उत्तरप्रदेश उपचुनाव में मौन रहकर अखिलेश यादव ने दिखाया मायावती को आईना: BSP Vs SP

0
403

Photo Credits: Mayawati Photo From ANI

Lucknow: लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे आने के बाद जिस तरह से बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए गठबंधन नही करने का फैसला ले लिया था। अब उसका पलटवार करते हुए समाजवादी पार्टी ने उत्तरप्रदेश उपचुनाव में उसका करारा जबाब दिया है।

BSP अध्यक्ष मायावती के आरोपों पर कुछ ना बोलते हुए यह साबित कर दिया है कि 2022 में उनकी पार्टी ही भाजपा का मुकबला करने में सक्षम होगी। उन्होंने ये भी कहा कि अगर वर्ष 2022 में अगर गठबंधन की आवश्यकता पड़ी तो वो भी समाजवादी पार्टी के नियमो पर होगी। मायावती के आरोपों पर प्रतिक्रिया न देकर मौन रहते हुए अखिलेश यादव ने यह बता दिया कि 2022 में भाजपा का सामना करने का दम है उनकी पार्टी में।

UP 11 सीटों पर उपचुनाव हुए

21 अक्टूबर को राज्य की जिन 11 सीटों पर उपचुनाव हुए थे। उनमें से समाजवादी पार्टी ने 2017 के विधानसभा चुनाव में केवल रामपुर की सीट पर जीत दर्ज की थी। उपचुनाव में SP ने न सिर्फ रामपुर सीट पर अपना कब्जा किया बल्कि भाजपा से बाराबंकी की जैदपुर सीट भी अपने नाम कर ली। वहीं BSP का ताकतवर किला कहे जाने वाले जलालपुर सीट को भी उनसे छीन लिया।

उपचुनाव में भाजपा को 8 और समाजवादी पार्टी को 3 सीटों पर जीत दर्ज हुई है। इतना ही नहीं समाजवादी पार्टी चार सीटों पर दूसरे पायदान पर रही। BSP पार्टी ने तो एक भी सीट पर जीत हासिल नही की और केवल अलीगढ़ की इगलास और जलालपुर सीट पर ही दूसरे पायदान पर आ सकी।

SP-BSP गठबंधन तोड़ने का फैसला लिया

लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे आने के बाद SP-BSP गठबंधन को अपने अनुसार सीटें न मिलने के बाद मायावती ने गठबंधन को तोड़ने का फैसला कर लिया था। उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि उनका अपने परंपरागत यादव Vote पर ही पकड़ मजबूत नही है।

BSP अध्यक्ष मायावती ने यह भी कहा था कि अखिलेश यादव ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारने के खिलाफ भी प्रदर्शन किया था। इन आरोपों के चलते हुए अखिलेश यादव ने मायावती के विरुद्ध कुछ नहीं कहा। वो शांत सुनते रहे। उपचुनाव के नतीजे से यह साबित होता हैं कि अगर गठबंधन न होता तो BSP 10 सीटें भी अपने नाम नही कर पाती।

UP elections 2022 में भाजपा का मुकाबला समाजवादी पार्टी से होगा

राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार से मिली जानकारी के मुताबिक बताया जाता है कि लोकसभा चुनाव 2019 अगर अखिलेश यादव बिना किसी का साथ लिए लड़े होते तो परिणाम कुछ और होता। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि 2022 के मैदान में भाजपा का मुकाबला समाजवादी पार्टी से ही होगा।

यह उपचुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि 2022 में भाजपा के खिलाफ गठबंधन अगर सम्भव होता भी है तो वो कैसा होगा और किसके आधिकारिक में होगा। उन्होंने कहा कि अब गठबंधन समाजवादी पार्टी के आधिकारिक में उनके ही नियमो पर होगा। इस जीत से अखिलेश यादव मजबूत दिखाई दिए हैं और पार्टी नेताओं का मनोबल में बढ़ोत्तरी हुई है, लेकिन भाजपा से मुकबला करना अभी भी कड़ी चुनौती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here