Image Credits: Uday India Magazine on Twitter
देश की बेटी और महिलाओं के साथ हो रहे अन्याय को देख सभी लोगो मे रोष की भावना पैदा हो गई। गुनहगारों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही की मांग उठ रही है। हैदराबाद की महिला डॉक्टर को आरोपियों ने अपना शि’कार बनाकर बॉडी को पूरी तरह जला दिया था। जिसमे बेटी की जान चली गई थी। हैदराबाद Case में आरोपियों को 16 दिन के अंदर ही ढेर कर दिया था।
2012 में निर्भया के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। निर्भया को अपना शि’कार बना लिया था आरोपियों ने। जिनको आज तक फां’सी की सजा नही मिल पाई है। लोगो मे आ’क्रोश इतना बढ़ गया है कि हर कोई उनकी फां’सी की मांग कर रहा है। कुछ दिन पहले खबर आई थी कि जेल में जल्लाद ना होने के कारण आरोपियों को फां’सी नही दी जा पा रही है।
इस बात को सुनते ही कुछ समाजकर्ता और सामान्य लोगो ने जल्लाद बहन के लिए राष्ट्रपति को खत भी लिखा था। कि जल्लाद की जगह खाली होने पर उनको जल्लाद की जगह पर नोकरी दी जाए, जिससे वो अपनी देश की बेटी के गुनेगारो को फां’सी की सजा दे कर उसकी आत्मा को शांति दे सके।
गुनहगारों ने अपनी दया याचिका के लिए राष्ट्रपति से गुहार लगाई थी
गुनहगारों ने अपनी दया याचिका के लिए राष्ट्रपति को खत लिखा था, जिसमे अपनी दया की गुहार लगाई है। लेकिन सभी इसको खारिज करने को बात कर रहे है। अब राष्ट्रपति इस दया को जैसे ही खारिज करते है फिर उनकी फांसी की तैयारियों शुरू हो जाएंगी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जल्द ही तिहाड़ जेल में बंद निर्भया के गुनेगारो को फांसी की सजा मिल सकती है।
Nirbhaya 2012 accused victim.
What a hero????
Jim facility with mutton chicken and daily four eggs.. What a deal in Jail. #NirbhayaCase pic.twitter.com/1RA05kJWDa— *सौरभ * (@Saurabh18684) December 8, 2019
One Of Nirbhaya Case Convict Image Tweeted by User.
तिहाड़ जेल सबसे अधिक सुरक्षित समझा जाता है। जिस दिन दोषियों को फां’सी की सजा दी जाती है, उस दिन सुरक्षा कड़ी कर दी जाती है। फां’सी देने के बाद ही दूसरे जेलों को खोला जाता है। जेलों का खुलने का समय 5 के बाद ही होता है, लेकिन जिस दिन फांसी दी जाती है, उस दिन जेलों को लेट खोला जाता है। हर सेंट्रल जेल में फंसी घर बनाया जाता है।
Vinay Sharma, one of the convicts in #Nirbhayacase moved a plea before President of India seeking immediate withdrawal of his mercy petition as he claims that the mercy plea sent to the President by Union Home Ministry wasn't signed and authorized by him. pic.twitter.com/AxFLwgf8Aj
— Uday India Magazine (@Udayindiaonline) December 7, 2019
सेंट्रल जेल में कड़े बंदोबस्त किए जाते है। पहले आरोपियों को फां’सी होनी थी, लेकिन अब 2018 से नियम बदल गए है। अब आरोपियों को 15 दिन के अंदर बताया जाता है कि उसे सजा किस दिन होना है। नए कानून के तहत ब्लैक वॉरन्ट की कॉपी प्रिजनर को भी सौपी जाती है। फां’सी देने के बाद उसका पोस्ट’मार्टम किया जाएगा।
सजा से पहले CCTV से निगरानी की जाती है
गुनहगारों पर कड़ी नजर रखी जाती है। CCTV कैमरा से निगरानी रखी जाती है कि अंतिम समय वो किसी प्रकार से खुद को हानि ना पहुचाये। आखिरी समय वंहा मौजूद SDM दोषियों से आखिरी इच्छा जनता है। मेडिकल अफसर बॉडी को देखकर तय करता है कि इसकी लाइफ समाप्त हो चुकी। फां’सी देने के बाद ये तय किया जाता है कि घर वालो को बॉडी दी जाएगी या नही। यदि किसी प्रकार की सुरक्षा को नुकसान पहुचता है, तो शव नही दिया जाता है। फां’सी देने से पहले कैदी को आखिरी बार चाय पिलाई जाती है।



