आखिर हवाई जहाज़ के टायर लैंडिंग के दौरान क्यों नहीं फटते, ऐसे हज़ारों टन वज़न कण्ट्रोल होता है

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Airplane Tires Punchar
Why airplane tires filled with nitrogen in Hindi. Why Airplane Tires Don't Explode on Landing. How do an Airplane's Tires Help It Land Safely. Airplane Tires Are Made of Conductive Rubber which is very strong.

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Bhopal: हम अपने जीवन भर एक चीज़ से बहुत परेशान रहे हैं, टायरों के फटने और पंचर (Puncture) होने से। जब हम छोटे बच्चे थे, तब हमारी साइकिल के टायर बार बार पंचर हो जाय करते थे। कभी कभी कोई शैतान बच्चा जान बूझकर भी हमारी साइकिल की हवा निकाल देता या टायर पंचर कर देता था। फिर बाइक या स्कूटी भी चलाई। यहाँ भी कई बार गाडी के टायर पंचर (Puncher) हो गए। यहाँ तक के कभी कभी हमारी कार के टायर भी पंचर हो जाते या फैट जाते हैं।

ऐसे में क्या होगा, जब किसी हवाई जहाज़ का तैर पंचर हो जाये या फ़ट जाएँ। ऐस एकै बार दिमाग में ख़याल आया है, जो हवाई जहाज़ की यात्रा करने में भय सा पैदा हो जाता है। आपने सैंकड़ो टन के हवाई जहाज़ को 250 km/h से ज़्यादा की स्पीड से लैंड करते हुए भी देखा होगा। परन्तु आपने कभी भी हवाई जहाज़ के टायरों के फटने की खबर नहीं सुनी होगी, यह हम दावे के साथ कह सकते हैं।

आपको बता दें की हवाई जहाज़ या विमान के टायरों (Airplane Tires) को इतना मज़बूत बनाया जाता है कि केवल 1 टायर ही 38 टन वज़न संभाल सकता है। इसके अलावा एक टायर से बस 500 बार टेकऑफ़ और लैंडिंग (Takeoff and Landing) किया जाता है, फिर दूसरे नए टायर बदल दिए जाते हैं। टायर पर फिर से ग्रिप (New Grip) चढ़ाई जाती है, ताकि वो 500 बार और इस्तेमाल किये जा सकें।

हवाई जहाज़ के टायर (Airplane Tire) पर ग्रिप सिर्फ़ 7 बार चढ़ाई जा सकती है, मतलब एक टायर से कुल 3500 बार टेकऑफ़ या लैंडिंग होती है। उसके बाद वो टायर एक बेकार सामन हो जाता है। फेंक दो या स्टोर में दाल कर भूल जाओ वाला सामान।

Rafale Jet

आपको जानकर हैरानी होगी की विमान के टायरों में ट्रक के टायरों से 2 गुणा और कार के टायरों से 6 गुणा ज़्यादा हवा भरी जाती है। इनमें 200 PSI तक हवा भरी जाती है, क्योंकि जितना ज़्यादा एयर प्रेशर रहेगा, उतना ज़्यादा मज़बूत टायर रहेगा। यह कभी पंचर भी नहीं होते हैं।

अब अगर टायर में हवा भरने की बात हो रही है, तो जान लो की विमान के टायर में साधारण हवा नहीं भारी जाती है। इनमे नाइट्रोजन गैस (Nitrogen Gas) भरी जाती है, ताकि टायरों पर बदलते प्रेशर और तापमान का असर कम से कम हो। इन टायरों में ब्लॉक डिज़ाइन के ग्रिप के बजाय ग्रूव डिज़ाइन होते हैं, वो इसलिए होते है, जिससे हवाई जहाज भीगे हुए रनवे पर भी सफलता पूर्वक उतर सके।

विमान के टायर ख़ास सिंथेटिक रबर कंपाउंड्स, नायलॉन और अरामिड फ़ैब्रिक्स से बने होतें हैं, जिन्हें Aluminium और Steel से रीइंफ़ोर्स किया जाता है। मतलब जब भी आप हवाई जहाज़ में यात्रा करें तो प्लेन के पहियों की चिंता ना करें। क्योंकि आपकी जान तो पायलेट के हांथो में हैं ज़नाब। बस आप यह दुआ करें की उड़ान के वक़्त मौसम अच्छा हो। खराब मौसम में वैसे भी हवाई यात्रा खुद ही एयरलाइन्स स्थगित कर देती है।

हाल ही में मीडिया और सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जहाँ देखा गया की 200 यात्रियों के लेकर एक हवाई जहाज़ लैंडिंग के वक़्त कुछ खराबी के कारण डगमगा गया और उसकी लैंडिंग बहुत ही बुरी तरह से हुई। नीचे वीडियो में आप देख सकते हैं की इस वक़्त हवाई जहाज़ में टायरों पर कितना जोर पड़ा होगा। फिर भी टायर तुके रहे और किसी भी प्रकार की हानि नहीं हो पाई। सभी यात्री भी सुरक्षित निकल गए।

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