Tuesday, October 26, 2021
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शिव मंदिर में नंदी का स्थान बाहर क्यो होता है, जाने नन्दी का रहस्य और कितने महत्वपूर्ण

Nandi Bhagwan Mystery

Ujjain: हिन्दू धर्म मे भगवान शिव (Bhagwan Shiv) को जहाँ देवो के देव महादेव माना जाता है, तो बही उनके गण भी पूज्यनीय है। शिव की महिमा अपरम्पार है। शिव की शरण मे जो आता है, उसके सारे दुख दर्द दूर हो जाते है। भक्त जब भी भगवान के दर्शन करने देवालय जाते है, तो मंदिर के गर्भ गृह के बाहर ही नंदी महराज की मूर्ति विराजित होती है।

ऐसी मान्यता है कि नंदी (Nandi) शिव शंकर के वाहन है और उनके परिवार के अभिन्न अंग है। महादेव दर्शन करते समय नंदी से जुड़ी यह जिज्ञासा जरूर मन मे उत्पन्न होती है कि नंदी शिव शंकर के परिवार का अभिन्न अंग होने बाद भी उनकी मूर्ति की स्थापना मंदिर के बाहर क्यो की जाती है।

महाभारत में इस बात का उल्लेख किया गया

वास्तव में नंदी की मूर्ति समाधि स्थिति में मंदिर में विराजमान होती है। साथ ही उनकी समाधि खुली आँखों की समाधि है। महाभारत में इस बात का जिकर किया गया है। भगबान नन्दी की स्थिति को वर्णित करते हुए बताया गया है कि खुली आँखों बाली मूर्ति से ही आत्मा ज्ञान की प्राप्ति होती है। साथ ही आत्मज्ञान की प्राप्ति से ही जीवन की मुक्ति संभव हो पाती है।

ये मूर्ति भक्तो को ज्ञान देती है कि मनुष्य रूपी जीव-आत्मा इस समान प्रबति मनुष्य को ईश्वर से दूर ले जाती है, जबकि उसकी सत प्रबति उसे ईश्वर अर्थात शिव की और खिंचती है। यही कारण है कि गर्भगृह के बाहर स्थापित होते हुये भी नंदी (Bhagwan Nandi) की आंखे प्रभु पर टिकी रहती है और निरन्तर अपने आराध्य में लीन रहती है।

पहले नंदी को प्रणाम करने का विधान

शिवालय में प्रवेश करने से पहले नंदी को प्रणाम करने का विधान है। महाकाल की नगरी उज्जैन मंदिर (Ujjain Mahakal Temple) के आस पास एक नंदी रूपी बैल देखा जाता है। अन्न सभी शिव मंदिरों में नंदी भगवन की प्रतीमा गर्व गृह के बाहर भी होती है।

नंदी के सींग विवेक और वैराग्य के प्रतीक है। दाहिने हाथ की तर्जनी और अंगूठे से नंदी के सींगो का दर्शन स्पर्श करते हुए भगवान शिव के दर्शन किये जाते है। मान्यता है इस प्रकार भक्त में घमण्ड का नाश होता है। अतः भक्त भी मंदिर में प्रवेश करते समय सभी कुविचारों का त्यागकर ईश्वर के दर्शन करे। शिव देवो के देव महादेव कहे जाते है। महा देव की महिमा आज भी बरकार है।

नंदी के कान (Nandi ear) में भी अपनी समस्या या मनोकामना (Wishes) कहने के कुछ नियम हैं उनका पालन करना आवश्यक है। नंदी के कान में अपनी मनोकामना कहते समय इस बात का ध्यान रखें कि आपकी कही हुई बात कोई ओर न सुनें। अपनी बात इतनी धीमें कहें कि आपके पास खड़े व्यक्ति को भी उस बात का पता ना लगे।

नंदी के कान में अपनी बात कहते समय अपने होंठों को अपने दोनों हाथों से ढंक लें ताकि कोई अन्य व्यक्ति उस बात को कहते हुए आपको ना देखें। नंदी के कान में अपनी मनोकामना कहने से पूर्व नंदी का पूजन करें और मनोकामना कहने के बाद नंदी के समीप कुछ भेंट अवश्य रखें। यह भेंट धन या फलों के रूप में हो सकती है।

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