सिडी मुहैया कराई जाती है।
मखाना की पैदावार बिहार के 8 जिलों में सबसे अधिक होती है। बिहार सरकार कटिहार, दरभंगा, सुपौलस किशनगंज, पूर्णिया, सहरसा, अररिया, पश्चिम चंपारण जिले के किसानों को सब्सिडी दे रही है। ये सभी जिले मिथिलांचल क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। यह आजीविका का बहुत अच्छा साधन और व्यवसाय है।

मखाने की खेती करने में लागत कितनी होगी और मुनाफा कैसे निकालेंगे, इनके लिए हमने एक मखाना व्यापारी समीर कुमार से जानकारी ली। उनके मुताबिक़ एक हेक्टेयर में मखाना की खेती करने के लिए 97,000 रुपये की लागत आती है। इस पर किसानों को बिहार सर्कार की तरफ से अधिकतम 72,750 रुपये की सब्सिडी दी जाती है। सब्सिडी पाने के लिए इन 8 जिलों के किसान बिहार सरकार के लिए अप्लाई कर सकते हैं।
मखाने के बीज (Makhana Seeds) खरीदने में भी ज्यादा खर्च नहीं आता है। एक बार मखाने के बीज (Fox Nut seeds) लेने के बाद फिर कभी बीज लेने की जरुरत नहीं पढ़ती है। पिछली फसल के बचे हुए बीज से नए पौधे उगा दिए जाते हैं। इस खेती में अधिकतर खर्चा मजदूरी पर ही आता है।
इसमें पानी के ऊपर लगी फसलों की छंटाई करनी पढ़ती है। इस पूरी प्रक्रिया में मखाने की फसल के दाने को पहले भूना जाता है, उसके बाद फोड़ कर बाहर निकाला जाता है। फिर निकले हुए प्रोडक्ट को धूप में सुखाया जाता है। ऐसा करने से फसल पूरी तरह तैयार हो जाती है। मखाने का कच्चे फल भी बाजार में यह आसानी से बिक जाता है।

इस काम में मेहनत तो बहुत है और मजदूर भी लग जाते हैं। बिना मजदूरों की मदत से यह खेती संभव नहीं है। अगर कोई इस खेती में लागत लगता है, तो कुछ मजदूरों को काम भी मिल जाता है। फिर आप इससे अच्छा-खास पैसा भी कमा सकते है। बाजार में मखानो की डिमांड को देखते हुए किसान मखाना बेचकर कई गुना तक मुनाफा बना लिया करते हैं।
Across 38 districts of Bihar, #Purnea aka 'Mini Darjeeling' is well known for it's climate. Dear PM @narendramodi ji, you have visited Purnea a dozen times, we request you to preserve the farming of Fox Nut (Makhana) in our district. Can we have an MSP for Fox Nut too please.🙏 pic.twitter.com/0xGksTEKt3
— Sonu Nigam (@SonuNigamSingh) June 9, 2019
आपको बता दें की मखाना की खेती (Makhane ki Kheti) तालाब के अलावा एक से डेढ़ फीट गहरे खेत में भी की जा सकती है। इससे साल में लगभग 4 से 5 लाख रुपये की कमाई हो सकती है। मखाना निकालने के बाद लोकल मार्किट में इसके कंद और डंठल की भी अच्छी लीमत में बिकते है।
This is farming of MAKHANA in water logged fields ponds in Purnea Katihar area of Bihar pic.twitter.com/IKB6iv5i3b
— SR Choudhary (@vglpuri) June 14, 2021
अब किसान मछली पालन और मखाना उत्पादन (Makhana Production) भी एक साथ कर सकते हैं। यह एक ऐसा Business Idea है, जिसमे पानी में उगे फूल और पत्तों सा दिखने वाला मखाना पूरे साक के लगभग 4 से 5 लाख रुपये की इनकम करवा देगा।



