
Jabalpur: ऐसा कहा जाता है कि घर की यदि एक महिला पढ़ लेती है, तो वह पूरे परिवार को आगे बढ़ने में मदद करती है। महिला दिवस के तौर पर महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार भी आए दिन नित नए कदम उठाती रहती है। इसलिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे प्रशासन ने नारे बनाकर समाज को जागृत करने की कोशिश की है।
जहां समाज के कुछ पिछड़े वर्ग में आज भी महिलाओं को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलता है, वहीं इसी समाज के कुछ ऐसे नागरिक हैं, जो दिन रात मेहनत करके अपनी बेटी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। और उसके लिए सही रास्ता बनाते हैं।
आज की हमारी कहानी एक ऐसे ही परिवार की है, जो बहुत ही साधारण परिस्थितियों से गुजरते हुए पिता ने अपनी बेटी को पढ़ाई में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से दिन रात मेहनत की और आज उनकी बेटी मात्र 28 साल की उम्र में सिविल जज (Civil Judge) बनने में सफलता अर्जित कर चुकी हैं।
आइए जानते हैं ये सक्सेस स्टोरी, एक आम लड़की से सिविल जज बनने तक की पूरी कहानी। जिसमें साबित होता है कि अगर मेहनत और लगन से कोई व्यक्ति लगातार प्रयास करें तो सफलता निश्चित है।
बहुत ही साधारण परिवार को बिलॉन्ग करती हैं निशा कुशवाहा
दोस्तों हम बात कर रहे हैं निशा कुशवाहा (Nisha Kushwaha) की जो बुरहानपुर (Burhanpur) मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की रहने वाली है। इनके पिता सीताराम कुशवाहा व्यवसायिक तौर पर किसान है। इनके पास खेतिहर जमीन के तौर पर मात्र 2 एकड़ जमीन का एक टुकड़ा है जिससे, इनकी जरूरत पूरी नहीं हो सकती थी। इसलिए 5 एकड़ जमीन अधिया के तौर पर ले कर टोटल 7 एकड़ की जमीन पर किसानी का काम करते हैं।
सीताराम जी ने देखा कि उनके 5 बच्चे हैं जिस वजह से सब की पढ़ाई और खर्चों की जिम्मेदारियां सिर्फ खेती से पूरी नहीं की जा सकती। इसलिए वह अपने शहर की एक बड़ी स्वीट्स की दुकान में कैशियर के तौर पर पार्ट टाइम जॉब भी करते हैं। आज इनकी मेहनत और प्रेरणा की कीमत निशा ने सिविल जज बनकर चुकाया है। रिजल्ट आने के बाद से ना केवल पिता बल्कि पूरे परिवार में खुशी को लहर दौड़ गई।
इंदौर से किया एलएलबी पूरे मध्यप्रदेश में किया था टॉप पाया गोल्ड मेडल
जानकारी के अनुसार निशा ने 12वीं के पश्चात लॉ सब्जेक्ट को अपने पिता की सलाह पर ही चुना था। इन्होंने डीएवीवी विश्वविद्यालय के अंतर्गत अपनी एलएलबी की डिग्री (LLB Degree) प्राप्त की। निशा पढ़ाई में एक ब्राइट स्टूडेंट रही है।
कॉलेज के लगभग हर वर्कशॉप में यह टॉप करती थी। इसलिए अपने एलएलबी के एग्जाम में पूरे मध्यप्रदेश में टॉप किया था। नतीजतन उस समय की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने गोल्ड मेडल की खिताब से निशा को सम्मानित किया था। इनके परफॉर्मेंस को देखते हुए कॉलेज के दौरान ही निशा को जॉब के बहुत सारे ऑफर आने शुरू हो गए। परंतु उनका लक्ष्य कहीं और जाने का बन चुका था।
विवाह का दबाव बनने पर पहले करवाई छोटी बहन की शादी
बातचीत के दौरान निशा जी ने बताया की पारिवारिक नियमों के अनुसार 25 वर्ष की उम्र पहुंचने के बाद विवाह का दबाव उनके ऊपर बनने लगा था, क्योंकि परिवार में छोटी बहन भी थी। लेकिन उनके पढ़ने की लगन को देखते हुए पिता ने निशा को सपोर्ट करते हुए उनकी छोटी बहन का विवाह कर दिया और निशा को आगे पढ़ाई का मौका मिल गया। निशा से बड़ी एवं छोटी बहनों का विवाह हो चुका है वही मझली बहन अविवाहित है। एवं सबसे छोटा भाई अभी 10th क्लास की तैयारी कर रहा है।
सिविल जज की तैयारी के लिए चुना जबलपुर शहर
निशा ने बातचीत के दौरान बताया कि उनकी पढ़ाई का स्तर देखते हुए उनका मन था कि वो एक दिन सिविल जज बने। और इसके लिए जरूरी थी एक बेहतर एंट्रेंस कोचिंग क्लासेस की, जिसके लिए आसपास सलाह लेने पर यह निश्चित हुआ कि, अपनी सिविल जज की तैयारी जबलपुर शहर (Jabalpur City) से करेंगे।
बुरहानपुर की बेटी कु. निशा कुशवाहा द्वारा सिविल जज की परीक्षा पास कर शहर का नाम गौरान्वित करने पर आज उनसे भेट कर स्वागत अभिनन्दन किया एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनायें दी ! pic.twitter.com/HvR8sBC57P
— Manoj Ladhave (@Manoj_ladhave) February 28, 2023
आपको बता दें मात्र डेढ़ वर्ष की तैयारी में ही मात्र 28 साल की उम्र में निशा कुशवाहा ने सिविल जज बनकर एक अभूतपूर्व सफलता अर्जित की है और वह अपने शहर की पहली सिविल जज है। आज निशा कुशवाहा समाज की अन्य लड़कियों के लिए एक प्रेरणा बनकर उभरी है। हम उनके बेहतर भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हैं।





