इस तरह जोइता मंडल भारत की पहली किन्नर जज बनी, बधाई में मिले पैसों से शिक्षा पूरी की थी

0
1127
Joyita Mondal judge
Story Of Joyita Mondal Who Is India's First Transgender Judge. Social Worker Joyita was appointed the judge of a Lok Adalat (civil court).

Kolkata: दोस्तों समाज महिला और पुरुष से मिलकर बनता है, इन दोनों का मिश्रण यानी किन्नर इस समाज का ऐसा नहीं होते किन्नरों का समाज अलग होता है। लोग हमेशा उन्हें एक हीन दृष्टि से देखते हैं। समाज में और कानून में ट्रांसजेंडर का कोई स्थान नहीं था।

किन्नरों को समाज अलग ही होता है वह नाच गाना करके बधाई लेकर अपना जीवन यापन करते हैं। परंतु अब नियम कानूनों में बदलाव आ गया है। समाज में भी अब दृष्टि बदल रही हैं। पहले जब शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे लोगों को आगे नहीं बढ़ाया जाता था आज ऐसे ही लोग समाज में स्थान पा रहे हैं।

समाज को अब दृष्टि बदलने की जरूरत है गोरे काले जात पात में फर्क छोड़कर आज उन्हें देश की तरक्की के विषय में सोचना चाहिए। कानून और संविधान में भी किन्नरों को स्थान दिया गया है, अब भी पढ़ लिखकर समाज का हिस्सा बन सकते हैं। आज हम एक ऐसे ही किन्नर जज (Kinnar Judge) के बारे में बात करेंगे जिसने इतिहास बदलने की हिम्मत की है।

ट्रांसजेंडर जज जोइता मंडल

भारत की पहली ट्रांसजेंडर जज (India’s First Transgender Judge) जोइता मंडल (Joyita Mondal) वर्तमान में पश्चिम बंगाल के इस्लामपुर के लोक अदालत में जज के पद पर कार्यरत है। जोइता मंडल का जज बनने का सफर काफी संघर्ष भरा था, क्योंकि वह एक किन्नर समाज से हैं। लोगों की दृष्टि उन पर एक अलग ही भावना से होती है। परंतु उन्होंने यह मुकाम हासिल करके यह साबित किया है कि समाज में किसी भी प्रकार के लोग कुछ भी कर सकते हैं, क्षमता शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक होती है।

Joyita Mondal Trans judge

सरकार ने भी अब ट्रांसजेंडर को एक समान अधिकार दिए हैं। जिसकी बदौलत वर्ष 2011 में जोइता मंडल ने ट्रांसजेंडर के कई मुद्दों पर काम किया और उन्हें हल भी किया। जोइता मंडल समाज के लिए काम करती है वह सामाजिक मुद्दों पर काम करके लोगों की मदद करती हैं।

लोग जोयता को एस्कोर्ट में देख हैरान हुए

जोइता जब जज बनकर सिक्योरिटी के साथ एस्कोर्ट के साथ कोर्टरूम पहुंची तो लोग उन्हें देखकर आश्चर्यचकित रह गए। लोगों का आश्चर्य का कारण उनका किन्नर समाज से होना था। किन्नर समाज से इसलिए भिन्न है क्योंकि वह एक लिंगी नहीं होते। उनके अंदर महिला और पुरुष दोनों के गुण पाए जाते हैं इसीलिए वे ट्रांसजेंडर कहलाते हैं।

जोइता को “लर्न्ड जज” (Learned Judge) की कैटेगरी में शामिल किया गया है। जोइता को दिजनापुर नोतुन आलो सासाइटी की फाउंडिंग मेंबर के लिए भी चुना गया है। समानता के अधिकार मिलने के बाद किन्नर समाज को जीवन का एक नया नजरिया मिला है। पहले इसी समाज को ही नजर से देखा जाता था, आज यही समाज के किन्नर ने न्यायधीश बनकर लोगों के साथ न्याय करना का बीड़ा उठाया है।

जोइता मंडल के संघर्ष भरे दिन

जोएता भले ही एक किन्नर थी। परंतु उन्होंने कभी किन्नरों वाले काम नहीं किए उन्होंने शुरू से शिक्षा को महत्व दिया। एक वक्त था जब उनके पास अपने दैनिक खर्चे निकालने के लिए भी पैसे नहीं हुआ करते थे और ना ही कोई नौकरी थी उस समय उन्हें भीख मांगने या फिर बधाई पार्टी में शामिल होने पर जोर दिया जाता था, परंतु उन्होंने इन हालातों से कभी हार नहीं मानी बल्कि मेहनत करती रही और सफलता प्राप्त की।

किन्नर समाज के लोगों का एक ही रोजगार है, वह है बधाई पार्टी और लोगों से पैसे मांगना उनके दैनिक खर्चे चलाने का एक जरिया होता है। इसीलिए जोइता को भी इस काम के लिए मजबूर किया जा रहा था। किन्नर समाज का परिवार नहीं होता कोई माता-पिता नहीं होते जो अपने बच्चों का खर्चा उठा सके उन्हें जो कुछ करना है वे स्वयं करते हैं, इसीलिए जोइता को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

बधाइयों में नाच कर मिले पैसों से की शिक्षा पूरी

समाज के लोगों ने जब उनका खाना खर्चा बंद किया, तो उन्हें मजबूरन शादी समारोह में बच्चे के जन्म पर जाकर नाचना गाना पड़ा। जिससे मिले पैसों से उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की। जोइता बचपन से ही काफी हूं ना रही है उनका पढ़ाई लिखाई में काफी मन लगता था इसलिए उन्होंने कोलकाता के कॉलेज अपनी स्नातक की पढ़ाई की।

ऐसा माना जाता है कि किन्नर समाज के लोगों द्वारा किसी परिवार को दुआ देने पर उनका परिवार काफी खुश और संपन्न हो जाता है परंतु जब जोइता कॉलेज की पढ़ाई के लिए कॉलेज गई तो उनके साथ ही लोगों ने उन पर तरह तरह के कमेंट किए और उन्हें भला बुरा सुनाया। इसीलिए उन्होंने बीच में ही अपनी शिक्षा को अधूरा छोड़ दिया और वह सामाजिक कार्य में जुट गई। जीवन ने उन्हें काफी कुछ दिखाया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here