अपनी काबिलियत से आंवले की खेती करके ऑटो ड्राइवर बना करोड़पति: Amla Ki Kheti Se Earning

0
1205
Amla ki Kheti
Amla ki kheti kaise kare. An Auto wala now doing gooseberry farming and earning money. Auto Driver Amar Singh Became an Amla Farmer and Now Earns in Lakhs.

Saman village, Bharatpur: मेहनत और धैर्य से हर काम मे सफलता मिल सकती है, आपको हौसला बनाये रखना है आगे बढ़ते चले जाना है। मंजिल कठिन जरूर होगी लेकिन कामयाबी भी जरूर मिलेगी। 57 साल के अमर सिंह (Amar Singh) उन तमाम किसानों के लिए प्रेरणा दायक (Inspiration) हैं, जो धान-गेहूं से अलग हटकर बागवानी के माध्यम पैसे कमाने की सोच रखते हैं।

अमर सिंह के काम और मेहनत को देखकर उनकी सफलता के किस्से आस-पास के क्षेत्रों में सुनाए जाते हैं, कि किस तरह एक ऑटो ड्राइवर करोड़पति बन गया। 1200 रुपये के 60 पौधे लगा कर कोई कैसे करोड़पति बन सकता है, ये बात सुनकर आश्चर्य तो होता है, लेकिन इसका जीता जागता उदाहरण हैं, राजस्थान के अमर सिंह।

राजस्थान के एक ऑटो ड्राइवर किसान (Auto Driver Farmer) ने सिर्फ 1200 रुपयों से आंवला के 60 पौधे लगाये थे, आज उन्हीं पेड़ों से वह 26 लाख का टर्नओवर कमा रहे हैं। इन पेड़ों को बड़ा होने में लगभग 22 साल लग गए, लेकिन उनकी मेहनत ने आज सबको हैरान कर दिया।

गांव में किसान खेती तो करता है, लेकिन तमाम दिक्कतों के कारण वो सफल नही हो पाता। दिक्कतो को देख वे अपना फैसला बदल देता है। कोई भी किसान 22 साल तक इन्तेजार नही कर सख्ता था, लेकिन 57 साल के अमर सिंह (From Saman village of Bharatpur district of Rajasthan) उन तमाम किसानों के लिए प्रेरणादायक हैं, जो अपनी खेती से निराश हो जाते है।

जो किसान धान-गेहूं से अलग हटकर बागवानी के माध्यम पैसे कमाने की चाहत रखते वो अमर सिंह से सिख ले सकते है। अमर सिंह की हेल्प करने वाले ल्यूपिन ह्यूमन वेलफेयर ऐंड रिसर्च फाउंडेशन के एग्जिक्युटिव डायरेक्टर सीताराम गुप्ता बताते हैं, कि अमर सिंह की बदौलत आज उनके आस-पास के कुछ लोगों को रोजगार का सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ है और महिलाएं भी उनके इस काम के माध्यम से खुद को सशक्त बना रही हैं।

रिसर्च फाउंडेशन के एग्जिक्युटिव डायरेक्टर का कहना हैं कि हमें अमर सिंह जैसे मेहनती किसानों की आवश्यकता है। अमर सिंह के सफल किसान बनने की कहानी (Amar Singh Amla Farmer Story) सबसे अलग है। जो सभी जे लिए प्रेरणा से भरी है।

अमर सिंह के पिता वृंदावन सिंह का निधन 1977 में हो गया था और इस वजह से उन्हें अपनी पढ़ाई वही रोकनी पड़ी। उस समय उनके दो भाई और एक बहन बहुत छोटे थे। जिसके चलते घर चलाने का सारा जिम्मा उनके कंधों पर आ गई थी।

अमर सिंह का पैतृक पेशा किसानी का था और वह इसी के माध्यम अपना व अपने घरवालों का पालन पोषण करते थे। लेकिन आगे जरूरत बढ़ती चली जा रही थी और आमदनी कुछ खास नही हो रही थी। उस समय खेती से भी कुछ ज्यादा कमाई नही हो रही थी। बस घर के लिए खाने भर का अनाज इतना ही पैदा हो जाता था।

इस कारण से अमर सिंह का मन खेती से दूर होने लगा। फिर उन्होंने कुछ और व्यपार करने का सोचा जिससे परिवार की जरूरत पूरी कर सके। इसीलिए उन्होंने ऑटो चलाना स्टार्ट कर दिया। उसमे भी कुछ अच्छी कमाई नही हो पा रही थी। इसमें भी उनका मन नहीं लगा और 1985 में वह अपने ससुराल के एक परिजन के यहां गुजरात में अहमदाबाद पहुंच गए।

वहां पर मणिनगर में उन्होंने रिश्तेदार की हेल्प से ही एक फोटो स्टूडियो खोला। उसमे भी सफलता (Success) नही मिली। लेकिन उन्होंने हार नही मानी अपने होसलो को मजबूत बनाते हुये आगे बढ़ते चले गये। वहीं रास्ते में केके दिन सड़क पर उन्हें अखबार का एक टुकड़ा मिला था, जिसमें आंवले की खेती (Amla ki kheti) के बारे में इन्फॉर्मेशन दी गई थी।

वह अखवार के उस आर्टिकल से इतने इंप्रेस हुए और उन्होंने मन मे विचार बना लिया की वह अब आंवले की ही खेती (Gooseberry farming) करेंगे। उन्होंने 2 एकड़ जमीन पर आंवले के 60 पौधे बोए। उनकी मेहनत और धैर्य के चलते खेती ने उन्हें करोड़पति बना दिया। उन्हीं बोए हुए पौधों का परिणाम है कि आज उनकी गिनती करोड़पति किसानों (Millionaire Farmer) में होने लगी।

आमला भारत में बहुत इस्तेमाल होता है। इस का स्वाद खट्टाऔर बाद में मिठा होता है। यह बहुत ही पौष्टीक फल है, vitamin C का यह बहुत ही अच्छा स्त्रोत है। आमला का औषधि में भी उपयोग होता है। अगर किसान अपने खेत की सरहद पर चारो और आमला का वृक्ष (Amla Tree) उगाये, तो यह अच्छी आमदनी का स्त्रोत बन सकता है। आमला के पाबे उत्पाद जैसे की जाम, अचार और पावडर की बहुत मांग है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here