Parle G खिलाफ India For Children संस्था का विरोध प्रदर्शन, बाल मज़दूरी नहीं सहेंगे

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पिछले सप्ताह छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बिस्किट की सबसे बड़ी कंपनी पार्ले-जी (Parle-G) की एक फैक्ट्री में काम कर रहे बाल मजदूरों को बचाया गया था. यहाँ बिस्किट कंपनी की फैक्ट्री में काम कर रहे 26 बच्चों को छुड़ाया गया था. खबरों की मानें तोह जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने कहा कि जिला कलेक्टर के आदेश अनुसार अभियान चलाया गया और पार्ले-जी बिस्किट ब्रांड की फैक्ट्री से 26 कुल बच्चों को छुड़ाया गया, जो वहां बाल मजदूरी कर रहे थे.

इन बच्चो की आयु 12 से 16 साल के बीच थी, जो ओडिशा, झारखंड, और बिहार के यहने वाले बताये गए हैं. इस बच्चो को न्याय और उनका हक़ दिलाने के लिए एक संस्था ने कमर कस ली है. India For Children नाम से जाने वाली वाली संस्था बच्चो के उद्धार के लिए काम करती है और दिल्ली में संस्था के माध्यम से पार्ले कंपनी के खिलाग विरोध जताया गया.

इंडिया फॉर चिल्ड्रेन संस्था की मांग है की Parle-G पूरे देश से माफ़ी मांगे, Parle-G रायपुर CG स्थित फैक्ट्री से छुड़ाये गए सभी 26 बच्चों की शिक्षा का सारा खर्च उठाये. इसके साथ ही नई दिल्ली, 23 जून, 2019 जंतर-मंतर में भारी संख्या में एनजीओ, मानवधिकार कार्यकर्ता, विद्वान पत्रकार, अन्न लोग और समाज के प्रभावशाली व्यक्ति इंडिया फॉर चिल्ड्रेन द्वारा आयोजित सभा में शामिल हुए, जिसका उद्देश्य 14 जून, 2019 को पुलिस द्वारा Parle-G के रायपुर स्थित फैक्ट्री से छुड़ाये गए 26 बाल श्रमिकों को उनका हक़ दिलाना था.

इन सभी ने मांग कि ‘Parle-G को पूरे देश से माफ़ी मांगनी चाहिए और अपने फैक्ट्री से छुड़ाये गए 26 बच्चों की शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण का पूरा खर्च उठाना चाहिए. इसके अलावा Parle-G को ऐसे सख्त कदम उठाने चाहिए, जिससे कि दोबारा ऐसी घटना आहे ना हो सके. NGO ने बताया की 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में 10.1 मिलियन से भी अधिक बाल मजदूर हैं.

यह घटना बेहद ही अमानवीय है कि Parle-G जैसी बड़ी कंपनिया भी इस अपराध को खुद करवा रही है. जिस उत्पाद के सबसे बड़े ग्राहक बच्चे हो, वो कंपनी उन्ही बच्चो के शोषण में लिप्त है. संस्था ले लोगो ने कहा की सोशल मीडिया और मीडिया को दिया हुआ पार्ले-G का जवाब सबसे दुर्भाग्यपूर्ण है. पार्ले जैसे ब्रांड्स को स्पष्ट रूप से पता होना चाहिये कि उनके सप्लाई चेन में कौन काम कर रहा है.
https://www.facebook.com/India4Children/videos/2380103322263966/
हमारा Parle-G के साथ ही साथ अन्य कंपनियों से भी निवेदन है कि वे ऐसे सख्त कदम उठाये कि दोबारा कभी किसी बच्चे का बचपन उनकी फैक्ट्री में न पिसे. इंडिया फॉर चिल्ड्रेन, 2017 में शुरू किया गया यह अभियान बच्चों के हित के लिए भारत का सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफार्म है, जिससे 40 लाख से भी ज़्यादा लोग जुड़े है. इसका लक्ष्य है कि बच्चों के हक़ से जुड़े सभी हितधारी इस प्लेटफार्म के माध्यम से एक होकर बच्चों के लिए भारत को बेहतर बना सके.

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