यह शख्स सीटी और ताली की आवाज से सैकड़ों पक्षी इकठ्ठा कर देते है, पक्षी प्रेमी मिसाल बन गये

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Birds Lover
Rajasthan man Satish Bairagi can bring many birds from his whistle and slaps. He is a birds lover and giving food to many birds.

Photo Credits: Dainik Bhaskar

Chittorgarh: भारत में कई जगह ऐसी है, जहां पर पक्षियों की कई प्रजातियों का भरमार है। पक्षी प्रेमी अक्सर इन जगहों पर विजिट करने जरूर जाते हैं। भारत में कई तरह के लोग हैं, जिनमें कुछ पशु पक्षी प्रेमी मिलेंगे, तो कुछ पशु पक्षी विरोधी भी मिलेंगे। संसार में सभी प्राणियों के लिए जगह सुनिश्चित है। फिर चाहे प्राणी बुद्धिजीवी हो या फिर एक जीव। भारत के कुछ राज्यों में एक जगह सुनिश्चित की गई है, जहां पर हर प्रजाति के पक्षी मिलते हैं।

अक्सर उन जगहों पर पशु प्रेमियों का ताता लगा हुआ दिखाई पड़ता है। जगहों की बात तो एक साधारण से बात हो जाती है, परंतु आज हम आपको एक ऐसे व्यक्ति के घर की बात बताएंगे, जहां उन्होंने अपने घर में ही वर्ड हाउस बना दिया है। जहां उनकी एक आवाज और सिटी को सुनकर 400 से भी ज्यादा पक्षी उड़ कर उनके पास पहुंच जाते हैं। आइए उस व्यक्ति के बारे में जाने।

सतीश बैरागी बने मिशाल

राजस्थान (Rajasthan) राज्य के अंतर्गत आने वाले चित्तौड़गढ़ (Chittorgarh) के मधुबन गांव के रहने वाले सतीश बैरागी एक बहुत ही महान पक्षी प्रेमी है। वे बताती है कि वर्ष 2018 में उनका घर का निर्माण हुआ था। उस समय उनके पास केवल एक पक्षी का जोड़ा उनके घर पर आता था, तब वे दाना डाल कर अपने काम पर चले जाते थे।

उसके बाद महामारी आ गई और पूरे देश में लॉकडाउन की स्थिति बन गई। उस समय लोगों ने घर में रहकर काफी कुछ सीखा समझा और काफी लोग उस समय का फायदा नहीं उठा सके। परंतु सतीश बैरागी बताते हैं कि लॉक डाउन के समय वे नेचर के एकदम करीब आ गए। जो पक्षी इंसानों से डरकर दूर भागते हैं, वहीं पक्षी (Birds) के वह करीब आ गए।

पक्षी परिवार के साथ घुलमिल

47 वर्षीय सतीश बैरागी (Satish Bairagi) बताते हैं कि जब देश में लॉकडाउन की स्थिति बनी और सब घर में कैद हो गए। उस समय उन्होंने इन पक्षियों को अपने हाथों से दाना खिलाना शुरू किया। धीरे-धीरे वे उनकी पत्नी और बच्चे और उनकी मां सभी मिलकर उन पक्षियों को अपने हाथों से दाना खिलाने लगे, जिससे पक्षियों का डर खत्म हो गया और वह सतीश बैरागी के परिवार से घुल मिल गए।

सतीश बताते हैं कि एक समय था, तब केवल दो पक्षी ही उनके घर आया करते थे, परंतु अब 400 से ज्यादा पक्षी उनके घर में आते हैं और दाना खाकर जाते हैं। सुबह शाम सतीश बैरागी और उनका परिवार इन पक्षियों को अपने हाथो से दाना खिला कर खुशी मनाता है। इनका कहना है कि लॉकडाउन ने उन्हें उन पक्षियों के बहुत करीब ले आया है जिससे वे बेहद खुश हैं।

मौसम के कारण हो जाते हैं पक्षी परेशान

दोस्तों हर वर्ष देश में तीन तरह के मौसम होते हैं ठंडी गर्मी बरसात। अक्षर पशु पक्षियों को इन मौसम की मार हमेशा ही झेलने को मिलती है। लोगों ने अपनी सुविधा के लिए जंगलों की कटाई कर दी है, जिससे पशु पक्षियों का आवास लगभग समाप्त हो गए।

Farmers Farm in India

ऐसे में कई बात भीषण गर्मी की चपेट में कई पक्षी मर जाते हैं और कई बार बारिश और ओलावृष्टि के कारण भी पक्षियों की जान चली जाती है। इन चीजों को जब सतीश ने समझा, तो उन्होंने सबसे पहले बारिश से बचने के लिए अपने ही घर में उन पक्षियों के लिए 35 से ज्यादा बर्ड हाउस बनाएं।

उन्होंने देखा कि बरसात के मौसम में जो दाना वे पक्षियों के लिए डालते थे, वह बारिश के कारण खराब हो जाता था, इसीलिए उन्होंने टीन शेड लगाए, जिससे उनका दाना खराब ना हो।

अब चुटकी और सिटी को आवाज पहचानने लगे पक्षी

सतीश बैरागी ने पक्षियों को ठंडी गर्मी और बरसात से बचाने के लिए अपने ही घर में एक बेहतरीन व्यवस्था कर दी। दोस्तों पशु पक्षियों में भी समझने की शक्ति होती है कि कौन उनका हित कर रहा है और कौन उनका अहित कर रहा है। जब उन्होंने सतीश बैरागी की मेहनत देखी, तो उन्हें समझ आ गया कि सतीश बैरागी उनके लिए हितकारी है ना कि आहितकारी।

सतीश की मां सुमित्रा देवी, पत्नी तारा वैष्णव और बेटा तनय बैरागी के द्वारा जब उन पक्षियों को अपने हाथों से दाना खिलाया, तो सभी पक्षी उनके साथ फैमिलियर हो गए। फल स्वरूप आज 400 से भी ज्यादा पक्षी उनके घर में रहते हैं और उनकी स्थिति और ताली की आवाज पहचान कर तुरंत उनके पास उड़कर पहुंच जाते हैं।

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