
Jaipur: मेक इन इंडिया अपने चरम दौर से गुजर रहा है। हर व्यक्ति इससे प्रभावित होकर इस योजना को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दे रहा है। ताकि देश की तरक्कि हो और हमारी निर्भरता दूसरे देशों में कम हो। हम भी विकसित देशों की लिस्ट में शामिल हो पाये इसी का सपना लेकर हर भारतीय नागरिक इस मेक इन इंडिया के प्लान को आगे बढ़ाने में लगा हुआ है।
इसी से प्रभाबित होकर राजस्थान (Rajasthan) राज्य में जयपुर (Jaipur) के एक जोड़े ने शिल्प क्षेत्र में अपनी नई पहचान बना ली। इस इंजीनियर जोड़ी ने अपनी सिक्योर कार्पोरेट की नौकरी को छोड़कर क्राफ्ट का बिजनेस शुरू किया।
इंजीनियर जोड़े ने शुरू किया क्राफ्ट बिजनेस
आपको बता दे कि इस इंजीनियर जोड़े में महिला का नाम पूर्णिमा (Purnima Singh) और पुरूष का नाम चिन्मय (Chinmay Banthia) है। यह जयपुर के बांठिया गॉंव में रहते है। इन्होंने गॉंव में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए शुभम क्राफ्ट नाम से अपना व्यवसाय शुरू किया। इनका बिजनेस कुछ ही समय में ऊँचाइयों के शिखर पर पहुँच गया और आज की बात की जाये तो कागज की लुग्दी और घास की टोकरी का उनका व्यवसाय पूरे देश में फैमस हो चुका है।
शुभम क्राफ्ट पुरियर माच से बनाते है प्रोडक्ट
पेपियर माच के नाम से कागज की लुग्दी को जाना जाता है। इसे सॉंचे मे डालकर बक्स आदि को बनाया जाता है। आपको बता दे इस जोड़े ने शुभम क्राफ्ट बिजनेस को 5 लाख रूपये का निवेश करके प्रारंभ किया था। अभी की बता कि जाये तो इस बिजनेस के जरिए इस इंजीनियर जोड़े को 1 करोड़ रूपये का मुनाफा प्राप्त हो चुका है।
अपनी सिक्योर नौकरी छोड़ किया बिजनेस शुरू
शुभम क्राफ्ट (Shubham Crafts) के मालिक पूर्णिमा और चिन्मय है। जिन्होंने एनआईटी कुरूक्षेत्र से स्नातक में इंजीनियरिंग कंपलीट की है। पूर्णिमा ने पेट्रोफैक सर्विसेज के लिए 3 साल तक काम किया है। वहीं चिन्मय जी ने मु सिग्मा में काम किया है। परन्तु यह दोनों ही समाज की महिलाओ ओर कुछ पिछड़े वर्गों के लिए काम करना चाहते थे। इसलिए इस युगल ने पैपियर माचे से बने हैंडक्राफ्ट को शुरू करने का डिसिजन लिया।
ट्रेनिंग के साथ रोजगार भी दिया जाता है
इस क्राफ्ट बिजनेस को शुरू करने का उनका एजेंडा क्लीयर था वह चाहते थे कि गॉंव के कमजोर वर्ग और महिलाओं को वह क्राफ्ट में ट्रेनिंग दे सके। आपको बता दे शुभम क्राफ्ट में पहले लोगों को ट्रेनिंग दी जाती है उसके बाद उन्हें प्रोडक्शन टीम में रख लिया जाता है। इसका सीधा मतलब यह है कि इस बिजनेस के जरिए यह दंपत्ति लोगों को कौशल सिखाने के साथ साथ रोजगार भी मुहैया कराना चाहता है। जोकि सराहनीय कदम है।
जयपुर की पहचान को किया पुर्नजीवित
पूर्णिमा अपने इस बिजनेस के बारे में जानकारी देते हुए कहती है, कि पैपियर माच उत्पादन आर्ट का एक महत्वपूर्ण भाग है। उनके इस बिजनेस में इस पेपर क्राफ्ट को गॉंव की महिलाओं द्वारा फिर से जीवित कर नये रूप में पेश किया गया है।
वह कहती है कि यह क्राफ्ट तो जयपुर की पहले से पहचान थी। इस कार्य के जारिए गॉंव के लोगों को खोए हुए कौशल को पुन: याद करने में सहायता मिल रही है। आपको बता दे कि शुभम क्राफ्ट में जो उत्पाद बनाये जाते है उनमें से नेचुरल घास से बनाई जाने वाली टोकरी, धातु और प्लास्टिक से बने उपकरण का दूसरा बिकल्प है।
महिलाओं को सशक्त बनने में दिया योगदान
शुभम क्राफ्ट का बिजनेस सिर्फ 3 महिलाओं के जरिए प्रारंभ किया गया था। आज की बात की जाये तो इस बिजनेस में 5 गॉंव की महिला शामिल हो चुकी है। 5 गॉंव से 35 महिलाऍं इस व्यवसाय से जुड़ गई है।
