दीपावली के अवसर पर दीयों का अपना अलग ही महत्व होता है। पौराणिक से ऐसी मान्यता चली आ रही है कि मिट्टी का दीपक जलाने से पराक्रम और शौर्य में वृद्धि होती है और परिवार में सुख समृद्धि, खुशहाली आती लेकिन वर्तमान समय मे लोगों का रुझान मिट्टी के दीपक में नजे होकर मोमबत्ती और बिजली की झालरों की ओर ज्यादा हो गया है।
चौदह साल के वनवास को पूरा कर, जब लंका पति रावण को मारकर प्रभु राम, माता जानकी और लक्ष्मण के साथ अयोध्या पहुंचे तो अयोध्यावासियों ने दीपक जलाकर अपनी खुशी का इजहार किया था। पूरी अयोध्या नगरी दीपो से जगमगा उठी थी।
दिवाली पर मिट्टी के दीपक जलाने का कारण
मिट्टी का दीपक जलाने के पीछे कई विचार हैं। लोगो की अपनी अपनी मान्यता है कि मिट्टी का दीपक जलाने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का निवास होता है। जानकारी के मुताबिक मिट्टी को मंगल ग्रह का प्रतीक कहा जाता है मंगल साहस, पराक्रम मेें वृद्घि करता है और तेल को शनि का प्रतीक कहा जाता है। शनि को भाग्य का देवता भी माना जाता है।
ऐसा करने से मंगल और शनि की कृपा आती है
कहा जाता है कि मिट्टी का दीपक जलाने से मंगल और शनि की कृपा आती है। इसके अतिरिक्त दीपक जलाने का महत्व उसकी रोशनी के कारण भी है। रोशनी को स्फूर्ति, सुख, समृद्धि का प्रतीक कहा जाता है। जबकि अंधकार को आलस्य, दुख, निर्धनता का प्रतीक कहा जाता है। इसलिए भी दीपक जलाने का बहुत अधिक महत्व है।
गांव में आज भी मिट्टी के दीपक को ही महत्व दिया जाता है। सभी के घर पर मिट्टी के दीपक ही जलाए जाते है। लेकिन आज बड़े शहरों में ये चलन विलुप्त होता जा रहा है। सभी मिट्टी के दीपक की जगह मोमबत्ती और बिजली की झालरों को अधिक महत्व देने लगे है।



