
Kedarnath Temple Photo Credits: Twitter
Jabalpur: भारत प्राचीन संस्कृति भगवान् महादेव के इर्द गिर्द ही घूमती है। महादेव की रोचक कथाएं भारत की पहचान बन चुकी है। भगवान शिव के 12 प्रमुख मंदिर है। इन 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे ऊंचाई पर केदारनाथ धाम (Kedarnath Temple) स्थित है। शिव भक्तों के लिए आज का दिन बहुत खास है। आज सुबह पांच बजे केदारनाथ मंदिर के कपाट विधिपूर्वक खोल दिए गए।
कपाट खुलने के बाद अब यहां पर अगले 6 माह तक भगवान केदार की पूजा होगी। परन्तु भक्तों के लिए एक बात कष्ट दाई है की कोरोना वायरस की महामारी को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित इस मंदिर में आम लोगों के आने पर प्रतिबंध है। आज से अगले 6 माह तक केदारनाथ मंदिर में भगवान केदार की आराधना होगी।
हिन्दू धर्म के जानकार और पंडित बताते हैं की भगवान केदार के दर्शनों के लिए बैशाखी के बाद इस केदारनाथ धाम मंदिर को खोला जाता है और 6 माह बाद दीपावली के बाद पड़वा को केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इसके बाद बर्फबारी के चलते 6 माह तक मंदिर बंद रहता है। ऐसे में शिव भक्तों को दोबारा बैशाखी आने का इंतज़ार रहता है।
उत्तराखंड, केदारनाथ मंदिर का कपाठ आज खोले गए!#KedarnathDham@Chandana_Shri99@MinakshiKandwal @irahulvalmiki @shriniwas_hr @Poonam_jodhpur1 @ABVPMB pic.twitter.com/QdaDp7y17g
— अजय मानिकपुरी (@itsajaycg17) May 17, 2021
आपको बता दे की मंदिर जब बंद होता है, तब पुजारी केदारनाथ धाम के अंदर दीपक जलाकर जाते हैं। फिर 6 माह बाद गर्मियों में जब मंदिर के कपाट खुलते हैं, तो वह दीपक जलता हुआ मिलता है। यह भी किसी चमत्कार से काम नहीं माना जाता है।
पंडित राजकुमार शर्मा बताते है की पौराणिक कथाओं में कहा गया है की द्वापर युग में पांडवों ने महाभारत का युद्ध जीत लिया, उसके बाद वे आत्मग्लानि में लीं थे, क्योंकि वे अपने भाइयों, रिश्तेदारों के वध से काफी दुखी हो गए थे। ऐसे में वे सभी भाई इस पाप से मुक्ति पाना चाहते थे। तब वे भगवान शिव के दर्शन के लिए काशी पहुंचे थे।
आज से #केदारनाथ धाम के कपाट खुल गए।
केदारनाथ मंदिर को 11 क्विंटल फूलों से सजाया गया है। @LostTemple7
भगवान केदारनाथ हम सब की रक्षा करें।
जय केदारनाथ 🚩 #KedarnathDham pic.twitter.com/N9MhlezyUt— गौरव पाण्डेय(Ardheshwar) (@Ardheshwar_) May 17, 2021
ऐसे में जब भगवान शिव को इस बात का पता चला तो वे नाराज होकर बर्फीले प्रदेश केदार आ गए। पांडव को उनके केदार में होने का बता चला तो वो भी महादेव के पीछे-पीछे केदार चल दिए। तब भगवान शिव बैल का रुप धारण करके अन्नपशुओं के ग्रुप में शामिल हो गए। तब भीम ने विशाल रुप धारण किया और दो पहाड़ों पर अपने पैर फैला दिए।
#Kedarnath is one among the Hindu Char Dham Yatra (pilgrimage) temple sites. Called the Shiv-Lok on Earth this Jyotirlinga is considered the most important among the 12 revered Jyotirlingam sites across India.
Har Har Mahadev "Om Namah Shivay" #mondaythoughts #KedarnathDham pic.twitter.com/R0IE9SlK05
— CHETHANA PRABHU (@Ravalanath) May 17, 2021
ऐसे में सभी पशु भीम के पैर के नीचे से निकल गए, लेकिन महादेव रूपी बैल नहीं गए। तभी भीम ने उनकी पीठ पकड़ ली। पांडवों की दर्शन की ललक देखकर शिव जी प्रसन्न हो गए और स्वयं दर्शन दिए। तब पांडव पाप से मुक्ति पाने में सफल हुए और पांडवों ने वहां पर मंदिर का निर्माण कराया। यही आजका केदारनाथ धाम है। उस केदारनाथ मंदिर में आज भी बैल की पीठ की आकृति-पिंड के रूप में पूजी जाती है।



