
Delhi: भारत के लोगों के लिए तो सबसे पसंदीदा व्यंजनों में से एक राजमा चावल (Rajma Chawal) है। एक प्लेट गर्म गर्म राजमा चावल खाने से हो सकता है, पेट भर जाए परंतु संतुष्टी नहीं होती है। राजमा का स्वाद एसा होता है कि इसे खाने के बाद पलभर में आपकी मनोदशा अच्छी हो जाती है।
परंतु राजमा जिको लोग किडनी बीन्स (Rajma Called Kidney Beans) भी कहते हैं, केवल स्वाद में ही शानदार नहीं होता, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद है। राजमा (Rajma) में प्रोटीन की मात्रा बहुत अधिक होती है और यह वजन कम करने में भी सहायता करती है। इतना ही नहीं, राजमा कैंसर (Cancer) जैसी जानलेवा बीमारी से भी बचा सकता है।
इतने अधिक लाभों वाले राजमा को खाना तो बनता है। आज हम चर्चा करने वाले हैं, दिल्ली की आशा गुप्ता (Rajma Rice) के विषय में। जिन्होंने कठिनाइयों में भी अपने हौसलें को बुलंद रखा। 36 साल की आशा को देखने से कोई नहीं कह सकता है कि, इस हंसनुमा चेहरे के पीछे बेइंतहा दर्द छिपा होगा।
कौन है आशा गुप्ता
आशा गुप्ता (Asha Gupta) दिल्ली (Delhi) की निवासी है। वह शास्त्री नगर में हर दिन एक मोपेड पर राजमा चावल विक्रय करती हैं। उनके दो बच्चे हैं और एक दिव्यांग पति, जिनके भरण-पोषण के लिए वो अकेले ही सारा कार्य करती हैं।
कुछ महीनों पूर्व उनके पास दो वक़्त की रोटी की भी व्यवस्था नहीं थी, परन्तु आज के समय में वो ना केवल दूसरों को पेटभर खाना खिलाकर अपना परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं, बल्कि ‘मोपेड वाली राजमा चावल दीदी’ (Moped Waali Rajma Chawal Didi) नाम से लोकप्रिय हो गई हैं।
आशा का कहना है कि, कुछ वर्ष पूर्व एक दुर्घटना में उनके पति के दोनों पैर चले गए। उसके पश्चात से वो सारे कार्य के लिए उन पर ही निर्भर रहने लगे। घर पर दो बच्चे भी थे। पूरे परिवार का उत्तरदायित्व अब आशा के ही कंधों पर थी। ऐसे में आशा ने एक स्थानीय थोक विक्रेता से ख़रीदकर विभिन्न विभिन्न सहभागियों के सामग्री साप्ताहिक बाज़ार में विक्रय प्रारंभ किया।
वो किसी प्रकार से अपना घर खर्च चला रही थीं, लेकिन महामारी के कारण लगे लॉकडाउन ने उनके इस काम पर भी रोक लगा दिया। आशा के पास तकरीबन पांच-छह महीने तक आमदनी का कोई साधन नहीं था। उनके पास इतने पेसे नहीं थे कि वो कोई बड़ा निवेश कर पाएं। साथ ही, परिवार का उत्तरदायित्व के चलते वो कोई बड़ा जोखिम भी नहीं लेना चाहती थीं।
ऐसे में आशा ने घर के निकट ही एक फ़ूड स्टॉल (Food Stall) लगाने का फ़ैसला किया। इसके लिए उन्होंने अपने पति की मोपेड का उपयोग किया। 2 सितंबर और रुपये महज़ 2,500, आशा ने मोपेड से ही अपने इस फ़ूड स्टॉल को प्रारंभ कर दिया।
राजमा चावल, कढ़ी पकौड़ा, मटर पनीर और चावल, आदि प्रारंभ में उन्होंने भरत नगर में ये सारी चीज़ें बेचना प्रारंभ किया। हालांकि, यहां उन्हें अधिक ग्राहक नहीं मिले, जिसके पश्चात वो शास्त्री नगर में अपना स्टॉल लगाने लगीं।
Vloggers की मदद से आशा को मिला नया जीवन
गोल्डी सिंह (Goldi Singh) , दिल्ली के फ़ेमस YouTuber हैं। उन्होंने अपने एक मित्र के साथ मिलकर आशा की सहायता करने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि आशा को देखने से उन्हें लगा कि वो इससे शानदार प्रदर्शन कर सकती हैं।
ऐसे में उन्होंने उनकी मोपेड को एक फ़ूड स्टॉल में ट्रांसफ़ॉर्म करने का निर्णय लिया। उन्होंने 30 हज़ार रुपये निवेश कर के सामान्य सी मोपेड को एक मिनी स्टॉल में तब्दील कर दिया। ‘मोपेड वाली राजमा चावल दीदी’ नाम भी गोल्डी सिंह ने ही उन्हें दिया।
मांग बढ़ी तो मेन्यू में भी लाईं बदलाव
आशा को अब बहुत से लोग जानते हैं। वो 20 रुपये में छोटी प्लेट तो 30 और 50 रुपये में मीडियम और बडी प्लेट परोसने लगी हैं। पहले उनके मेन्यू में रोटी सम्मिलित नहीं थी, लेकिन रोटी की मांग को देखते हुए अब उन्होंने इसे भी शामिल कर लिया है। अब उनके स्टॉल पर 30 रुपये में सूखी सब्ज़ी के साथ चार रोटियां मिलती हैं। रायते के लिए वो अलग से 10 रुपये चार्ज करती हैं।
घर की भी जिम्मेदारी है आशा गुप्ता के कंधों पर
आशा अपने स्टॉल के साथ ही घर की भी सभी उत्तरदायित्व निभाती हैं। इसके लिए उन्हें प्रातः 5 बजे उठना पड़ता है। रोजाना वो सुबह 11 से शाम 4 बजे तक अपना स्टॉल चलाती हैं। भले ही वो अभी इतना आमदनी नहीं कमा पाती हों, जिससे उनके परिवार की सारा उत्तरदायित्व पूरा हो सके, फिर भी आशा ख़ुश हैं। वो कहती हैं, ‘मैंने प्रारंभ कर दी है, मुझे यक़ीन है कि मैं कामयाब होंगी।’ आज वे पाने जीवन में आगे बढ़ रही है और खूब मेहनत कर रही हैं।



