ऐसा पक्षी, जो हमेशा जोड़े में रहता है, अपने साथी की मृत्यु होने पर खुद के प्राण दे कर सती हो जाता है

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Sarus Crane Sati Bird
Tallest of all flying birds in the world. Sarus crane is also known as 'Sati bird'. It always lives in pair and another dies when one dies.

File Photo Credits: flickr

Delhi: हम इन्‍टरनेट पर कई तरह के पशु पक्षियों कि तस्‍वीरे देखते है। कुछ पशु पक्षियों कि तस्‍वीरें ऐसी होती है, जिनको देखकर मन को सुकुन मिलता है। इनकी तस्‍वीरे देख कर हमारा मन खुशनुमा हो जाता है। ऐसी ही एक तस्‍वीर इन्‍टरनेट पर वायरल हो रही है।

यह तस्‍वीर है, सारस क्रेन (Sarus Crane) पक्षी कि उनकी इस फोटों को इन्‍टरनेट पर शेयर करते हुये एक व्‍यक्ति जिनका नाम है, एरिक सोल्‍हेम उन्‍होंने लिखा है कि यह दुनिया का सबसे लंबा उड़ने वाला पक्षी सारस क्रेन है, उसे सति बर्ड (Sati Bird) के रूप में जाना जाता है। ये आमतौर पर जोड़े में देखे जाते है। इनका समर्पण अद्भुद होता है, एक के गुज़र जाने पर दूसरा भी अपने प्राण छोड़ देता है। उनकी यह पोस्‍ट बहुत ही वायरल हो रही है।

वैसे तो बहुत से पक्षी ऐसे होते है, जिनकी एक अलग पहचान होती है। कुछ अपनी अलग बनावट और सुन्‍दरता के लिये जाने जाते है, तो कुछ पक्षी अपनी अनोखी विशेषताओं कि वजह से वैसे तो कई पक्षी हमारे भारत में पाये जाते है। जैसे गोरेया, नीलकण्‍ठ, तोता, कबूतर, उल्‍लू, मैना, कौआ, सारस।

सभी पक्षी कि अपनी अलग पहचान है। हर पक्षी अपनी एक अलग विशेषता रखता है। वही कुछ पक्षी ऐसे होते है, जो कि बाहर से हमारे देश में प्रवास करने आते है, कुछ पक्षी गर्मी में तो कुछ ठंड में हमारे देश में प्रवास करने आते है।

हम आज बात कर रहें ऐसे पक्षी कि जो कि भारत में आने वाला एक गैर-प्रवासी पक्षी है। हम बात कर रहें है सारस क्रेन की इस पक्षी में कुछ ऐसे स्‍पेशल केरेक्‍टर होते है, जिससे यह दूसरे पक्षियों से अलग दिखाई पड़ता है।

इस पक्षी कि ऊँचाई करीब 156 सेंटी मीटर कि हाती है, मतलब 5 फुट 2 इंच कि। इसकी हाईट इतनी अधिक है, कि इन्‍सान भी इसके सामने छोटे लगे। इस पक्षी का रंग सफेद भूरा होता है और उसका सिर लाल रंग का होता है। इसकी चोच काफी लंबी होती है। यह पक्षी खुले आर्द्र क्षेत्र में और दलदली जगह पर रहना पसंद करता है।

ठंड कि शुरूआत में यह पक्षी हमारे देश भारत में समय व्‍यतीत करने आते है। यह पक्षी नर और मादा दोनों हमेशा साथ साथ रहते है। साथ में जीते है और साथ में मर जाते है। इन्‍हें प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है। मादा सारस अगस्‍त-सितंबर में बच्‍चों को जन्‍म देती है। अगर बात कि जाये इनके खाने कि तो यह जड़ों को, कंद को यही इनका आहार होता है।

सारस पक्षी आपस में बातचीत करने के लिए अलग अलग तरह की आवाजे निकालते है। इस पक्षी की दो टांगे जो बहुत लंबी, स्ट्रोंग होती है। जिनका रंग हल्का ग़ुलाबी होता है। सारस पक्षी की गर्दन लम्बी एवम घुमावदार होती है और ये दिखने में बेहद सुंदर दिखाई पड़ती है। सारस पक्षी की चोंच भी बड़ी और लम्बी होती है। अपनी चोंच के सहारे ही सारस भोजन को आसानी से निग़ल जाते है।

इस पक्षी का वजन करीब 6 से 7 किलोग्राम के करीब होता है। ये पक्षी जब खड़े होते है तो 5 से 6 फुट तक लंबाई होती है। आमतौर पर सारस एक प्रवासी पक्षी है। यह एक जगह से दूसरी जगह घूमते रहते है। और कुछ प्रजाति के सारस एक ही जगह अपना जीवन गुजार देते है।

सारस पक्षी अधिकतर गहरे पानी में नहीं जाते है। यह कम पानी वाली जगह में रहकर ही भोजन तलाश करते है और ये पक्षी दिन के दौरान ही सक्रीय होते है। सारस वैसे तो शाकाहारी पक्षी है। वो भोजन में पेड़ पौघे, बीजों को खाते है और कभी कभी कभार छोटी मछलियों को भी खा जाते है। सारस पक्षी को प्रेम और समर्पण का प्रतीक कहा जाता है।

सारस क्रेन पक्षी (Sarus Crane Bird) के नर और मादा पक्षी दोनों हमेशा साथ में रहते है। ये पक्षी जब जोड़ा बनाते है, उसके बाद वो कभी दूसरा जोड़ा नहीं बनाते है। इसका मतलब वो जीवनभर के लिए साथ में ही रहते है।

वह दोनों बाहर से हमारे यहां भारत में जोड़ो में ही आते है। उनका प्रेम इतना अधिक होता है, कि यह लोगों के लिए एक प्रतीक के तौर पर माना जाता है। इनके प्रेम कि वजह से इन्‍हें प्‍यार कि निसानी मानी जाती हे। यह पक्षी साथ में जीते है और साथ में ही मर जाते है।

अगर किसी कारण से किसी एक भी पक्षी कि दुनिया को अलविदा कह जाता है, तो दूसरा पक्षी भी गम कि वजह से जान दे देता है। आज के समय में जहॉं इन्‍सान भी अपनें वादों पर कायम नहीं रह पाते, उसी जगह में यह पक्षी अपनी इस विशेषता के लिए प्रसिद्ध है और उनकी इस विशेषता को देख कर लोगों का मन भी खुशनुमा हो जाता है। यह पक्षी जोड़ा लोगो के लिए एक प्रतीक है।

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