दशकों से चल रहा अयोध्या का रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद Case अब अपने आखिरी चरण में है। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को इस विवादित मामले पर अंतिम बहस हो गई है, दोनों ही पक्षों की तरफ से आखिरी दलीलें रखी गई। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने स्पष्ट कर दिया है कि सुनवाई बुधवार शाम पांच बजे खत्म हो गई है।अब इसमें किसी भी प्रकार की कोई बात नही की जाएगी।
वहीं उन्नाव से बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने कहा है कि 6 दिसंबर से राम मंदिर का बनना प्रारम्भ हो जाएगा। दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट में रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन से मिली जानकारी के मुताबिक बताया है कि मुस्लिम समुदाय हम पर अधिकार जमाने की बात कर रहे है, लेकिन हमने ऐसा कुछ नहीं होने दिया। हम चाहते हैं की जो बाबर के द्वारा अवैध निर्माण हुआ था उसकी जमीन हमको दे दी जाए हैं।
As the hearing in the #RamJanmabhoomi–#BabriMasjid land dispute case concludes in the #SupremeCourt, Bharatiya Janata Party (#BJP) MP #SakshiMaharaj has announced that #Ramtemple construction will begin in #Ayodhya from December 6.
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— IANS (@ians_india) October 16, 2019
अदालत में इस मुद्दे पर हुई चर्चा
इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि वक्फ बोर्ड के जमीन पर अधिकार के दावा पर आप क्या कहेंगे? इस बात का जवाब देते हुए वैद्यनाथन ने कहा कि ये लोग मंदिर के दावे को गलत बता रहे हैं लेकिन जब वहां पर पहले से ही मंदिर था, तो ऐसा कैसे बोल सकते हैं?
अब हो रही दोनों पक्षों के दावों पर बहस
जानकारी के मुताबिक रामलला विराजमान की ओर से सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के पास ऐसे कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं कि वो प्रमाण दे सके कि जमीन पर उनका अधिकार है। मुस्लिम पक्ष की ओर से ये दावा किया गया कि वहां 1922-1923 दिसंबर तक नमाज अदा की जा रही थी, लेकिन 1934 तक शुक्रवार की नमाज ही अदा की जाने लगी।
"Ram Temple Construction Will Begin From December 6," Says Sakshi Maharaj pic.twitter.com/jt33mAg9oZ
— URJA TV (@UrjaTv) October 17, 2019
हिंदू पक्षकार सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि 16 दिसंबर 1949 के बाद विवादित स्थान पर कोई नमाज़ अदा नहीं की गई। 1922-1923 दिसंबर की रात से रामलला वहां विराजमान थे। 23 दिसंबर 1949 को शुक्रवार था, लेकिन प्रतिमा होने की वजह से वहाँ पर नमाज़ नहीं हो सकी थी।



