PM नरेंद्र मोदी की साधना वाली पवित्र गुफा गरुण चट्टी का रहस्य पता चल गया

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Photo & News Courtesy: ANI on Twitter

आज हम बात कर रहे है एक पवित्र और रहस्यमई गुफा की, जिसका सीधा नाता भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से है. आज नरेंद्र मोदी ने एक गुफा में साधना की और पूरी दुनिया से अछूती वह गुफा आज सुर्खियों में आ गई, किन्तु लोगो के पास इस गुफा के बारे में और इससे जुड़े मोदी ने रिश्ते के बारे में ज्यादा जानकरी ना होने से लोगो के मन में जिज्ञासा है. आज हम इस मुद्दे पर पूरी रिसर्च करके लाएं हैं.

उत्तराखंड में केदारनाथ मंदिर से पहले एक स्थान है गरुण चट्टी। केदारनाथ मंदिर से अभी इसकी दूरी सम्भवतः 2 या 2.5 किमी पैदल मार्ग से है. यहाँ केवल पैदल ही जाया जा सकता है. पहले यह मार्ग और अधिक लम्बा था अभी केदारनाथ से गरुड़चट्टी तक साढ़े 3 किलोमीटर लंबा और 4 मीटर चौड़ा मार्ग बनकर तैयार है.

केदारनाथ यात्रा का यह प्रमुख पड़ाव रहा गरुड़चट्टी केदारनाथ में आई भयानक बाढ़ और त्रासदी से बाद अब फिर से आबाद हो गया है. आपको बता दें की मोदी ने अक्टूबर 2017 में केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्यों का शिलान्यास किया था और गरुण चट्टी को आबाद करने की इच्छा भी जताई थी. थरडी के बाद से केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण नरेंद्र मोदी की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है.

पौराणिक मान्यता की माने तो भगवान विष्णु गरुड़ पर बैठकर केदारनाथ आए थे और तब भगवान् विष्णु जी ने धरती पर उतरने के लिए इसी चट्टी का उपयोग किया था. इसी कारण यहाँ पर गरुड़ की मूर्ति भी है। इसलिए इसका नाम गरुड़चट्टी पड़ा। यहां पर गुफाएं हैं, जिनमें साधु-संतों ने साधना की है. साधु संतो में यह स्थान गरुण चट्टी साधना करने के लिए सबसे पवित्र एयर फलदाई माना जाता है. तभी साधु नरेंद्र मोदी भी यहाँ साधना करने पहुंचे है.


Prime Minister Narendra Modi meditates at a holy cave called Garun Chatti near Kedarnath Shrine in Uttarakhand.

केदारनाथ में आई 2013 की त्रासदी के बाद हुए नवनिर्माण के पश्चात अब यह मार्ग काफी सुविधाजनक हो गया है और यहाँ पहुँचने की कुछ दूरी भी कुछ कम हो गयी हैं. किन्तु आज से 35-40 साल पहले केदारनाथ मंदिर से गरुण चट्टी तक का पैदल मार्ग बहुत कठिन हुआ करता था.

उस समय के तीर्थयात्रियों को यह दूरी तय करने में काफी कष्ट उठाने पड़ते थे. पिछली बार जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केदारनाथ धाम पहुंचे तो अनेकों न्यूजचैनलों की टीम वहां मौजूद थी. उन्हीं में से एक टीम चैनल ने वहां उपस्थित एक ऐसे पुजारी को खोज निकाला था, जो की पिछले कई दशकों से गरुण चट्टी में ही निवास कर रहा था.

न्यूज चैनल के रिपोर्टर से अपनी बातचीत में उन पुराने पुजारी ने बताया कि 1980 से 1990 तक नरेन्द्र मोदी हर साल केदारनाथ आते थे और गरुण चट्टी स्थित एक धार्मिक संस्था के भवन में किराए का कमरा लेकर लगभग सवा से डेढ़ माह तक रहते थे. संयोग की बात है की जिस कमरे में मोदी जी रहते थे वो, कमरा मेरे कमरे के बगल में ही था.


फिर पुजारी ने रिपोर्टर को बताया था कि उन डेढ़ महीने के समय के दौरान नरेंद्र मोदी की दिनचर्या थी कि वह रोजाना केदारनाथ धाम के दर्शन और पूजा करने केदारनाथ मन्दिर जाते थे. फिर केदारनाथ मन्दिर से वापस आने के बाद हम लोगों के साथ मोदी जी की चर्चा का एक मात्र केंद्र धर्म और अध्यात्म ही होता था.

उक्त पुजारी ने बताया था की 10-12 वर्षों के समय में में गरुण चट्टी में रहते हुए कभी भी मोदी जी ने राजनीति पर बात करते हुए किसी ने भी नहीं देखा और ना सुना था. पुजारी ने बताया कि उस वक़्त हमने स्वप्नसपने में भी यह नहीं सोचा था कि वह भक्त बाद में गुजरात का मुख्यमंत्री या भारत का प्रधानमंत्री बनेगा.

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