देश में बिहार और झारखंड में दुल्हन को लाल नहीं, बल्कि नारंगी सिंदूर लगाया जाता है, कारण जानें

0
5633
Narangi Sindoor Bihar
Narangi Sindoor Significance. Why is vermilion applied to the nose in Bihar. Reason why Orange sindoor uses in Bihar and Jharkhand in Hindi.

Presentation File Photo

Patna: हिन्दू धर्म में सुहागवती स्त्री का सिंदूर (Sindoor) लगाने की प्रथा सदियों से चली आ रही है। रामायण और महाभारत में भी इसका उल्लेख किया गया है। सिंदूर कई रंग उपलब्ध होते हैं। लाल, नारंगी, गुलाबी व कत्थई, जिनमें नारंगी और लाल रंग के सिंदूर को सबसे शुभ माना जाता है।

जहां ज्यादातर भारतीय शादियों में सिंदूर लाल रंग (Red Sindoor) का होता है, वहीं बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में सिंदूरदान के लिए नारंगी और गुलाबी (Gulaabee) रंग के सिंदूर (भखरा सिंदूर) का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा कुछ खास मौकों पर और शुभ कार्यों में भी इस रंग के सिंदूर को अहम स्थान दिया जाता है।

महिलाएं न केवल खुद के लिए भखरा सिंदूर का उपयोग करती हैं, बल्कि देवी-देवता को खुश करने के लिए भी इसका उपयोग होता है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में दुल्हन को लाल के बजाय नारंगी सिंदूर लगाना शुभ माना जाता है। नारंगी सिंदूर को नये नाम से भी जाना जाता है, जिसे भखरा कहा जाता है। नारंगी सिंदूर को बहुत शुभ माना जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार

पौराणिक कथाओं में भी नारंगी सिंदूर (Orange Vermilion) का उल्लेख किया गया है। यही कारण है कि लोगों के बीच नारंगी सिंदूर की मान्यता सबसे अधिक है। इसलिए भी नारंगी सिंदूर को शुभ माना जाता है। लेकिन क्या आपके मन मे यह प्रश्न उठता है कि हनुमान जी की मूर्ति का रंग नारंगी क्यों है? इसका प्रमाण सीधे रामायण में मिलते हैं। रामायण में जब राम जी सीता माता को सिंदूर लगाते है, तो वह बेहद प्रश्न हो जाते थे।

जब इस बात की जानकारी हनुमान जी को पता चली, तो उन्होनें राम जी के प्रति अपना समर्पण इजहार करने के लिए अपने पूरे शरीर को नारंगी सिंदूर (Naarangee Sindoor) से रंग लिया था। यही कारण है कि बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में शादी के दिन दुल्हन को नारंगी सिंदूर लगाना शुभ माना जाता है। नारंगी सिंदूर पति-पत्नी के समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

सिंदूर कैसे तैयार होता

सुहाग के लिहाज से लाल सिंदूर का भी उतना ही महत्व है जितना नारंगी सिंदूर का। बड़ा फासला यह है कि नारंगी सिंदूर प्राकृतिक रूप से शुद्ध होता है। लाल सिंदूर में केमिकल युक्त रंगों की मिलावट की संभावना होती है, नारंगी और गुलाबी रंग का सिंदूर प्राकृतिक रूप से तैयार किया जाता है।

इसमें किसी भी प्रकार का केमिकल नही मिलाया जाता है। जब इसके फल सूख जाते हैं, तो उसके बीज को बारीक पीसकर यह सिंदूर तैयार किया जाता है, यह इसलिए बिल्कुल सुरक्षित है इसके उपयोग से बाल या त्वचा को किसी भी तरह से कोई भी नुकसान नहीं होता है।

नारंगी सिंदूर दुल्हन को क्यों लगाया जाता है

जब एक जोड़ा विवाह बन्धन में बंधता है, तो दुल्हन को सिंदूर सुबह के वक्त लगाया जाता है, नारंगी सिंदूर की तुलना सुबह होने के समय सूर्य की किरणों की लालिमा से की जाती है। जिसका कलर नारंगी होता है शादी में दुल्हन को सिंदूर सुबह के वक्त लगाना शुभ माना जाता है।

ऐसा माना जाता है कि बिहार और झारखंड में नारंगी सिंदूर (Orange Sindoor in Bihar and Jharkhand) लगाने के पीछे कुछ अपनी अलग मान्यताएं हैं, कि जिस तरह सूर्य भगवान लोगों की जिंदगी में नई सुबह है खुशहाली लेकर आता है।

उसी तरह की भावना नारंगी सिंदूर में है। विवाह के समय एक दूसरों की जिंदगी में खुशहाली और उमंग लेकर आता है नारंगी सिंदूर। यही वजह है कि सात फेरे और सिंदूर का कार्यक्रम सुबह के समय में ही करना शुभ माना जाता है।

सुहागवती के श्रृंगार का अभिन्न अंग

सिंदूर हर सुहागवती महिला के श्रृंगार का अभिन्न हिस्सा है। यही वजह है कि केवल शादीशुदा स्त्रियां ही सिंदूर का प्रयोग कर सकती हैं। सिंदूर लगाने से न केवल महिलाओं की खूबसूरती बढ़ती है, बल्कि इससे कई प्रकार की स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं। वैज्ञानिकों के शोध के अनुसार सिर दर्द और नींद न आने जैसी तकलीफों से बचने के लिए महिलाओं को सिंदूर अवश्य लगाना चाहिए।

माता पार्वती से है गहरा रिश्ता

अन्य कथाओं के अनुसार सिंदूर का उपयोग नाक तक लगाने का गहरा रिश्ता मां पार्वती से है। ऐसा कहा जाता है कि जब मां पार्वती ने रक्तबीज राक्षस का सर्वनाश किया था। तब उनका सिंदूर नाक तक फैल गया था। सफलता प्राप्त करने के लिए हिंदू धर्म में महिलाएं काफी लंबा सिंदूर लगाती हैं।

बिहार और झारखंड में नारंगी सिंदूर लगाने का अपना प्रचलन

बिहार झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में दुल्हन को विवाह के समय लाल की बजाए नारंगी सिंदूर (Narangi Sindoor) लगाना शुभ माना जाता है। नारंगी सिंदूर को वहां की भाषा में भखरा कहा जाता है और नारंगी सिंदूर को बहुत ही शुभ माना जाता है, ऐसी मान्यताएं हैं कि देवी देवताओं को प्रसन्न करने के लिए इस सिंदूर का प्रयोग किया जाता है।

सिंदूर नारंगी रंग का चमकीला चूर्ण होता है, जिसे हिन्दू सुहागवती स्त्रियां अपनी मांग में इसलिए भरती है, क्योंकि इससे पति की आयु लंबी होती है। घर में सुख शांति बरकरार रहती है। हिन्दू देवियों की पूजा सिंदूर के उपयोग के बिना अधूरी है।

इसके अलावा चमेली के तेल के साथ सिंदूर हनुमानजी को अर्पित किया जाता है। हनुमानजी को पांच मंगलवार और पांच शनिवार को चमेली का तेल और सिंदूर चढाये, गुड़ और चने की प्रसाद बांटें। सभी संकटों का समाधान जल्द हो जाता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here