सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई का नाम सबसे अमीर मंदिरों में शामिल, क्या चढ़ता है चढ़ावा? जानिए

0
1275
Siddhivinayak Temple News
Shri Siddhi Vinayak Ganpati Mandir Is The Richest Temple in Mumbai. Amazing facts about Shree Siddhivinayak Temple that you should know: Ek Number News

Mumbai: भगवान श्रीगणेश का मंदिर सिद्धिविनायक मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है, मुंबई के सबसे विशाल और सबसे समृद्ध मंदिरों में से एक माना जाता है। भगवान श्रीगणेश जी की जिन मूर्तिओ की सूड़ दाईं ओर मुड़ी होती है, वे सिद्घपीठ से जुड़ी होती हैं और उनके मंदिर सिद्धिविनायक मंदिर नाम से प्रसिद्ध होते हैं। सिद्धिविनायक भगवान गणेश जी का सबसे लोकप्रिय रूप है। हर वर्ष लाखों की तादात में भक्तगणऔर पर्यटक यहां दर्शन के लिए आते हैं।

जानकारी के मुताविक यहां प्रतिदिन लगभग 25 हजार से लेकर 2 लाख रुपए तक का चढ़ावा चढ़ाया जाता है। यहां पर काले पत्थर पर बने हुए भगवान गणेश जी की प्रतिमा पर सबसे अधिक दान चढ़ाया जाता है। जो लगभग 200 साल पुरानी प्रथा चल रही है। मंदिर की सलाना कमाई 48 करोड़ रुपए से 125 करोड़ रुपए के बीच आंकी जाती है।

मुंबई के प्रभादेवी क्षेत्र में स्थित इस मंदिर का निर्माण 19 नवंबर 1801 में किया गया था। मौजूद समय में सिद्धिविनायक मंदिर 5 मंजिला बिल्डिंग है। जहां गणेश संग्रहालय से लेकर प्रवचन ग्रह, गणेश विद्यापीठ के अतिरिक्त दूसरी मंजिल पर गरीब के बिना किसी शुल्क के लिए अस्पताल भी है। इस मंजिल पर खाना की रसोईघर भी है। जहां से Lift सीधे गर्भग्रह में आती है।

गणपति पूजन अर्चना के लिए प्रसाद और लड्डू इसी मार्ग से लाया जाता है। यहां स्थापित गणेश की मूर्ति भी विशिष्ट है। भव्य सिंहासन पर स्थापित ढाई फुट ऊंची और दो फुट चौड़ी मूर्ति एक ही काले पत्थर से गढ़ी गई है।

उनकी चार भुजा है जिनमे से एक में कमल, दूसरे में फरसा, तीसरे में जपमाला और चौथे में मोदक लिए हुए है। बाएं कंधे से होते हुए उदर पर लिपटा सांप है। माथे पर एक आंख उसी प्रकार से है, जैसे शिवशंकर की तीसरी आंख होती है। प्रतिमा के एक तरफ रिद्धि व दूसरी तरफ सिद्धि की मूर्ति है।

मंदिर परिसर में लकड़ी के दरवाजे पर अष्टविनायक को प्रतिबिंबित किया गया है। मंदिर के भीतर सोने के लेप से सजी छतें हैं। लोगो की मान्यता है कि जब सृष्टि की रचना करते वक्त भगवान विष्णु को नींद आ गई, तब भगवान विष्णु के कानों से दो दैत्य मधु व कैटभ बाहर आ गए।

ये दोनों दैत्यों बाहर निकलते ही उत्पात मचाने लगे और देवताओं को बाधा पहुँचने लगे। दैत्यों के आंतक से छुड़करा पाने हेतु देवताओं ने श्रीविष्णु की शरण ली। तब भगवान विष्णु शयन से जागे और दैत्यों को मारने का प्रयास किया लेकिन वह इस कार्य में सफल नही हुए।

तब भगवान विष्णु ने श्री गणेश का आह्वान किया, जिससे गणेश जी खुश हुए और दैत्यों को मुक्ति दिला दी। इस काम के उपरांत भगवान विष्णु ने पर्वत के शिखर पर मंदिर बनबाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की। तभी से यह जगह सिद्धटेक के नाम से प्रसिद्ध है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here