
Sitamadhi, Bihar: एक ऐसा भी समय था जब लोगो को मजबूरी में खेती करतें थे। कुछ लोग रोजी-रोटी चलाने के लिये शहरों की ओर निकल पड़ते थे। जो गांव में बच गए। वे कृषि से जुड़ जातें थे। लेकिन कहते है, न समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता। यह हमेशा बदलता रहता है। पहले लोग अपना जीवन जीने के लिए खेती करते थे।
वहीं आज खेती एक व्यवसाय का रूप ले लिया है। कृषि से संबंधित रोज नये-नये रोजगार उभर कर सामने आ रहें हैं। कहना ग़लत नहीं होगा कि खेती देश के युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। एक तरफ जहां पुरूष खेतीबारी के काम में लगातार आगे आ रहें है। साथ ही सफलता का स्वाद चख रहें हैं।
वहीं दूसरी तरफ देश की महिलाएं भी किसी काम में पीछे नहीं हैं। नये दौर में महिलाएं भी पुरुषों से कंधा से कंधा मिलाकर चल ने को तैयार हैं। महिलाएं पुरूषो से किसी भी मामले में पीछे नहीं है। इस बात को फिर से साबित कर दिखाया हैं अनुपम कुमारी ने।
अनुपम ने ग्रेजुएशन तक पढ़ाई पूरी की
अनुपम कुमारी (Anupam Kumari) बिहार राज्य के सितामढ़ी (Sitamadhi) जिले मे रहने वाली हैं। अनुपम ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की हैं। इनके पिताजी खेती का काम करतें थे। साथ ही वह शिक्षक का भी काम करतें थे। शिक्षक और किसान दोनों का काम करने के बाद भी उनकी अच्छी कमाई नहीं हो पा रहीं थी। इसलिए अनुपम के पिताजी ने शिक्षक की नौकरी छोड़ने का फैसला किया।
इसके बाद वह खेती (Farming) में सारा समय देने लगे। अनुपम ने स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने पिताजी के साथ मिलकर पारंपरिक तरीके से खेती न कर के वैज्ञानिक तरीके से कुछ अच्छा ओर न्यू करने का विचार किया। वैज्ञानिक तरीके से खेती कैसे किया जाता है इसके बारें में उनको जानकारी बिल्कुल भी नहीं थी।
पिता के साथ कृषि अनुसंधान केंद्र गईं
वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के लिये अनुपम अपने पिता के साथ कृषि अनुसंधान केंद्र गईं। अनुपम ने मशरूम (Mushroom) की खेती और केंचुआ खाद के उत्पादन कैसे किया जाये, इन दोनों विषयों पर गहन पढाई की। इसके अलावा उन्होंने खेती के अलग-अलग विधियों के बारें में जानने और सीखने के लिये पटना (Patna), सितामढ़ी (Sitamadhi) तथा दिल्ली (Delhi) के भिन्न-भिन्न शिक्षड संस्थाओं में जाकर इसका प्रशिक्षण भी लिया।
Success Story of Anupam Kumari. Anupam Kumari khown as Mushroom Girl for unique farming. pic.twitter.com/tP8BWMIwgR
— sanatanpath (@sanatanpath) August 28, 2021
अनुपम कुमारी (Anupam Kumari) ने अपना प्रशिक्षण पूरा कर गांव लौटने पर मशरुम की खेती करने पर विचार किया। अनुपम मशरुम की खेती (Mashroom Farming) की शुरुआत 500 वर्ग फुट के खेत में सिर्फ 500 रुपये से की। हालांकि गांव में इसके पहले किसी ने मशरुम की खेती बिल्कुल भी नहीं की थी।
मशरुम की खेती (Mushroom Farming) को गांव के लोग गोबरचट्टा कहते
इन्सान अगर किसी अच्छे और नये काम की शुरुआत करना चाहता है, तो उसके हौसले को बढ़ाना चाहिए ना कि उसके मनोबल को ओर घटाना चाहिए। लेकिन अनुपम को उनके गांव के लोगों के द्वारा हौसला अफजाई ना कर उनको बहुत ज्यादा निराश किया जाता था। मशरुम की खेती (Mushroom Ki Kheti) को गांव के लोग गोबरचट्टा कहते थे। वह अनुपम को जब भी खेती करतें देखते, कहतें थे, गोबरचट्टा उगा रही है।
किसी ने सही कहा है, “अगर अपने लक्ष्य तक पहुचना है तो उसे दूसरों की नाकारात्मक बातों को पूरी तरह नजरअंदाज करना पड़ता हैं। इन्सान अगर दूसरों की निगेटिव बातों पर गौर करने लगेगा, तो सफलता उसे कभी भी हासिल नहीं होगी।” अनुपम भी इसी रास्ते पर चल निकली और गांव के लोगों की बातों को हमेशा अनदेखा करती रही।
अनुपम की मेहनत ने अपना असर दिखाना
अगर मेहनत सच्चे मन पूरी लगन और सच्ची निष्ठा से किया जाये तो कामयाबी पूरी तरह कदम चूमती है। अनुपम की मेहनत ने अपना असर दिखाना चालू किया। अनुपम को मशरुम की खेती (Mushroom Farming) करने के 3 महीने में उन्हें 10 हजार रुपये की आमदनी हुईं।
सीतामढ़ी की बेटी मशरूम गर्ल अनुपम कुमारी शामिल हुई देश की सर्वश्रेष्ठ किसानों में । लोगों ने खूब मज़ाक उड़ाया, आज केंचुआ खाद की मदद से हर महीने 20 क्विन्टल से भी अधिक मशरूम उगाती है। pic.twitter.com/cxMfngYTzF
— sanatanpath (@sanatanpath) August 28, 2021
अनुपम कुमारी खुद से ही वर्मी कंपोस्ट भी बनाने लगी। इसको बनाने के लिये वह गेहूं के भुसे और फुस का उपयोग करती हैं। अनुपम किसानों को वर्मी कंपोस्ट बनाने की विधि भी बताने लगी हैं। वर्तमान में प्रत्येक 3 महीने में 50 क्विंटल मशरुम का विक्रय होता है। मशरुम की बिक्री (Mushroom Selling) से अनुपम को अच्छी आमदनी (Good Income) भी हो रही हैं।
अनुपम (Anupam) की सफलता से प्रेरणा लेकर गांव की लगभग सभी महिलाएं उनसे इस खेती के गुण सिख रही हैं। मशरुम की खेती और केंचुआ खाद उत्पादन के साथ-साथ अनुपम ने मछली पालन तथा गार्डेनिंग का कार्य भी शुरु किया हैं। गांव की महिलाओं के लिये ही नहीं, बल्कि नयी युवा पिढ़ी के लिये भी अनुपम एक प्रेरणास्त्रोत बन गईं हैं।



