भारत में यहाँ बजेगा दुनिया का सबसे बड़ा घंटा , 82000 KG वजनी घंटे की गूंज 8 KM तक सुनी जायेगी

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Worlds Largest Bell
Worlds Largest Bell In Rajasthan India. Heaviest bell will setup in Kota Rajasthan. Rajasthan govt to establish World's Biggest Bell in Education.

Photo Credits: Social Media

Kota: हमारे देश भारत में हर एक राज्‍य में बहुत सारे ऐसे दर्शनीय स्थल हैं, जिसके मनोरम और विहंगम दृश्‍य को देखकर हर एक पर्यटक का मन प्रफुल्लित हो जाता है। इन पर्यटन स्‍थलों में केदारनाथ, भेड़ाघाट जलप्रपात, माउंट आबू, लाल किला, चारमिनार इत्‍यादि आते है। जिनकी सुन्‍दरता को देखने के लिए केवल भारत से ही नहीं बल्‍कि विदेशों से भी लोग आते है।

हमारे देश में हर साल कोई ना कोई पर्यटन स्‍थल का निर्माण होता रहता है। अब इसी लिस्‍ट में हमारे देश के राज्‍य राजस्‍थान (Rajasthan) के कोटा (Kota) में बनने वाले सबसे बड़े घंटे का नाम एड होने जा रहा है। यह घंटा राजस्‍थान डिस्‍ट्रिक्‍ट के चंबल नदी पर लगने वाला है।

घंटे कि विशेषताएं

ऐसा कहा जा रहा है कि यह पर्यटन स्‍थल (Tourist Spot) पूरी दुनिया का 8वा अजूबा होगा। आपको जानकारी के लिए लिए बता दे कि यह इस घंटे का बजन लगभग 82000 किलो का होगा। इसका क्षेत्रफल 78.625 वर्ग मीटर का होगा।

जिसमें इसकी चौडा़ई 8.5 मीटर और लंबाई 9.25 मीटर की होगी। ऐसा कहा जा रहा है, कि जब यह घंटा बनकर तैयार होगा, तो इसे बजाने पर इसकी आवाज लगभग 8 किलोमीटर की दूरी तक सुनाई देगी। पहले इस घंटे को केवल 57 किलोग्राम का कहा जा रहा था। लेकिन अब कहा जा रहा है कि सजाने के बाद यह घंटा 82 टन का बनेगा।

इस घंटे के बनने के बाद एक विश्‍व रिकोर्ड (World’s Largest Bell) बन जायेगा। कहा जा रहा है कि इस घंटे के बनने के बाद यह पूरी दुनिया का सबसे बड़ा कास्टिंग घंटा होगा। इस घंटे का रंग गोल्डन होगा। कहा जा रहा है, कि यह घंटा लगभग पन्‍द्रह वर्ष तक इसी तरह से लटका रहेगा। 15 साल में जब इसका कलर कम होगा तो दौबारा से पॉलिश करके चमकाया जा सकता है।

घंटे के निर्माण के लिए आवश्‍यक चींजे

इस घंटे का निर्माण चंबल नदी पर बनाई गई एक अस्‍थाई फैक्‍ट्री पर किया जा रहा है। इसे ब्रोंज मेटल से बनाया जायेगा। अंदाजा लगाया जा रहा है, कि इस घंटे को तैयार करने में लगभग 225 ट्रक तक ग्रीन सेंड लगेगा।

इसके साथ ही इसके निर्माण में 4 से लेकर 5 ट्रक का सोडियम सिलीकेट, 11 से 12 ट्रक तक कॉपर ऑक्साइड, 2 से लेकर 3 ट्रक का LPG साथ ही 20 हजार लीटर से अधिक का डीजल इस्‍तेमाल होगा। इस घंटे को बनाने में लगभग 150 दिन लगेंगे। याने कि 5 महीने।

इस घंटे का वेट बिना ज्वैलरी के 57000 किलो को होगा। 25000 किलो कि ज्‍वेलरी लगाने के बाद इसका बजन 82 टन का हो जायेगा। इसके बनने के बाद यह पूरे विश्‍व का तीसरा सबसे वजनी घंटा बन जायेगा।

इस घंटे को जमीन से लगभग 70 फीट की ऊचॉई पर लगाया जायेगा। इसकी क्‍वालिटी पर अधिक ध्‍यान दिया जा रहा है। ताकि यह घंटा चीन और मास्‍को में लगे घंटे कि तरह खराब ना हो।

3 विश्व रिकॉर्ड बनेंगे घंटे के तैयार होने के बाद

विश्‍व के इस तीसरे सबसे बड़े और वजनी घंटे का डिजाइन अनूप भरतरिया आर्किटेक्ट कर रहे है। वह उसे इस तरह से डिजाइन कर रहे कि वह कभी खराब ना हो। जैसे ही यह घंटा बनकर तैयार होगा विश्‍व में तीन रिकॉर्ड बन जायेंगे। सबसे पहले इसका नाम गिनीज बुक में दर्ज होगा।

इस घंटे का निर्माण प्रसिद्ध इंजीनियर श्री देवेन्‍द्र आर्य जी कर रहे है। जोकि विश्‍व में स्‍टील मेन ऑफ इंडिया नाम से मशहूर है। इसके साथ ही इस घंटे कि कलाकृति का निर्माण हरीराम कुंभावत राष्‍ट्रपति पुरस्‍कार से सम्‍मानित कलाकर कर रहे है।

यह घंटी चीन और मास्को की प्रसिद्ध घंटियों की तरह होगी

यह पूरे विश्‍व की तीसरी सबसे बड़ी घंटी होगी। चीन और मास्‍को शहर में मौजूद घंटो के बाद इसका स्‍थान होगा। अभी चीन देश में लगी घंटी का वेट 101 टन है। चीन की घंटी से भी ज्‍यादा वजन मोस्‍को में लगी घंटी का है।

मोस्‍को में लगी घंटी को वजन लगभग 200 टन है। जोकि सबसे ज्‍यादा वजनी घंटी है। लेकिन इन घंटियों को छोटे छोटे टुकडे में बनाया गया है। चीन की घंटी को जब लटकाया जा रहा था, तो वह टूट कर अलग हो गई थी।

मोस्‍को कि जो घंटी है, उसे केवल बना कर रखा गया है। लेकिन अब तक लटकाया नहीं गया है। लेकिन भारत के राजस्‍थान जिले के कोटा में बनाई जा रही घंटी को लटकाया जायेगा। जिससे यह विश्‍व का एक प्रसिद्ध पर्यटन स्‍थल बन जायेगा।

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