
आज हम बात कर रहे है विश्व के सबसे रहस्यमय पर्वत कैलाश पर्वत की। हिमालय की गोद मे बसा ये पर्वत भले ही दुनिया का सबसे ऊंचा पर्वत न हो बाकी इसके सामने सारे पर्वत फीके पड़ जाते है। इस पर्वत की महानता इसी बात से हो जाती है आज तक कोई भी मनुष्य या मनुष्य की बनाई मशीन इस पर नही चढ़ पाई है। जिसने भी यह दुससाहस किया है उसे मत्यु ही प्राप्त हुई है और यही एक बजह है कि इससे जुड़े सारे के सारे रहस्य अभी तक वेनकाब नही हो पाए, चाहे वो दिव्य शक्तियां हो या कोई वैज्ञानिक उलझन।
हम आपको कुछ ऐसे अनसुलझे रहष्य मय को उजागर करेंगे जिससे जानकर आप कांप उठेंगे कैलाश पर्वत धरती का केंद्र याने x एक्स कहा जाता है। ये पर्वत पृथ्वी के सभी जीव जंतु के जीवित रखने के लिए बातावरण को बनाये रखता है। इस पर्वत पर सारी दिशाएं मिल जाती है। और दुनिया की सारी आलोकिक शक्तियों का जन्म होता है। इस पवित्र पर्वत की ऊँचाई समुद्र तट से लगभग 6714 मीटर है। ये दुनिया का सबसे ऊंचा पर्वत न हो, लेकिन इसकी भव्यता उचाई से नही बल्कि इसके आकर में है।
जी हाँ शिवलिंग के आकार का ये पर्वत स्वयं में ही मंदिर है। जब बर्फ के ढके हुए इस पर्वत पर सूर्य की किरणें पड़ती है, तब ये पर्वत सोने की तरह चमक उठता है, तब ऐसा प्रतीत होता है मानो कैलाश भी सत्य है और सत्य ही शिव है। कैलाश मानसरोवर जिसे स्वम्भू भी कहा जाता है।
ये दुनिया का सबसे प्राचीन मानसरोवर है जो कैलाश पर्वत में स्थित है धरती के इस स्थल पर हवाओ ओर ध्वनि की तरंगों का इस तरह मिलान होता है कि यहाँ आए हुए भक्तो को ॐ की अद्भुत ध्वनि सुनाई देती है। कैलाश पर्वत की चोटी भी दिशा दिखाने वाले कंपनकी तरह है इसी बजह से यहाँ से चार नदियों का उतराम भी हुआ है, जिनके नाम है भरमपुत्र, सिंधु, सतलज और घाघरा जो पूरे विश्व के चार भागों को दर्शता है। माना जाता है कैलाश पर्वत की चोटी पर इंसान ओर भगवान का मिलन होता है लेकिन आजतक कोई सफलता पूर्वक इसकी चोटी पर नही पहुच पाया।
इस पर्वत पर चढ़ने की कोशिश करने वाले लोगो का मानना है कि वो अक्सर आंधी तूफान के कारण बस खो जाते है, जिससे ये प्रतीत होता है, कैलाश पर्वत अपनी जगह हर बक्त बदलता रहता है। जिसकी शक्तियों का कोई भी पार नही। उनके निवास पर बिना उनकी आज्ञा के आ जाये, ऐसा वो होने नही देंगे।
कैलाश पर्वत की एक और खासियत है कि ये एक नही चार अलग अलग तत्वों से बना हुआ है। जिसमे से एक पदार्थ सोना भी है। 6 पर्वतों से गिरा हुआ कैलाश पर्वत एक कमल की तरह दिखता है यही नही बल्कि गर्मियों में जब बर्फ पिगलती है। तब इस पर्वत पर ॐ का चिन्ह दिखता है मानो जैसे सूर्य अभी भोलेनाथ को नमन कर रहै हो। कैलाश पर्वत पर दो तालाब स्थित है, जो आपने आप मे ही विचित्र है देवय तल जो सूर्य के आकार का है और राक्षस तल जो चंद्रमा के आकार का है। दोनों ही एक दूसरे के इतने करीब होंने के बाद भी दोनों भौगोलिक दृष्टि से अलग है।
एक मे जीवन जैसे आपने आपमे ही सौन्दय है और दूसरा जहा एक भी जीवित प्राणी देखने को मिलता। देश भर के बैज्ञानिक का मानना है कि विज्ञान भी इस विचित्र से चकित है यहाँ आने वाले लोगो का भी मानना है कि यहाँ कुछ अद्भुत शक्तियां रहती है जो यहाँ आते ही अपना अहसास दिलाती है। ऐसे कई वीडियो है जिसमे कैलाश पर्वत पर भगवान् शिव के होने और देखे जाने के दावे किये गए हैं, एक वीडियो आप ऐसा भी नीचे देख सकते है।
जो सिद्दी पाने के लिए लोगो को कई वर्ष लग जाते है वो कैलाश पर्वत पर कुछ ही घंटों में प्राप्त हो जाती है क्योंकि कैलाश पर्वत पर भोलेनाथ की अपार दृष्टि कृपा होती है तो क्या कैलाश में स्वम महाकाल महा शक्ति परमात्मा स्वम्भू देवादि देव विराजमान है। दोस्तो कुछ प्रश्नों के उत्तर इंसान की बुद्धि के परे होते है और कैलाश को लेकर रिसर्च अभी भी जारी है।



