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Bhopal: आपको रामायण में कुंभकर्ण (Kumbhkaran) के बारे में सुना ही होगा। लंकापति रावण (Ravana) के भाई कुंभकर्ण कई महीनो तक सोते रहते थे। कुंभकर्ण को उनकी नींद की वजह से जाना जाता है। वो पूरे साल में 6 महीने सोते और 6 महीने जागते। आज भी एक ऐसा गांव है, जहां के लोग भी कुंभकर्ण की तरह सोते हैं।
अधिकतर लोग ऐसा सोचते हैँ कि उन्हें फुल तू एकदम सुकून से सोने और आराम फरमाने को मिले। यदि आप भी बिंदास नींद की खोज में है, तो कलाची गांव आपकी मंज़िल हो सकती है। यहां आपके सोने पर कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा।
आपको बता दें की कजाकिस्तान (Kazakhstan) के कलाची गांव (Kalachi Village) में रहने वाले लोग दुनिया में सबसे ज्यादा सोने वाले लोगों के तौर पर जाने जाते हैं। अगर आप भी यहाँ आ जायेंगे, तो आपको भी गहरी नींद आने लगेगी। यहां जी भर के सोने को मिलेगा। कलाची गांव (Sleeping Village) में सोना एक मजबूरी बानी हुई है।
विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स बताती है की कलाची गांव में लोगों के सोने वाली पहली घटना साल 2010 में घटित हुई। इसके पहले यहाँ के लोगों ने ऐसा कुछ भी अनुभव नहीं किया था। वेतब तक यहाँ के लोग आम लोगों की तरह सोते और समय पर जग जाते थे।
फिर एक दिन अचानक गांव का एक आदमी किसी जरूरी काम से शहर जाने के लिए निकला, लेकिन रास्ते में उसे नींद आने लगी। नींद (Sleeping Disorder) के चलते उनका दिमाग ही काम करना बंद कर दिया और वह रास्ते में ही सो गया।
कुछ समय बाद जब उसकी नींद खुली, तो काफी टाइम बीत चुका था। वह गांव वापिस आया और उसने इस बारे में लोगो को बताया। इस पर किसी को भरोसा नहीं हुआ। फिर इस तरह की कुछ घटनाएं और हुई। पहले लोग एकदम से कुछ घंटे सो जाते थे, फिर यह समय बढ़ने लगा और अब लोग कई दिन के लिए सो जाते थे।
लोगो को एकदम से झपकी लग जाती है। इसके बाद गांव के लोगों ने इन घटनाओं को गंभीरता से लिया। फिर कुछ ऐसी घटना ही सुनने को मिली की कई लोग कई महीनों तक सोते रहे। साल 2010 के बाद से इस गांव में यह बीमारी फैलती गई।
अब इस गाँव में 600 लोग रहते हैं और कई लोगो ने गाँव छोड़ दिया है। इस बीमारी से गांव के करीब 14% लोग गंभीर रुप से एफेक्ट हुए। लोगो में भय बैठ गया की कई महीनों तक नींद के चलते खुद पर कण्ट्रोल नहीं होना बहुत गलत है।
Most sleeping village is Lalachi Village in Kazakhstan. A Sleepy Hollow village. pic.twitter.com/QV9pT5DwoH
— sanatanpath (@sanatanpath) March 14, 2022
बताया जाता है की गांव के लगभग 160 लोग तो सोते-सोते ही नींद में ही अपने प्राण त्याग गए। अब कलाची गांव को स्लीपी होलो (Sleepy Hollow Village) कहा जाने लगा। अब गांव की अधिकतर महिलाएं और बच्चे गांव छोड़कर बहार बस गए है। जिन लोगों की जमीन और खेती हैं, उनके लिए इस गांव में रुकना मजबूरी बन गया।
अब तो प्रशासन भी लोगों को गांव से निकालकर पास के कस्बों में बसाने का काम शुरू कर दिया है। ऐसे में यहाँ के लोगो को बाहर रहने में कई दिक्कतों का सामना करना बाद रहा है। इस रहस्यमई नींद के कारण का बापा लगाने के लिए कई वैज्ञानिकों ने गांव में जमीन, हवा और पानी पर रिसर्च शुरू की है।
बहुत रिसर्च के बाद भी कोई संतुष्ट करने वाला कारण नहीं बता चला। मॉस्को और प्राग के विशेषज्ञों ने अपने अपनी स्टडी में पाया है कि कालाची के चारों ओर कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन का स्तर इतना ज्यादा होगया है कि यह प्रदूषण बनकर लोगों की सांसों में जम रहा है और इस कारण से ही लोग स्लीप डिसऑर्डर की चपेट में आ रहे हैँ।
अभी और रिसर्च की जा रही है। डॉक्टर्स ने यह भी गौर किया की गांव में पुरूषों की यौन क्षमता में तेजी से इज़ाफ़ा हो रहा है। इसके अलावा जो लोग जितना ज्यादा सोते हैं, वे जागने के बाद पहले की अपेक्षा ज्यादा उग्र बर्ताव करते हैं। असल में यह जरूरत से ज्यादा सोने का परिणाम बताया जा रहा है।
People Are Sleeping For Days In The Village Of Kalachi: Kazakhstanhttps://t.co/wJHnKDfLkD pic.twitter.com/KeRO0t21ht
— Clesion Nogueira (@Clesion) May 26, 2018
कुछ लोग तो यह भी बता रहे है की कलाची गांव यूरेनियम की बंद हो चुकी खदान से फैले प्रदूषण के चलते ऐसा हो रहा है। कभी इस गांव के आसपास कई छोटी बड़ी यूरेनियम की खदाने थीं। कई सालों तक घातक रेडिएशन निकलता रहा। कजाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन खदानों को बंद करवा दिया। यह भी एक कारण माना जा रहा है।
फिर साल 2015 में एक रूसी वैज्ञानिक ने अपनी रिसर्च में दावा किया की गहरी नींद वाली बीमारी के लिए यूरेनियम कारण नहीं माना जा सकता, क्योंकि यूरेनियम की खदानें तो दुनिया के और भी देशों में हैं, परन्तु वहां से ऐसा केस देखने या सुनने को नहीं मिला। अभी भी इसका पुख्ता कारण खोजा जा रहा है।



