हरियाणा की बेटी दीक्षा मदान ने जज बनकर किया नाम रौशन: Deeksha Madaan Judge Story

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Deeksha Madaan Judge Haryana
Haryanas daughter Deeksha Madan got third rank in Rajasthan Judicial Service Exam 2018. The Haryana Daughter Deekha Madaan Success Story of Judge Exam.

हरियाणा सेक्टर-29 निवासी दीक्षा मदान ने राजस्थान न्यायिक सेवा की परीक्षा तीसरे पायदान के साथ पास कर औद्योगिक जिला फरीदाबाद, पड़ोसी जिला पलवल और हरियाणा राज्य के लिए बनी मिसाल। हुनार से भरपूर दीक्षा मदान हैफेड में सहायक की Post पर कार्य कर रहे अशोक मदान व जिला अदालत में स्टेनो के Post पर कार्य कर रही नीलम मदान की बेटी हैं।

दीक्षा पर माता पिता को गर्व है। दीक्षा के माता पिता ने एक दोस्त बनकर दीक्षा का हर पल साथ दिया। हर दम उसका हौसला बढ़ाते रहे। उसके हौसले को कभी कम नही होने दिया। पलवल के कैंप कॉलोनी-बाली नगर में रहने वाले अशोक-नीलम मदान ने कुछ सालो पहले फरीदाबाद में ही अपना घर ले लिया था। पलवल में दीक्षा का जन्म हुआ था, पर उन्होंने अपनी 12वीं तक की शिक्षा सेक्टर-46 स्थित आयशर पब्लिक स्कूल से ही पूरी की थी।

दीक्षा ने 2014 में 12वीं की परीक्षा 95 प्रतिशत अंक के साथ पास की थी। दीक्षा का कहना है कि उनको न्यायिक सेवा में आने की सलाह अपनी माता नीलम से मिली थी। इसीलिए उन्होने 12वीं को अच्छे नम्बर से पास करके डायरेक्ट गुरु गोबिंद सिंह IPA यूनिवर्सिटी में LLB में दाखिला लेकर वकालत की पढ़ाई Start कर दी। पढ़ाई के साथ साथ दीक्षा ने मशहूर जजों की स्टोरी पड़कर उनसे प्रेरणा ली। उनके फैसले लेने के तरीकों का विश्लेषण कर दीक्षा में जज बनने की इच्छा और मजबूत हो गई।

दिक्षा ने इसी साल राजस्थान न्यायिक सेवा Exam देने का निर्णय किया और अपने इस कोशिश से दीक्षा को कामयाबी हासिल हुई। अब अध्ययन के बाद 23 साल की टेलेंटड दीक्षा राजस्थान की अदालत में जज की कुर्सी पर बैठ कर इंसाफ करती हुई दिखाई देंगी।

मीडिया से बातचीत के दौरान दीक्षा मदान ने बताया कि कहीं भी किसी भी बात को लेकर इंसाफ नही होता है, तो उनके दिल मे बहुत दर्द होता है। वो किसी के साथ अन्याय नही देख सकती। उनके मन मे उस टाइम विचार आता है कि अगर उनके वश में कुछ होता, तो ऐसा कभी होने नही देती। इसी विचार के साथ उनको आगे बढ़ने की राह मिलती चली गई।

उन्होंने कड़ा परिश्रम कर अपने सपनो को पूरा किया। जब उन्होंने प्रण कर लिया तो कोई भी कठिनाई उनके रास्ते का कांटा नही बन पाया, हर कठिन से कठिन परिस्थितियों का मुँह तोड़ जवाव दिया। दीक्षा ने बताया कि वो रोज आठ घंटे तक पढ़ाई करती थी। दीक्षा को पूरा भरोसा था कि उनके पेपर अच्छे गए है।

उनको अपने ऊपर पुट विश्वास था कि एग्जाम क्लियर कफ लेंगी, पर उनको खुद पर इतना भरोसा नही था कि Top थ्री में अपना नाम शामिल कर पाएंगी। दीक्षा ने अपनी कामयाबी का राज खुद कड़ा परिश्रम और अपने माता-पिता के साथ इंजीनियर बहन पूजा को दिया। जिन्होंने हर वक्त उनका हौसला बढ़ाया।

दीक्षा मदान ने बताया प्रधानमंत्री मोदी द्वारा चलाया गई योजना बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ ने बेटियों के होसलो में उड़ान भर दी है। मैं खुद इस बात साक्षत प्रमाण हूं। मेरे माता-पिता ने मुझे पढ़ाया, इतना सक्षम बना दिया कि में अपने भविष्य का सोच सकूँ। मेरे माता पिता ने मेरी पढ़ाई को लेकर कभी कोई पाबंदी नही लगाई, हमेशा मेरा हौसला बढ़ाते रहे।

मेरे माता पिता से ही मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। मेने अपनी इच्छा अनुसार अपने क्षेत्र में कदम रखा। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा चलाई गई योजना का साक्षत परिणाम है राजस्थान न्यायिक सेवा का नतीजा है, जिसमें 50 प्रतिशत से अधिक लड़कियां ने बाजी मारी। पढ़ी-लिखी सुशिक्षित लड़कियों के लिए अपना भविष्य उज्ज्वल बनाने की किरण है यह योजना।

दीक्षा मदान ने बताया कि मेरी उन सभी माता पिता से विनती है। अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा दे और उन्हें बिना किसी पाबन्दी के आगे बढ़ने दे। बेटियों का कर्तव्य है कि अपने माता-पिता का भरोसा कायम रखते हुए कड़ा परिश्रम कर उनके सपनों को पूरा करे।

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