
Photo Credits: ShubhamCrafts.co.in
Jaipur: राजस्थान अपनी कला के लिए सब से ज्यादा मशहूर है। भारत का एकलौता राज्य राजस्थान (Rajasthan) है, जहाँ आज भी अपनी परंपरा और सभ्यता के लिए जाना जाता है। बहुत से राज्यो ने अपनी सभ्यता में थोड़ा सा आधुनिकता को अपना लिया है। परंतु राजस्थान में आज भी वही है जो पहले था। बदलाव् हुआ है बस इतना की लोगो ने स्मार्ट वर्क के साथ अपने रोजगार को बढ़ाया है।
राजस्थान हस्त कला के लिए बेहद मशहूर है, यहाँ पर हर चीज़ का उपयोग है। कपड़ो की कड़ाई बुनाई से लेकर मिटटी और चीनी मिट्टी के बर्तनों में भी अपने हाथों से डिज़ाइन डालते है। स्वादिष्ठ व्यजन तो इतने प्रसिद्ध है की लोग सिर्फ नाम से ही उनके स्वाद का अनुभव कर सकते है।
आज की इस पोस्ट में हम एक ऐसी कला के विषय में बात करेंगे, जिसका शायद अब नाम ही रह गया है। आधुनिक समय के हिसाब से चल रहे बॉक्स और न जाने क्या क्या ने पुराने समय के घास पेपर के बने सजावटी सामान को जैसे एक किनारे कर दिया।
आज की यह पोस्ट एक ऐसे जोड़े की है, जिसने विलुप्त होती कला को एक बार फिर जीवन दान दिया है। कहने को तो यह व्यापार है, परंतु एक संस्कृति भी है, जो वर्षो से चली आ रही है उसे लेकर आगे बढ़ना राजस्थान के साथ साथ पूरे भारत के लिए गौरव की बात है। तो आइए हम विस्तार से जानते है।
राजस्थान के जयपुर की कहानी
वैसे तो लोग अपनी पढ़ाई लिखाई ख़त्म करके अपने गांव और घर से दूर रहकर जॉब करना चाहते है और एक आधुनकि जीवन जीना चाहते है। परंतु जरुरी नहीं होता की हर कोई यही चाहे कुछ लोग अपनी पढ़ाई लिखाई खत्म करके अपनी जन्म भूमि को बेहतर बनाने के लिए कार्य करते है। इन्ही मे से एक है राजस्थान की राजधानी जयपुर (Jaipur) शहर के एक इंजीनियर जोड़ी पूर्णिमा और चिन्मय (Engineer Couple Chinmay Banthia and Purnima Singh)।
ये पेशे से इंजीनियर है और अभी अच्छे पैकेज में एक बड़ी सिटी में जॉब कर रहे थे। परंतु वे ज्यादा समय वहां जॉब नहीं कर सके और अपनी नौकरी छोड़ राजस्थान लौटे और यहाँ की कला पेपर और घास की टोकरियाँ बनाने की कला को अपना कर अपना व्यापार शुरू किया। उनकी इस शुरुआत ने आज राजस्थान के पांच गांवों की महिलाओं को रोजगार दिया और उन्हें आत्मनिर्भर बनाया।
मेक इन इंडिया के कांसेप्ट पर किया अपना व्यापार
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा 25 सितंबर, 2014 को मेक इन इंडिया (Make In India) की शुरुआत की। इस योजना के जरिये सरकार भारत में ज्यादा से ज्यादा पूँँजी और तकनीकी निवेश पाने की चाह रखती है।
इस योजना की शुरुआत होते ही भारत सरकार ने कई जगहों पर लगी FDI की सीमा में बढोत्तरी कर दी है, परंतु सामरिक क्षेत्रों में पूर्णरूप से विदेशी निवेश के लिए आदेश नहीं दिए जैसे अंतरिक्ष में 74 प्रतिशत, रक्षा 49 प्रतिशत और न्यूज मीडिया 26 प्रतिशत।
आज के समय में चाय बागान में एफडीआई के लिए कोई प्रतिबन्ध लागु नहीं है। इसी मेक इन इंडिया योजना से प्रेरित हुए जयपुर इंजीनियर जोड़े ने शिल्प क्षेत्र में सफलता हासिल की। पूर्णिमा सिंह और उनके पति चिन्मय बंथिया ने अपनी नौकरी छोड़ी और गांव में आकर अकुशल महिलाओं के साथ पपीयर माचे उत्पाद और घास की टोकरियाँ बनाने और बेचने का व्यापार प्रारम्भ किया। उनके संस्था का नाम शुभम क्राफ्ट्स है।
क्राफ्ट का है व्यापार
शुभम क्राफ्ट्स को उन्होंने 5 लाख रुपये की लागत के साथ प्रारम्भ किया था। और मात्र एक साल के भीतर उन्होंने 1 करोड़ रुपये का कारोबार कर लिया था। शुभम क्राफ्ट्स (Shubham Crafts) के मालिक पूर्णिमा और चिन्मय ने NIT संस्था से अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।
Purnima Singh's venture – ShubhamCrafts utilises organic waste to produce 1,000+ variety of Home Decor products. Aimed at reviving lost art of paper mache, she made sure to make her workforce (70% women) literate and financially & socially aware.#BeyondMobility#GreatIndiaDrive pic.twitter.com/S86Ou9kqzq
— Express Drives (@ExpressDrives) November 28, 2021
पूर्णिमा ने तीन वर्ष तक पेट्रोफैक इंजीनियरिंग सर्विसेज में जॉब की और चिन्मय ने म्यू-सिग्मा में काम किया और आज दोनों एक जुट होकर एक अलग ही तरह का काम कर रहे है और लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहे है।
राजस्थान के युवाओं में काफी उत्साह है
राजस्थान के जयपुर निवासी काफी सारे युवाओ में मेक इन इंडिया जैसी योजना के लिए काफी उत्साहित है। सभी युवा अपनी तरफ से कई तरह के प्रयास कर रहे है और अपने सपनो को साकार करने में लगे है। इसी तरह हर राज्य में ऐसी पहल होगी, तो एक दिन हमारा भारत सच में महान हो जाएगा।



