
Patna: हर व्यक्ति का दिमाग अलग-अलग तरह से चलता है कुछ लोग इतने जुगाड़ू होते हैं कि हर चीज में उन्हें जुगाड़ नजर आ जाता है और कुछ ऐसे होते हैं, जो कुछ नया बनाने के लिए काफी ज्यादा मेहनत करते हैं। व्यक्ति चाहे किसी भी वर्ग का हो एक साइंटिस्ट हो या फिर एक किसान हर व्यक्ति के अंदर एक छुपी हुई कला होती है, जो उन्हें प्लेटफार्म मिलने पर निखार देती है।
आज हम एक ऐसे किसान की बात करेंगे, जिसके कुछ नया करने की चाहत ने उन्हें बहुत कुछ नया सिखा दिया। आपको बता दें बिहार (Bihar) के रहने वाले एक किसान जिन्होंने ब्लैक पटेटो की खेती (Black potato farming) करके किसानो के लिए कुछ नया बना दिया है। आज हम इस लेख के माध्यम से ब्लैक पटेटो की खेती और उसके आकर्षक गुणों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
गया के किसान आशीष सिंह
दोस्तों आपको बता दें बिहार राज्य के अंतर्गत आने वाला गया (Gaya) जिला के रहने वाले किसान आशीष सिंह (Farmer Ashish Singh) ने यूट्यूब की मदद से इस फसल की शुरुआत की है। बताया जा रहा है कि आशीष सिंह को शुरू से ही कुछ नया और बेहतरीन करने की ललक रहती थी, जिस वजह से आज भी कुछ ऐसा कर पाए कि समाज में उनका नाम उभरकर सामने आया है।
किसान आशीष सिंह बताते हैं कि वह यूट्यूब की मदद से खेती किसानी और अन्य चीजों के बारे में सीखते रहते थे उन्होंने 1 दिन यूट्यूब पर ब्लैक पटेटो जो अमेरिका की रेट है, उसके बारे में सुना तो उन्होंने बीच लगाकर इसकी खेती प्रारंभ करने का विचार बना लिया।
आशीष सिंह के पहल
बताया जा रहा है कि किसान आशीष सिंह ने भारत में इस फसल की शुरुआत की है, उन्होंने अमेरिका से 14 किलो बीज मंगा कर आलू की इस नई ब्रीड की फसल लगाई। बताया जा रहा है कि किसान आशीष सिंह के खेत टिकारी प्रखंड के गुलरियाचक गांव में है। उन्होंने अपने खेत में ही यह फसल लगाई।

आशीष सिंह बताते हैं कि उन्होंने 10 नवंबर 2022 को खेतों में ब्लैक आलू के बीज बोए थे वे बताते हैं कि इस फसल को तैयार होने में 120 दिन का समय लगता है, तो 120 दिन यानी 4 महीने में यह फसल तैयार हो जाती है। उन्होंने 12 मार्च को अपने खेतों में हार्वेस्टिंग कराई जहा उनके आलू की फसल लगी थी।
एक बार में 120 किलो आलू का हुआ उत्पादन
स्टिंग के बाद उनके खेत से 120 किलोग्राम आलू प्राप्त हुए जबकि उन्हें उम्मीद थी कि 200 किलोग्राम के पार इन ब्लैक आलू की पैदावार होगी। बताते हैं कि मौसम की चपेट में आकर फसल की पैदावार कम रह गई, परंतु उन्हें खुशी है कि उन्होंने एक नया अविष्कार किया है।
बताया जा रहा है कि ब्लैक पटाखों की खेती अमेरिका के पर्वतीय क्षेत्र याने एंडीज में हुआ करती है और भारत में फसल की पहल बिहार राज्य से हुई है। बिहार राज्य के लिए यह एक नई अपॉर्चुनिटी है। बिहार राज्य एक समय गरीबों का राज्य कहा जाता था, परंतु अब वहां के लोगों ने नई-नई चीजों का अविष्कार करके उस राज्य को एक नामचीन राज्य में बदल दिया।
अन्य किसान भी है तैयारी में
किसान आशीष सिंह बताते हैं कि उन्होंने जब फसल की शुरुआत की तो अन्य किसान भी उनसे काफी प्रेरित हुए। अब बिहार राज्य के हर क्षेत्र के और भी किसान इन काले आलू की खेती के लिए तैयारी कर रहे हैं। बताते हैं कि इन आलू की डिमांड आसपास के अन्य राज्यों और शहरों से आ रही है।
वे कहते हैं कि लोग इन ब्लैक आलू के फायदे (Black Potato Benefits) के बारे में जानते हैं, इसीलिए लोगों की डिमांड है इन ब्लैक आलू की। किसान आशीष बताते हैं कि जब उन्होंने इस खेती की शुरुआत करने का विचार किया था, तो पहली चीज थी, काले आलू की फसल के लिए बीच की उपलब्धता।
वे बताते हैं कि उन्हें काले आलू के बीज 1500 RS प्रति किलोग्राम के हिसाब से प्राप्त हुए थे, जब उन्होंने यह फसल लगाई तो उन पौधों से बीजों का निर्माण भी हुआ है, अब वे अन्य किसानों को 300 से 400 रुपये किलो के हिसाब से अंग्रेजों को बेचकर आलू की इस किस्म को बढ़ावा देंगे।



