इस चाइनीस मंदिर में चीनी कर रहे पूजा, भारतीय सेना जवानों के लिए मन्नत मांग रहे: आश्चर्य

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Photo Credits: Twitter

Kolkata/West Bengal: देश के लद्दाख में गलवान घाटी के पास भारत चीन सीमा पर दोनों देशों के बीच विवाद और झड़प का दौर चला है। देश केव अंदर चीनी सामान का बायकाट हो रहा है, उनकी होली जलाई जा रही है। देश की जनता चीन की सीमा पर शहीद भारतीय सैनिकों को सलूट कर रही है। देश के वीर जवानो की जय जय कार हो रही है। आखिर हमारे सेना जवानो ने चीन को उसी की भाषा में जवाब जो दिया है।

इन सबसे बीच एक मंदिर ऐसा भी है, जो चाइनीस है, जिसे चाइनीज काली मंदिर (Chinese Kali Mandir) के नाम से पहचाना जाता है। इस मंदिर में चीनी लोग भारत और भारतीय सेना के जवानों के लिए प्रार्थना कर रहे है। यह मंदिर वेस्ट बंगाल के कोलकाता के टेंगरा के मठेश्वरतला रोड पर स्थित है। कोलकाता के टेंगरा को चाइना टाउन (China Town) के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ पर चीनी लोग कुछ सदी पहले आकर बस गए और यही के हो गए थे।

आपको बता दे की यह काली माता का मंदिर लगभग 60 साल पहले बना था और इसे एक चीनी कारोबारी ने बनवाया था। इस मंदिर की स्थापना का इतिहास भी बड़ा रोचक है। स्थानीय लोगो द्वारा बताया जाता है की लगभग 60-70 साल पहले, टेंगरा (Tangra, Kolkata) के मठेश्वरतला रोड में, पीपल के एक पेड़ के नीचे कुछ लोकल लोगों ने काली जी की एक छोटी-सी मूर्ति स्थापित की थी।

इसके बाद इस पेड़ के नीचे स्थापित देवी की छोटी मूर्ति की पूजा करने स्थानीय हिंदू आया करते थे। फिर हिन्दू भक्तों को देखते हुये क्षेत्र में बसे हुये चीनी लोग भी धीरे-धीरे पेड़ के नीचे पूजा करने आने लगे। माता काली में इस चीनियों की भी आस्था जाग गई। उन्होंने स्थानीय लोगों से सुना कि देवी भक्तों की हर मुश्किल घडी और संकट से रक्षा करती हैं। उनका यह विश्वास वक्त के साथ बढ़ता गया।

बौद्ध धर्म में आस्था रखने वाले ये चीनी मूल के लोग काली पूजा में भी आस्था रखने लगे और डेली दर्शन और पूजन पर आने लगे। इसी चीनी मूल के भक्तों में से एक फांग चुंग भी थे। पहले वह इसी क्षेत्र में रहते थे और उनका सपना एक बड़ा कारोबारी बनने का था। फांग चुंग ने विदेश जाकर रेस्तरां खोलने की कामना माता काली से की थी। कुछ समय बाद वह पूरी भी हो गई।

फांग चुंग द्वारा पीपल के पेड़ के नीचे मां काली से मांगी गई मन्नत हो गई। इसके बाद फांग चुंग विदेश में रेस्तरां खोलने के बाद कोलकाता छोड़कर चले गए चले गए। सफलता के पांच साल बाद फांग चुंग वापस कोलकाता आए और सबसे पहले मां काली के उसी पीपल के पेड़ के पास पहुंचे। उन्होंने माता को धन्यवाद् देते हुये वहां एक पक्का मंदिर बनवा दिया और मां काली और शिव जी की कुछ नई मूर्तियां भी स्थापित करवाई। तब से ही इस मंदिर को चीनी मंदिर में जोड़ा काली मूर्तियां नाम से जाना जाने लगा। बाद में इस काली मंदिर का नाम चाइनीज काली मंदिर पड़ गया।

इस मंदिर का नाम भले ही चाइनीज काली मंदिर पद गया है, परन्तु यहां पूजा सम्पूर्ण हिंदू रीति-रिवाज से होती है। इस मंदिर में एक ब्राह्मण पुजारी भी हैं, जो हर रोज सुबह-शाम पूजा करते हैं। यहाँ हमेशा तो सामान्य तरीके से ही पूजा होती है, लेकिन फलहारिणी काली पूजा जैसे मौकों पर विशेष आयोजन होते हैं। सबसे बड़ा आयोजन होता है, कार्तिक माह में होने वाली काली पूजा पर। तब की पूजा का नज़ारा देखने वाला होता है।

यह कोई चीनी मंदिर ना होकर पूर्ण रूप से हिन्दू मंदिर है और एक चीनी मूल के भक्त ने इस मंदिर की इमारत बनवाई, क्योंकि माता ने उसकी विश सुनी और पूरी भी की। स्थानीय लोग बताते है की माता काली के लिए कोई भक्त भारतीय, चीनी या नेपाली नहीं है। भक्त तो भक्त ही होता है। सच्चे मन से आस्था रखने वाला और मन्नत मांगे वाले को माता का आशीर्वाद जरूर मिलता है।

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