केवल 100 रु से अपना सफर शुरू किया था, आज 3500 करोड़ की कंपनी के मालिक, कई को रोजगार भी दिया

0
5201
Govind Dholakia Business Success
Diamond Stalwart Shri Govind Dholakia success story in Hindi. Shri Govind Dholakia, Founder and Chairman, Shree Ramkrishna Exports, Surat.

Photo Credits: Twitter

Surat: देश में ऐसे बहुत से लोग हैं, जिनकी पढाई लिखे आर्थिक तंगी और गरीबी के चलते पूरी नहीं हो पाती और बीच में ही छूट जाती है। तो क्या वे अब जीवन में कुछ नहीं कर सकते है, यह सवाल जरूर मन में आता है।

ऐसा नहीं है की एक असफलता से या पर्याप्त पैसों के अभाव से किसी का भविष्य ख़त्म हो गया। जीवन में करने को बहुत कुछ है। अगर मन में आहे पढ़ने की भावना और मेहनत करने का ज़स्बा है, तो बिना पड़े लिखे भी कई अच्छे काम किये जा सकते है।

यह एक ऐसे शख्स की कहानी (Story) हैं, जिन्हें आर्थिक तंगी की वजह से अच्छी शिक्षा नहीं हासिल हो पाई और न ही परिवार से कुछ मिल सका। बहुत ही कम खर्चे और सीमित संसाधनों में एक बड़े परिवार में रहना बहुत ही मुश्किलों भरा था। एक छोटे से कमरे में जहां वह अपने 23 मेंबर वाले बड़े परिवार के साथ गरीबी में पले और बड़े हुए और अपनी काबिलियत के दम पर आज देश के फेमस बिजनेसमेन की लिस्ट में शामिल हैं।

यह कहानी गोविंदभाई ढोलकिया (Story of Govind Dholakia) की है, जो गुजरात के अमरेली जिले में एक बहुत ही गरीब किसान परिवार में जन्मे बड़े सपने देखन वाले शख्स है। ढोलकिया के परिवार का मुख्य पेशा खेती किसानी रहा था। उनके अपने परिवार में कुल चार भाई और दो बहनें थी।

गरीबी ऐसी थी थी कि एक रोटी के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ जाएँ। गांव के पुराने छोटे से खपरे वाले मकान में ही पूरा परिवार आर्थिक तंगी में गुजर बसर कर रहा था। गरीबी और संघर्ष का यह दौर कई वर्षों तक ऐसे ही चलता रहा। फिर बिगड़ती आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने काम की तलाश शुरू की।

रोजगार खोजते हुए वे सूरत गए और एक कारीगर के यहाँ हीरा तराशने का काम सीखने लगे। उसी के यहाँ रहते, काम करते और खाने को जो कुछ मिलता, उसी से अपनी भूख शांत कर लेते।फिर भी इन्होंने अपनी हिम्मत बंधे रखी। वहां पर अलगभग 6 महीनों तक काम सीखने के बाद उन्हें पहली नौकरी मिल गई। लेकिन उनका पहला वेतन केवल 103 रुपये मही का था।

अब इतनी कम सैलरी मिलने के बाद भी वे खुद के खर्चे कम करके अपने छोटे भाई को उसकी जेब खर्च के लिए पैसे भेजा करते थे। कई सालों तक इन्होंने दूसरों के यहाँ काम करते हुए योग्यता और एक्सपीरियन्स हासिल किया और फिर अपनी खुद की एक दुकान खोलने की प्लानिंग करने लगे।

साल 1970 को 12 मार्च में उन्होंने 5000 रुपये की लागत के लगाकर अपना कारखाना शुरू किया। केवल 7 सालों में, उनकी फैक्ट्री तेजी से बढ़ी। गोविंदभाई ने एक पत्रकार को बताया था कि साल 1977 में जब उनकी मुलाकात मुंबई के डी नवचंद्र कंपनी की शांतिभाई और नवनिभाई मेहता से हुई, जिन्हें वे फॉलो किया करते थे, इन्होने ही उन्हें मार्गदर्शन दिया। उनकी सहायता से गोविंदभाई बिना की दलाल की मदत के अपना कारोबार करने लगे। इसका रिजल्ट यह रहा की अगले चार महीनों में ही इन्हें 9 लाख रुपये का फायदा हुआ।

बस फिर क्या था, गोविंदभाई ने सफलता (Govind Dholakia Success) की मंजिल की सीढ़ियां चढ़नी शुरू कर दी। आज उनकी हीरे का कारोबार करने वाली कंपनी श्रीरामकृष्ण एक्सपोर्ट्स (Shree Ramkrishna Exports) का सालाना टर्नओवर 3500 करोड़ के पार पहुँच गया है। मात्र 100 रुपये महीना चलाने वाले गोविंदभाई आज हज़ारों करोड़ का व्यापार कर रहे हैं। यह सफलता हमें और आपको लगन के साथ मेहनत करना और जीवन में पॉजिटिव बने रहना सिखाती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here