अनोखे मंदिर की रखवाली करने वाला मगरमच्छ शाकाहारी है, खाता है मंदिर का प्रसाद

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Meet Babiya, Kerala's 'vegetarian' crocodile who lives in a temple pond and loves rice. The Sri Anandapadmanabha Swamy temple in Kasaragod claims that she eats only the prasadam that is fed to her by an employee twice a day.

File Photo Credits Twitter

Chennai: इस अनोखे मंदिर की रखवाली करने वाला मगरमच्छ शाकाहारी है, खाता है मंदिर का प्रसाद चावल और गुड अभी तक यही पता है सभी को की मगरमच्छ मांसाहारी जीव होते है। लेकिन केरल के एक मंदिर के झील में ऐसा भी मगरमच्छ है, जिसे लेकर पुजारियों का कहना है कि वह पूरी तरह से शाकाहारी है और मंदिर की रखवाली करता है।

इसका नाम बाबिया (Babiya Vegetarian Crocodile) है। यह कासरगोड जिले में अनंतपुर के एक मंदिर की झील में रहता है। ये जिस मंदिर की निगरानी करते हैं वह केरल का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जो झील के बीच में बना है। मंदिर को पद्मनाभस्वामी मंदिर (तिरुवनंतपुरम) (Padmanabha Swamy Temple) का मूलस्थान माना जाता है। कहते हैं कि यह वही स्थान है, जहां अनंतपद्मनाभा की स्थापना हुई थी। यहां काफी लंबे समय से एक मगरमच्छ देखा जाता है।

वह झील में नहाने के दौरान श्रद्धालुओं को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाता। यहां तक कि पानी में मछलियों को भी नहीं खाता। बाबिया, सिर्फ चावल और गुड़ से बना दलिया ही खाता है। यहां आने वाले भक्त उसे खाना खिलाते हैं। जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि मगरमच्छ शाकाहारी है और किसी को भी हानि नहीं पहुंचाता है।

अभी तक इसकी पुष्टि कोई नही कर पाया कि ये मगरमच्छ बाबिया मंदिर के तालाब में कैसे आया और यह नाम इसे किसने दिया। ऐसी मान्यता है कि मगरमच्छ मंदिर के तालाब में 70 वर्षों से भी अधिक समय से रह रहा है और कभी किसी से नुकसान नही पहुचाया।

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार श्री विलवमंगलथु स्वामी भगवान विष्णु के भक्त तपस्या कर रहे थे। इस दौरान भगवान कृष्ण एक छोटे बालक के रूप में उनके सामने आए। उन्हें परेशान करने लगे। बच्चे के व्यवहार से परेशान होकर उन्होंने उसे धक्का दे दिया। जिसके बाद वह पास की गुफा में गायब हो गया।

बाद में उन्हें इस बात का पता चला कि वह बालक कोई और नहीं स्वयं भगवान कृष्ण थे। तब से यह मान्यता है कि जिस गुफा में श्री कृष्ण गायब हुए थे, वह आज भी है। साथ ही श्री कृष्ण भी वहां वास करते हैं। उसी समय से मगरमच्छ गुफा के प्रवेश और मंदिर की निगरानी करता है।

कहा जाता है कि बबिया पूरी तरह शाकाहारी है, जो सिर्फ वही प्रसाद खाता है जो उसे मंदिर के पुजारी खिलाते हैं। यही कारण है कि बबिया को मंदिर का रक्षक भी माना जाता है। बबिया के पास जाने या उसे प्रसाद खिलाने की परमिशन किसी अन्य लोगो को नहीं है। पुजारी के झील के किनारे पर आने पर बबिया भी वहां आ जाता है, जिसके बाद उसे मंदिर में चढ़ा प्रसाद खिलाया जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कितनी भी अधिक या कम बारिश होने पर झील के पानी का स्तर हमेशा एक-सा रहता है। यह मगरमच्छ अनंतपुर मंदिर की झील में करीब 60 सालों से रह रहा है। भगवान की पूजा के बाद भक्तों द्वारा चढ़ाया गया प्रसाद बबिआ को खिलाया जाता है। प्रसाद खिलाने की परमिशन केवल मंदिर प्रबंधन के लोगों को है।

https://twitter.com/MysteryTemples/status/1375866274530553856

कहा जाता है कि यह मगरमच्छ पूरी तरह शाकाहारी है और प्रसाद इसके मुंह में डालकर खिलाया जाता है। लोगो का कहना है कि ये मगरमच्छ दिन में दो बार मंदिर में पूजा के बाद प्रसाद खाता है। प्रसाद लेकर मंदिर के पुजारी जैसे ही तालाब के पास जाते हैं बाबिया को आवाज देते हैं वो बाहर आ जाता है और शांति पूर्वक से प्रसाद खाता है।

मंदिर के कर्मचारियों से मिली जानकारी के मुताबिक बाबिया का पुजारी से अनोखा रिश्ता है, मंदिर के तालाब में अनगिनत मछलियां हैं और हमें भरोसा है कि बाबिया कभीउन्हें अपना शिकार नहीं बनाता है। बाबिया पूरी तरह से शाकाहारी है। माना जाता है कि अगर आप भाग्यशाली हैं, तो आज भी आपको इस मगरमच्छ के दर्शन हो जाते हैं।

मंदिर के ट्रस्टी श्री रामचन्द्र भट्ट जी से मिली जानकारी के अनुसार दृढ़ विश्वास है कि ये मगरमच्छ ईश्वर का दूत है और जब भी मंदिर प्रांगण में या उसके आसपास कुछ भी अनुचित होने जा रहा होता है तो यह मगरमच्छ पहले से सूचित कर देता है। मान्यता है कि झील में एक मगरमच्छ के प्राण जाते है, तो रहस्यमयी ढंग से दूसरा मगरमच्छ प्रकट हो जाता हैं।

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