गोंडा UP के अरुण ने की मिसाल कायम, नेट परीक्षा में संस्कृत विषय में प्रथम रैंक हासिल की।

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Arun Pandey Net Exam Topper Sanskrit
Anun Pandey from Gonda Uttar Pradesh is the all india topper of NET exam in Sanskrit subject. They success story of topper Anun Pandey and NET exam crack.

Arun Pandey Image Credits: Twiter

उत्तरप्रदेश में फिर एक बार गोंडा का नाम रोशन किया गोंडा के सुपुत्र ने। गोंडा के सुपुत्र ने नेट परीक्षा में संस्कृत विषय में देश में प्रथम स्थान हासिल कर जिले का नाम गर्व से ऊंचा कर दिया। भगवान घनश्याम महराज की जन्मस्थली छपिया के नज़दीक अगया माफी गांव के अरुण पाण्डेय पुत्र देवानंद पाण्डेय ने सभी के लिए मिसाल पेश करते हुए संस्कृत की दोनों विधाओं में देश में प्रथम पायदान प्राप्त किया।

NTA की ओर से आयोजित राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा नेट में अरुण ने परंपरागत संस्कृत और सामान्य संस्कृत में पूरे देश में 100 प्रतिशत के साथ पहला स्थान की प्राप्त करके सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत बने। NTA असिस्टेंट प्रोफेसर नेट तथा कनिष्ठ शोध छात्रवृत्ति JRF की पात्रता हेतु पूरे देश में 279 शहरों के करीब 700 केंद्रों पर 101 अलग-अलग विषयों में आयोजित की गई थी।

दिसंबर में आयोजित परीक्षा में विषय कोड 25 सामान्य संस्कृत में तथा विषय कोड 73 परंपरागत संस्कृत ने कई टेलेंटड स्टूडेंट्स ने इसमे हिस्सा लिया। देश के विभिन्न इलाको से कई छात्र ने इसमे भाग लेकर अपनी प्रतिभा को सामने लाये। लेकिन गोंडा के टेलेंटड स्टूडेंट्स अरुण ने सभी को पीछे छोड़ते हुए इन दोनों विषयों में पहली रैंक प्राप्त की। जिसको लेकर गोंडा में जश्न का माहौल बन गया है।
https://twitter.com/UPNews07/status/1212660896511807488

सभी गोंडा के पुत्र को बधाई दे रहे है। दोनों विषयों में JRF प्राप्त हुआ है। अरुण उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के गंगानाथ झा कैंपस में संस्कृत व्याकरण तथा दर्शन विषय में शोधरत हैं। अरुण ने बताया कि बचपन से ही उनका पसंदीदा विषय संस्कृत है।

बचपन से ही संस्कृत विषय में रुचि होने के कारण संस्कृत विषय से ही पूर्व मध्यमा, उत्तर मध्यमा प्रथम श्रेणी में और शास्त्री तथा आचार्य में सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय गुजरात में प्रथम स्थान के साथ गोल्ड मेडल भी अपने नाम किये।

अरुण ने बताया की उनका उद्देश्य है कि संस्कृत में उत्कृष्ट शोध करने के उपरांत किसी विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्त होकर संस्कृत का अध्यापन करना और संस्कृत साहित्य को आगे बढाना है। इस कामयाबी के पीछे उनके गुरु और माता पिता का हाथ है। उनके गुरु जी ने हर कदम उनका हौसला बढ़ाया, उनका हौसला कभी कम नही होने दिया।

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