महाशिवरात्रि पर भक्तो में ज़बरदस्त उत्साह, भारी त्रिशूल कंधे पर ले जाने से भोलेनाथ का आशीर्वाद मिलता है

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Chauragarh Mahadev Temple Pachmarhi Tour

Pachmarhi, Madhya Pradesh: महाशिवरात्रि (Mahashivratri) 2020 बेहद ही खास है और इस बार की महाशिवरात्रि पर भक्तों में ख़ासा उत्साह देखा जा रहा है। महाशिवरात्रि (Mahashivratri) हिन्‍दू धर्म के प्रमुख त्‍योहरों में से एक है। भोलेनाथ भक्‍त अपने आराध्‍य भगवान् शिव की विशेष आराधना के लिए साल भर इस दिन का इंतज़ार करते हैं। महाशिवरात्रि के दिन शिवालयों में शिवलिंग पर जल, दूध और बेल पत्र चढ़ाकर भक्‍त शिव शंकर को प्रसन्‍न करने की कोशिश करते हैं।

माना जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन जो भी भक्‍त सच्‍चे मन से शिविलंग का अभिषेक करके जल चढ़ाते हैं, उन्‍हें भोलेनाथ की विशेष कृपा मिलती है। माना जाता हैं कि भगवान् शिव इतने भोले हैं कि अगर कोई ऐसे भी शिवलिंग की पूजा कर दे, तो उसको भी भगवान् शिव की कृपा प्राप्‍त हो जाती है।

आपको ज्ञात हो कि हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन आने वाली शिवरात्रि को केवल शिवरात्रि कहा जाता है। दूसरी ओर फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी के दिन आने वाले शिवरात्रि (Shivratri) को महाशिवरात्रि कहा जाता हैं। साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।

Mysterious Shiva Temples

शिवरात्रि मनाए जाने का कारण प्राचीन मान्‍यताएं हैं। पौराणिक मान्‍यता के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन ही विभन्नि 64 जगहों पर शिवलिंग उत्‍पन्न हुए थे। परन्तु 64 में से केवल 12 ज्‍योर्तिलिंगों के बारे में जानकारी प्राप्त है। इन्‍हें 12 ज्‍योर्तिलिंग के नाम से जाना जाता है। महाशिवरात्रि की रात को ही भगवान शिव शंकर (Lord Shiva) और माता शक्ति का विवाह संपन्न हुआ था।

पौराणिक मान्‍यता के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन ही शिव जी पहली बार प्रकट हुए थे। कहा जाता है कि भगवन शिव अग्नि ज्‍योर्तिलिंग के रूप में प्रकट हु थे, जिसका न आदि था और न अंत था। इस शिवलिंग के बारे में जानने के लिए सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा ने हंस का रूप धारण किया और उसके ऊपरी भाग तक जाने की कोशिश करने लगे, किन्तु उन्‍हें सफलता प्राप्त नहीं हुई। फिर सृष्टि के पालनहार विष्‍णु ने भी वराह रूप धारण कर उस शिवलिंग का आधार ढूंढना शुरू किया, लेकिन वो भी असफल रहे।

महाशिवरात्रि पर पूरे देश के लोगो में बहुत उत्साह देखा जा रहा है। “एक नंबर न्यूज़” डॉट कॉम के एडिटर ने मध्यप्रदेश के मंडला से पचमढ़ी (Mandla To Pachmarhi) तक Bholenath शिव भक्तों से बाते की और जाना की वो इस बार महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2020, 21 Feb) पर कितना उत्साहित है। अनेक भक्त शिवनगरी कही जाने वाले मध्यप्रदेश के एक मात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी में अपने आराध्य भोलेनाथ के दर्शन और पूजन करने आते हैं।

Chauragarh Mahadev Temple Pachmarhi
Presentation Image

ऐसे में पचमढ़ी (Pachmarhi, Madhya Pradesh) में भगवान् शिव के अनेकों दर्शन पॉइंट है, जिनमे जटाशंकर मंदिर, गुप्त गुफा, बड़ा महादेव और चौड़ागढ़ महादेव पहाड़ी मंदिर प्रमुख है। चौड़ागढ़ महादेव मंदिर (Chauragarh Mahadev Temple Pachmarhi) ऊँचे पहाड़ में है और यहाँ लोग बड़े बड़े त्रिशूल गाड़कर अपने आराध्य भगवान् शिव को प्रसन्न करते है।

पचमढ़ी में पूरे साल में 2 बड़े मेले लगते है, महाशिवरात्रि पर चौरागढ़ मंदिर और नागपंचमी पर नागद्वारी गुफा में भोले शंकर के दर्शन और पूजन के लिए लाखो भक्त उमड़ते है। यहाँ पर भोलेनाथ भक्त एक क्विंटल तक के भारी वजन के त्रिशूल कांधे पर लेकर चौरागढ़ मंदिर पहुंचते है। समुद्री तलहटी से करीब 4200 फीट की ऊंचाई पर चौरागढ़ शिव मंदिर स्थित है। 325 सीढिय़ां चढ़कर भक्त मंदिर तक भोलेनाथ के दर्शन करने पहुंचते है।

Chauragarh Mahadev Temple Pachmarhi Tour

यहाँ लगे मेले में त्रिशूल लेकर मंदिर आने जाने वाले भक्तो के अनुसार भोले शंकर से मन्नत मांगने के बाद, उनके नाम का त्रिशूल अपने घर ले जाते है, साल भर त्रिशूल का पूजन घर में करते है। महाशिवरात्रि पर त्रिशूल कांधे पर रखकर पैदल भोले शंकर के दरबार पहुंच कर त्रिशूल चढ़ा देते है, ऐसा करने से भक्तों की सभी विश भोले शंकर पूरी कर देते है।

Chauragarh Mahadev Mandir Pachmarhi info

एक पौराणिक मान्‍यता के अनुसार कहा जाता है कि भस्मासुर से बचने के लिए भोले शंकर ने पचमढ़ी की चौरागढ़ की पहाडिय़ों में शरण ली थी और वहां पर भगवान् शंकर का एक त्रिशूल भी है। कहा जाता है की एक बाबा ने वर्षों पहाड़ी पर तपस्या की। जिसके बाद भगवान शंकर ने उन्हें दर्शन दिए और कहा कि बाबा के नाम से यहां भोले जाने जाएंगे। तभी से पहाड़ी की चोटी का नाम बाबा के नाम पर चौरागढ़ रखा गया। इस दौरान भोलेनाथ अपना त्रिशूल चौरागढ़ में छोड़ गए थे। उस समय से यहां त्रिशुल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई है।

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