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Delhi: भारत में कोरोना वायरस को और अधिक बढ़ाने का ज़िम्मेदार तब्लीग़ी जमात को माना जा रहा है। अब तबलीगी जमात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने कहा है कि यह जहालत फैलाकर एक विशेष समाज को 1400 साल पीछे ले जाना चाहते हैं।
दिल्ली में तबलीगी जमात के एक कौमी कार्यक्रम हज़ारिन लोग जमा हुए और उनमें से अनेक लोग एकम दूसरे के संपर्क में आए, इनके बाद बहुत लोगों को कोरोना वायरस ने अपनी गिरफ्त में लिया। इस मसले पर तसलीमा नसरीन ने एक इंटरव्यू में कहा, ‘मैं अभिव्यक्ति की आज़ादी में भरोसा करती हूं, परन्तु कई बार इंसानियत के लिए कुछ चीजों पर प्रतिबंध लगाना जरूरी है।
यह जमात एक विशेष सम्प्रदाय के लोगो को 1400 साल पुराने अरब दौर में ले जाना चाहती है। आपको बता दें की तस्लीमा हमेशा ही विवादों से घिरी रही है और वे एक डॉक्टर भी है। उन्होंने बांग्लादेश के मैमनसिंह में मेडिकल कॉलेज से 1984 में MBBS की डिग्री हासिल की थी।
बांग्लादेश: धार्मिक नेता के जनाजे में उमड़ी भीड़, तसलीमा नसरीन ने बताया बेवकूफ pic.twitter.com/NnHDy7qu4T
— Slnews9 official (@bomovie365) April 19, 2020
आपको बता दें की तब्लीग़ी जमात का सरगना मौलाना साद अभी भी गिरफ्त से बाहर है। प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली में निजामुद्दीन मरकज के मौलाना साद के खास लोगों से पूछताछ के बाद उनके बयान दर्ज किए हैं। अब ईडी ये जानना चाहती है कि मरकज को मिलने वाले फण्ड का हिसाब-किताब कौन रखता है, कहां से किस तरीके से मरकज को फंड मिलता है।
खबर के अनुसार तब्लीग़ी जमात मरकज और मौलाना साद को मिलने वाली फंडिंग की जानकारी के लिए ही 21 अप्रैल को मौलाना साद के 2 लोगों के बयान लिए गए थे, जिसके बाद 22 अप्रैल को कुछ लोगों से पूछताछ भी हुई थी। ईडी को अभी तक की अपनी जांच में पता चला है कि विदेशों से मिलने वाली अधिकतर फंडिंग इंडोनेशिया और मिडल ईस्ट से होती थी। 2041 विदेशी लोग मरकज से जुड़े हुए हैं।
Tablighi Jamaat case: Accused Maulana Saad writes to the Delhi Police, demanding a copy of FIR in connection with an event at Markaz mosque. "Kindly inform me if any new section has been added in the FIR. I am always ready & willing to cooperate in the investigation," he writes.
— ANI (@ANI) April 17, 2020
इन सबके चलते ईडी ने हवाला अर्थात मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था, उसी के बाद ये पूछताछ की गई। दिल्ली पुलिस ने छापेमारी में जो दस्तावेज जब्त किए थे, उसकी जानकारी भी ED को दी गई है। मौलाना साद के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली स्थित फार्म हाउस पर सीबीआई ने छापा मारा था। क्राइम ब्रांच की टीम ने करीब डेढ़ घंटे चली कार्रवाई में फार्म हाउस की जांच की और मौलाना के परिजनों से भी पूछताछ की थी।
ईडी को अपनी इस नई जांच में जानकाररी मिली है की ये सभी विदेशी भारत आने के बाद सीधे तब्लीग़ी मरकज में आते थे और विदेशी करेंसी में डोनेशन देते थे, जो हवाला के जरिये मरकज को मिलती थी। ये पैसा निज़ामुद्दीन के बैंकों में जमा हो जाता था, जिसके बाद सारा पैसा अन्य 11 बैंक खातों में ट्रांसफर होता था।
Nizamuddin Markaz chief Maulana Saad hires team of lawyers to file bail pleas after refusing to surrender.https://t.co/s6PCAuDXoJ
— TIMES NOW (@TimesNow) April 21, 2020
इन सभी बैंक अकाउंट्स को मौलाना साद के खास लोग और रिश्तेदार हैंडल करते थे। ईडी की नजर अब इन सभी लोगों पर है। ईडी की जांच के अंडर में 849 विदेशी भी हैं, जो मार्च में भारत आए थे और तब्लीग़ी मरकज से निकलने के बाद देश के अलग-अलग राज्यों में अपने रिश्तेदारों से मिलकर मरकज के लिए फंड जुटाने चले गए थे। वैसे यह फण्ड किस मकसद से जुटाया जा रहा था, यह भी जाँच का विषय है।



