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Delhi: भारतीय संस्कृति में गाये को गऊ माता कहा गया है। यहाँ गऊ माता को माँ मानकर पूजा जाता है। एक वक़्त था जब भारत में लोग इस बात से धनवान और रहीस समझे जाते थे की जिसके पास कितनी गाये हैं और कितना दूध देती हैं। परन्तु आज कल यह देखा जाता है की किनके पास कितनी और कोनसी कार या गाड़ी है। जमाना बदल गया और लोग बदल गए। परन्तु कोरोना संकट ने भारत और दुनिया को गऊ पालन और खेती किसानी का महत्व समझा दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक सम्बोधन ने कहा था की गऊ सेवक (Gau-sevak) अलग होता है। आज हम आपको एक रियल गऊ सेवक (Real Gau-sevak) के बारे में बताने जा रहे है। भारत में गौ सेवा करने वाली जर्मन महिला Friederike Irina Bruning (फ्रेडरिक इरिना ब्रूनिंग) अब सुदेवी दासी के नाम से जानी जाती है। वे कई सालों से भारत में रहकर गऊ सेवा कर रही है। अब सुदेवी दासी (Sudevi Dasi) को भारत में रहने के लिए एक मुसीबत आन पड़ी है।
जर्मन महिला (German woman Sudevi Dasi) भारत में 19 वर्ष की युवा उम्र में 1977-78 भारत आई थी और 1981 में राधाकुंड में रहने लगी। यहाँ रहते हुए इरिना ने भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म से प्रभावित हो गई और अपना नाम सुदेवी दासी करवा लिया। फिर यही रहते हुए गऊ सेवा में लग गई। उनके अनुसार भारत में रहकर गऊ सेवा ही उनके जीवन का अब उद्देश्य है।
Mathura: German woman Sudevi Dasi takes care of injured cows and also runs an ambulance service for them pic.twitter.com/NXJpxh9xoX
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) September 19, 2017
आपको बता दे की इरिना फ्रेडरिक ब्रूनिंग (Friederike Irina Bruning) जर्मनी के अपने स्वयं के घर को किराए पर चला कर, जो रुपये हासिल करती हैं, उनसे बृज में बेसहारा और रोगी गाये की देखभाल करती हैं। भारत सरकार ने सुदेवी के इस काम के लिए उन्हें 2019 में भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म श्री से सम्मानित भी किया था।
खबर है की सुदेवी दासी लगभग 40 वर्षों से गौ-सेवा कर रही है, परन्तु वे भारत की नागरिक नहीं हैं। सुदेवी दासी वीज़ा के ज़रिये भारत में इतने समय से रह रही हैं। अब खबर आई है की एरिना अर्थात सुदेवी दासी के दीर्घकालिक वीजा आवेदन को भारत सरकार ने अब रिजेक्ट कर दिया गया है। उनका वीज़ा कुछ ही दिनों में समाप्त होने वाला है। ऐसे में वे दीर्घकालिक वीजा देने के लिए भारत सरकार ने आग्रह कर रही हैं।
@SushmaSwaraj ji, Just received the heartbreaking news that Sudevi Dasi aka. Friederike Irina Bruning was denied a visa. She lives in Radha Kund, Mathura, and cares for hundreds of sick and injured cows. Please help. News story here: https://t.co/GpmABdxUUP pic.twitter.com/D2bUPwfblq
— V Ramos (@vishakharamos) November 5, 2017
इससे पहले भी 2019 में एरिना (Friederike Irina Bruning) अर्थात सुदेवी को भी वीजा ख़त्म होने पर दिक्कत आई थी, तब मथुरा की भाजपा सांसद हेमा मालिनी और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज नें उनकी सहायता करते हुए उनका वीजा एक वर्ष के लिए इनक्रीस कर दिया था। परन्तु इस बार उन्हें काफी परेशानी आ रही है।
#Demonetisation Dec12, 2016. Helpless Sudevi Dasi, a gau-sevak who stayed back in Braj to tend to cows. (via @free_thinker) pic.twitter.com/aBAmL5j6dY
— _Demonetisation (@_Demonetisation) January 18, 2017
सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक़ इस समस्या के अलावा उन्हें कुछ असामाजिक तत्व भी दिक्कत देते रहते है, वे उन्हें गोशाला खाली करने के लिए दबाव बनाते रहते हैं। अब वे उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और विदेश मंत्रालय से अपनी गुहार लगा रही है की उन्हें ज्यादा समय वाला वीजा उपलब्ध करवाया जाये। उनके जाने के बाद उनकी गाये बेसहारा हो जाएँगी।