इस व्यवसाय में बने उत्पादों को सीधे ही बिग साइज रिटेल चैन थोक विक्रेता को बेचा जाता है। इस बिजनेस से महिलाऍं सशक्त बनी है। वही अपने कौशल से वह आत्मविश्वास से परिपूर्ण दिखती है। इस के जरिए वह आर्थिक रूप से भी इंडेपेंडेन्ट हो गई है।
1 करोड़ का टर्नओवर वाली कंपनी अब विदेश से भी है कारोबार
आज की बात करें तो शुभम क्राफ्ट 1 करोड़ के टर्नओवर वाले व्यवसाय के तौर पर ऊभर कर सामने आया है। इस कंपनी का अब दावा हे कि वह यूरोप और अमेरिका जैसे बड़े देश के द्वारा पसंद करने वाले उपयोगी उत्पादों का आधे मिलियन टन उत्पादन के कचरे को नये रूप मे यह परिवर्तित कर सकते है।
यह जोड़ा जानकारी देते हुए बताता है, कि उनके कंपनी के प्रोडक्ट को लोग काफी पसंद करते है। अभी हाल की बात की जाये तो शुभम क्राफ्ट कनाडा, यूरोप, अमेरिका, न्यूजीलैंण्ड, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया इन सभी बड़े देशों के साथ कारोबार कर रहा है।
पूर्णिमा जी कहती है इस बिजनेस से उनकी सबसे बड़ी जीत यही है, कि वह महिलाओं को घर की गॉंव की चार दीवारी से बाहर निकालने में सफल हुए है। यही उनका लक्ष्य था। वह कहते है कि उनकी सफलता यही है कि वह महिलाओं की मानसिकता को बदलने में सफल हो पाये। हालांकि ऐसा नहीं है कि इस इंजीनियर जोड़े को इस बिजनेस को शुरू करने में परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ा।
प्रारंभ में कई परेशानियों का करना पड़ा था सामना
प्रारंभ में इन्हें इस बिजनेस को शुरू करने में काफी समय लग गया था। क्योंकि बिजली कनेक्शन में इन्हें 3 महीने का लम्बा वक्त लगा। वही उसके बाद कच्चे माल को जुटाने में भी इन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी। क्योंकि अपशिष्ट और कच्चा माल काफी महंगा था। इन कई परेशानियों को झेलते हुए वह अपनी आपूर्ति करने में सफल रहे। और आज उनके बिजनेस ने ऐसी रफ्तार पकड़ी की देश् के साथ् साथ यह विदेश में भी पहचान बनने में सफल हो गये।
700 विभिन्न शैलियों का होता है प्रदर्शन
आपको बता दे कि शुभम क्राफ्ट की प्रदर्शिनी हमेशा लगी होती है। इस प्रदर्शनी में 700 अलग अलग तरह की शैलियों को प्रदर्शित किया जाता है। शुभम क्राफ्ट सिर्फ कागज की लुग्दी ही नहीं बल्कि पत्थरों की नक्काशी साथ ही कस्टमर की मॉंग के अनुसार टेराकोटा का इस्तेमाल करके भी प्रोडक्ट बनाता है।
Purnima Singh's venture – ShubhamCrafts utilises organic waste to produce 1,000+ variety of Home Decor products. Aimed at reviving lost art of paper mache, she made sure to make her workforce (70% women) literate and financially & socially aware.#BeyondMobility#GreatIndiaDrive pic.twitter.com/S86Ou9kqzq
— Express Drives (@ExpressDrives) November 28, 2021
इन्होंने पराली का इस्तेमाल करके घास की टोकरियॉं भी बनाई है। पराली का का नाम हम सभी ने सुना है। हरियाणा और पंजाब में इसी पराली के जलाये जाने की वजह से दिल्ली में वायु प्रदूषण और लोग्रों को घुटन का सामना करना पड़ता है। ऐसे में शुभम क्राफ्ट के द्वारा इसका इस्तेमाल किया जाना बहुत ही सराहनीय कदम माना जा सकता है।
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— Ashok Kumar Sharma (@AshokKu07199481) October 19, 2020
हम आशा करते है कि शुभम क्राफ्ट इसी तरह महिलाओं को आगे बढा़ने उन्हें सशक्त बनाने में अपना योगदान देता रहेगा। जिससे ग्रामीण महिलाओं को आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी। यह टीम इसी तरह से काम करती रहे है ओर इनका वृद्धि, कौशल बढ़ाने और प्रोडक्शन को और भी बड़े स्केल में बढा़ने का लक्ष्य पूरा हो। बस यही हमारी कामना है। शुभम क्राफ्ट के मालिक पूर्णिमा और चिन्मय को उनकी सफलता पर बधाई देते है।



